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Exclusive Interview: ट्रेड डील, रूसी डीजल और पीएम मोदी-ट्रंप के रिश्ते... रुबियो-गोर ने दिया हर सवाल का जवाब

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आजतक के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में भारत-अमेरिका ट्रेड डील, रूसी तेल, वीजा नियम, रक्षा सहयोग और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर बात की. दोनों ने पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तों, क्वाड, चीन पर निर्भरता घटाने और रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने की कोशिशों पर भी अपना पक्ष रखा.

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रुबियो और गोर ने ट्रेड डील पर जवाब दिए. (Photo- ITGD)
रुबियो और गोर ने ट्रेड डील पर जवाब दिए. (Photo- ITGD)

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं. वहीं, रूसी तेल की खरीद, भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिकी वीजा नियम और पाकिस्तान के साथ वॉशिंगटन के रिश्तों को लेकर भी कई सवाल हैं. इन मुद्दों पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने आजतक के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अपनी बात रखी.

इंटरव्यू में दोनों ने भारत-अमेरिका रिश्तों के मौजूदा हालात से लेकर रक्षा सहयोग, परमाणु ऊर्जा, क्वाड और रूस-यूक्रेन जंग तक कई मुद्दों पर जवाब दिए.

इंटरव्यू में सबसे पहले भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बात हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कह चुके हैं कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं और यह डील अलग तरह की होगी. इस पर रुबियो ने कहा कि समझौते से जुड़े कुछ मुद्दों पर अभी बातचीत चल रही है, हालांकि अब ऐसे मुद्दे बहुत कम बचे हैं.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या बोले रुबियो?

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई ऐसी बाधा आएगी, जो दोनों देशों को समझौते तक पहुंचने से रोक दे. हालांकि, उन्होंने डील की शर्तों और टैरिफ से जुड़ी बारीकियों पर टिप्पणी करने से इनकार किया. रुबियो ने कहा कि समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होना चाहिए और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही इस पर अच्छी सहमति बन जाएगी.

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जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत को टैरिफ में स्थिरता मिलेगी और क्या उसे बार-बार बदलते टैरिफ की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा, तो रुबियो ने कहा कि किसी भी समझौते का मकसद ही व्यापार को लेकर स्पष्टता और भरोसा पैदा करना है. इससे कारोबारियों को पता होता है कि निवेश करते समय किन नियमों का पालन करना होगा.

भारत में अमेरिकी निवेश कहां बढ़ेगा?

भारत में अमेरिकी निवेश के अगले बड़े अवसरों पर सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच कारोबार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. उनके मुताबिक, करीब 15 साल पहले द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 240 अरब डॉलर हो गया है.

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच निवेश दोनों दिशाओं में हो रहा है. अमेरिकी कंपनियां भारत में खासकर आईटी क्षेत्र में काम कर रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियां भी अमेरिका में बड़े निवेश कर रही हैं. उन्होंने एस्सार ग्रुप के इन्वेस्टमेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनी अमेरिका में अरबों डॉलर की सुविधाएं विकसित कर रही है, जिससे वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा. उनके मुताबिक, दोनों देशों का लक्ष्य ऐसे अवसर तलाशना है, जिनसे भारत और अमेरिका दोनों को फायदा हो. उन्होंने कहा कि एक देश में होने वाला निवेश दूसरे देश में रोजगार और कारोबार को भी बढ़ावा दे सकता है.

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रूसी डीजल और तेल पर अमेरिकी रुख क्या है?

मार्को रुबियो से जब आजतक ने पूछा कि भारत को पहले रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिकी दबाव और टैरिफ का सामना करना पड़ा, तो अब अमेरिका की तरफ से रूसी डीजल की खरीद और भारत के लिए रूसी कच्चे तेल से जुड़े प्रतिबंधों में छूट देने के पीछे क्या वजह है.

इस पर विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि विदेश नीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसलों को सिर्फ एक देश या एक संघर्ष के नजरिये से नहीं देखा जा सकता. उन्होंने कहा कि अमेरिका रूस-यूक्रेन जंग को खत्म करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस जंग का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. इसके साथ होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में पैदा हुए हालात ने भी ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है.

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रुबियो के मुताबिक, ट्रंप ने कुछ समय के लिए वैश्विक बाजार में ऊर्जा की अतिरिक्त आपूर्ति की अनुमति देकर सही फैसला लिया. इससे सिर्फ अमेरिका को नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों को भी फायदा हो सकता है, क्योंकि कई देशों में डीजल की कीमतें बढ़ी हुई हैं.

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भारत को लेकर रुबियो ने कहा कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अलग-अलग सोर्सेज पर निर्भरता बढ़ाने की दिशा में पहले से काम कर रहा है. उनके मुताबिक, भारत के हित में है कि वह किसी एक देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहे. उन्होंने कहा कि मुद्दा सिर्फ रूसी तेल की खरीद घटाने का नहीं, बल्कि अमेरिका, वेनेजुएला और पश्चिमी गोलार्ध के दूसरे देशों से ज्यादा तेल खरीदने का भी है.

मार्को रुबियो ने भारत की रिफाइनिंग क्षमता की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने के लिए रिफाइनिंग जरूरी है और भारत के पास इस क्षमता को और बढ़ाने की गुंजाइश है.

जामनगर रिफाइनरी देखने क्यों गए थे रुबियो?

जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी के दौरे को लेकर रुबियो ने कहा कि उनका मकसद इस बड़ी सुविधा को करीब से देखना और यह समझना था कि वहां काम कैसे होता है. उन्होंने इसे प्रभावशाली सुविधा बताया. उन्होंने यह भी कहा कि रिलायंस अमेरिका के ब्राउन्सविल में एक परियोजना में निवेश कर रही है, जिसके 2029 तक चालू होने की उम्मीद है.

मार्को रुबियो के मुताबिक, जामनगर दौरा ऐसी कंपनी से बातचीत करने का अवसर था, जो भारत के साथ-साथ अमेरिका में भी रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने में निवेश कर रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की रिफाइनिंग क्षमता बढ़ने से पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को प्रोसेस करने में मदद मिलेगी और दुनिया मध्य पूर्व के तेल पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगी.

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भारत में छोटे परमाणु रिएक्टरों पर क्या उम्मीद?

भारत के नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश के लिए रास्ता खोलने और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) तकनीक पर सवाल पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि इस क्षेत्र में अच्छी प्रगति हो रही है. उन्होंने शांति बिल का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भारत में SMR और निजी तकनीक के लिए रास्ता खुला है. उन्होंने माना कि नियामकीय प्रक्रियाओं और तकनीकी जटिलताओं के कारण ऐसे समझौतों में समय लगता है.
 
मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को उन शुरुआती देशों में से एक मान रहा है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके पहले SMR लगाए जा सकते हैं. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर वॉशिंगटन, दिल्ली और मुंबई में बैठकें हुई हैं. उनके मुताबिक, सहयोग सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और जल्द प्रगति की उम्मीद है.

पाकिस्तान से रिश्ते और आतंकवाद पर अमेरिका का जवाब

मुंबई के ताज होटल में हुए इंटरव्यू में रुबियो से 26/11 आतंकी हमलों का भी जिक्र किया गया. उनसे पूछा गया कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती करीबी से भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर असर न पड़ने का भरोसा कैसे दिया जा सकता है.

मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका के वैश्विक हित हैं और इसलिए उसे दुनिया के कई देशों के साथ संबंध रखने पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका के रिश्ते नए नहीं हैं और इनका मकसद वहां के फैसलों पर सकारात्मक प्रभाव डालना भी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध भारत के साथ अमेरिकी रिश्तों की कीमत पर नहीं हैं.

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विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि अमेरिका आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं को समझता है, क्योंकि वह खुद भी आतंकवादी हमलों का शिकार रहा है. उन्होंने ISIS, अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने आतंकवाद से लड़ने के लिए लगातार कदम उठाए हैं.

ऑपरेशन सिंदूर पर क्या बोले रुबियो?

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान मार्को रुबियो की कूटनीतिक भूमिका को लेकर भी सवाल पूछा गया. उनसे 10 मई 2025 को हुई बातचीत के पीछे की जानकारी साझा करने को कहा गया.

मार्को रुबियो ने कहा कि वह बातचीत के अंदर की बातें सार्वजनिक नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसा करने से भविष्य में दूसरे पक्षों के साथ बातचीत करना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि जब दो देशों के बीच तनाव बढ़ने और बड़े संघर्ष की आशंका होती है, तो अमेरिका रचनात्मक भूमिका निभाने की कोशिश करता है.

अमेरिका विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के साथ अमेरिका के पुराने संबंध हैं. पाकिस्तान के साथ भी उसके रिश्तों में सुधार हुआ है. इन संपर्कों का इस्तेमाल तनाव कम करने और ऐसी स्थिति से बचने के लिए किया जा सकता है, जो बड़े युद्ध में बदल जाए. रुबियो ने कहा कि अमेरिका युद्ध के बजाय कारोबार, साझेदारी और लोगों की सुरक्षा को बढ़ावा देना चाहता है.

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रक्षा सहयोग और F-35 पर क्या कहा?

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी और तकनीक साझा करने के सवाल पर सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन पहले से हो रहा है. उन्होंने लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसी कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका में रक्षा उत्पादन से जुड़े रोजगार साथ-साथ बढ़ रहे हैं.

इस पर सर्जियो गोर ने जवाब दिया और कहा कि दोनों देशों का रक्षा सहयोग अपने उच्च स्तर पर है. उन्होंने बताया कि पिछले महीने करीब 500 अमेरिकी सैनिकों ने भारत में 'युद्ध अभ्यास' में हिस्सा लिया था. उन्होंने 'तरंग शक्ति' अभ्यास का भी जिक्र किया और कहा कि इसमें पहली बार अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों ने भारत में भारतीय विमानों के साथ संयुक्त अभ्यास किया.

अमेरिकी दूत गोर ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार बताया और कहा कि क्वाड के तहत भी दोनों देश सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने संकेत दिया कि अगले महीने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बैठक कराने की दिशा में काम हो रहा है.

क्वाड और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

क्वाड और चीन की बढ़ती ताकत के बीच भारत-अमेरिका के सहयोग पर रुबियो ने कहा कि उनके विदेश मंत्री बनने के बाद पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी. उन्होंने दावा किया कि पिछले डेढ़ साल में विदेश मंत्री स्तर पर क्वाड की बैठकें पिछले चार साल की तुलना में काफी ज्यादा हुई हैं. रुबियो ने कहा कि जल्द ही नेताओं के स्तर पर (यानी पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के लेवल पर) भी बैठक होने की उम्मीद है. उन्होंने समुद्री निगरानी, समुद्र के नीचे मौजूद केबलों की सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया.

सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका और भारत किसी एक देश पर अपनी अर्थव्यवस्था की अहम जरूरतों के लिए अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहते. उनके मुताबिक, दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी, बायोमेडिसिन, दवाओं और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं.

सर्जियो गोर ने कहा कि भारत को 'पैक्स सिलिका' पहल में शामिल करने के पीछे दोनों देशों के बीच भरोसा एक अहम वजह है. उन्होंने बताया कि अमेरिका के अटॉर्नी जनरल, ड्रग एन्फोर्समेंट एजेंसी के प्रमुख और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी भी भारत के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए आने वाले हैं.

भारतीय पेशेवरों के वीजा पर क्या बोले रुबियो?

अमेरिका में कुशल भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए वीजा महंगा होने से जुड़े सवाल पर रुबियो ने कहा कि ये बदलाव भारत को निशाना बनाकर नहीं किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में लंबे समय से समस्याएं रही हैं और कुछ कारोबारी वीजा कार्यक्रमों में धोखाधड़ी और दुरुपयोग की शिकायतें भी रही हैं.
 
मार्को रुबियो के मुताबिक, अमेरिका अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था को बदल रहा है ताकि वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वहां के नागरिकों के हित में काम करे. उन्होंने माना कि जिन देशों के नागरिक इन बदलावों से ज्यादा प्रभावित होते हैं, उन्हें लग सकता है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन ये नियम दुनिया के सभी देशों पर लागू होते हैं.

मार्को रुबियो ने कहा कि भारत की सरकार से भी उम्मीद है कि वह अपने लोगों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगी. इसी तरह ट्रंप प्रशासन भी अमेरिकी नागरिकों, कर्मचारियों और देश के हितों को सबसे पहले रखेगा. सवाल पर सर्जियो गोर ने भी जवाब दिया और कहा कि 'अमेरिका फर्स्ट' का मतलब 'अमेरिका अलोन' यानी 'अमेरिका अकेला' नहीं है. उनके मुताबिक, भारत का 'इंडिया फर्स्ट' नजरिया भी स्वाभाविक है और दोनों देशों को अपने मतभेदों के बावजूद सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए.

रूस-यूक्रेन जंग खत्म करने का रास्ता क्या है?

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरफ से अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय बैठक की संभावना पर रुबियो ने कहा कि जंग खत्म करना मुश्किल है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आना होगा. उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के केंद्र में डोनबास क्षेत्र को लेकर विवाद है. रुबियो के मुताबिक, रूस इस क्षेत्र पर नियंत्रण चाहता है, जबकि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के कारण इसे छोड़ना नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि यह जंग सैन्य तरीके से खत्म नहीं होगी, बल्कि कूटनीतिक समाधान की जरूरत है.

मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों पक्षों को कुछ रियायतें देनी पड़ सकती हैं, तभी ऐसा समझौता संभव होगा, जिससे युद्ध समाप्त हो सके. अमेरिका दोनों पक्षों को बातचीत के लिए साथ लाने में मदद करना चाहता है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि सिर्फ बैठक होने से समाधान की गारंटी नहीं है.

पीएम मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर क्या बोले सर्जियो गोर?

इंटरव्यू के आखिर में सर्जियो गोर से पूछा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ काम करने का उनका अनुभव कैसा है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ ट्रंप के रिश्ते किस तरह के हैं. गोर ने ट्रंप को सीधा बोलने वाला और नतीजों पर ध्यान देने वाला नेता बताया. उन्होंने कहा कि ट्रंप तेजी से काम करना और फैसलों को लागू होते देखना चाहते हैं. पीएम मोदी के साथ उनके रिश्तों पर गोर ने कहा कि दोनों नेता अच्छे दोस्त हैं और काम आगे बढ़ाने और नतीजे देने को लेकर उनकी सोच मिलती है.

सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच इस महीने कई बार फोन पर बातचीत हुई है और बहुत सी चीजें पर्दे के पीछे भी होती हैं, जिनकी जानकारी आम लोगों को नहीं होती. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और दोनों नेताओं के बीच बातचीत जारी रहेगी.

ट्रंप को रुबियो ने बताया ऐतिहासिक नेता

मार्को रुबियो से भी पूछा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ काम करने का उनका अनुभव कैसा है. इस पर उन्होंने ट्रंप को एक ऐतिहासिक शख्सियत बताया. रुबियो ने कहा कि ट्रंप पारंपरिक राजनेता की तरह नहीं सोचते, बल्कि कारोबारी नजरिये से फैसले लेते हैं. उन्होंने कहा कि ट्रंप ऐसे विचारों पर भी काम करते हैं, जिन्हें दूसरे लोग असंभव मानते हैं.

रुबियो के मुताबिक, ट्रंप के साथ काम करने वालों को यह भरोसा मिलता है कि वे ऐसे काम कर सकते हैं, जो पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व के तहत शायद संभव नहीं होते. सर्जियो गोर ने भी कहा कि भविष्य में ट्रंप के कार्यकाल को ऐतिहासिक फैसलों और उपलब्धियों के लिए याद किया जाएगा.

क्या रुबियो लड़ेंगे राष्ट्रपति चुनाव?

इंटरव्यू के आखिर में रुबियो से आजतक ने पूछा कि क्या वह 2028 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनेंगे. इस पर उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर अब और बात नहीं करना चाहते. उन्होंने कहा कि वह पहले ही अमेरिकी मीडिया को कई बार जवाब दे चुके हैं और फिलहाल उनकी दो जिम्मेदारियां हैं, जिनमें उनका पूरा समय और ऊर्जा लग रही है. उन्होंने कहा कि वह अभी उन्हीं जिम्मेदारियों पर ध्यान दे रहे हैं.

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