अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत के साथ जेट डील और रक्षा सहयोग पर महत्वपूर्ण बातें कही हैं. आजतक के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सर्जियो गोर ने साफ कहा कि अमेरिका अपना सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान F-35 हर किसी को नहीं देता. यह विमान सिर्फ उन्हीं देशों को मिलता है जिन पर अमेरिका पूरा भरोसा करता है. भारत को उन्होंने ऐसा ही भरोसेमंद साझेदार बताया. उनका बयान भारत-अमेरिका संबंधों की गहराई को दिखाता है. रक्षा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग की ओर इशारा करता है.
गोर ने बताया कि पिछले एक महीने में ही 500 अमेरिकी सेना के सैनिक भारत में युद्धाभ्यास नाम के संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल हुए. इसके अलावा तरंग शक्ति अभ्यास में पहली बार अमेरिकी F-35 विमान भारत आए और भारतीय वायुसेना के साथ अभ्यास किया.
यह ऐतिहासिक कदम है क्योंकि F-35 जैसी स्टील्थ तकनीक वाले विमान आसानी से किसी देश में नहीं भेजे जाते. अमेरिका इन्हें सिर्फ उन सहयोगियों के साथ साझा करता है जिनसे उसकी रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है.
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क्वॉड और भारत की भूमिका
गोर ने भारत को क्वॉड समूह का बहुत मूल्यवान साझेदार बताया. क्वाड में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. यह समूह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए काम करता है. F-35 का भारत में आना और संयुक्त अभ्यास इस बात का सबूत है कि अमेरिका भारत को सिर्फ व्यापारिक या राजनयिक दोस्त नहीं बल्कि सैन्य स्तर पर भरोसेमंद सहयोगी मानता है.
जेट डील की चर्चा के बीच यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई देश F-35 खरीदने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अमेरिका चुनिंदा देशों को ही अनुमति देता है. यह सहयोग सिर्फ अभ्यास तक सीमित नहीं. दोनों देश तकनीक साझा करने, इंटर-ऑपरेबिलिटी बढ़ाने और क्षेत्रीय चुनौतियों का मिलकर सामना करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. F-35 की मौजूदगी से भारतीय वायुसेना को आधुनिक युद्ध की बारीकियां समझने का मौका मिला. साथ ही अमेरिकी पक्ष को भी भारतीय परिस्थितियों और क्षमताओं का अनुभव हुआ.
गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका रक्षा रिश्ते अब नए स्तर पर पहुंच रहे हैं. F-35 जैसे विमानों का आना और बड़े पैमाने पर सैनिक अभ्यास दोनों देशों के बीच विश्वास की मिसाल हैं. आम आदमी के लिए इसका मतलब है कि भारत की सुरक्षा क्षमता मजबूत हो रही है और विश्व मंच पर उसकी रणनीतिक अहमियत बढ़ रही है.
हालांकि कोई आधिकारिक डील अभी तय नहीं हुई है लेकिन ऐसे बयान भविष्य के संभावित सहयोग के संकेत देते हैं. दोनों देशों को इस विश्वास को बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा ताकि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा मजबूत रहे.