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भाई को फोन आया- तबीयत खराब है, अस्पताल पहुंचे तो सफेद चादर में मिला शव... झकझोर देगी चोरबागान की कहानी

दोपहर का वक्त था... 64 साल के विकास भट्टाचार्य घर से निकले... इरादा था, दुर्गापूजा के पंडाल घूमेंगे, मां दुर्गा के दर्शन करेंगे और फिर घर लौट आएंगे... शाम हुई तो सफेद चादर में अस्पताल में उनका शव रखा था. जिस शहर में मां दुर्गा के स्वागत की रौनक थी, उसी शहर में कई परिवारों की दुनिया उजड़ चुकी थी. आखिर चोरबागान के उस पंडाल में क्या हुआ कि पूजा देखने निकले लोग घर ही नहीं लौटे?

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बिलखते चेहरों और दर्दनाक मंजर की कहानी. (Photo: ITG)
बिलखते चेहरों और दर्दनाक मंजर की कहानी. (Photo: ITG)

कोलकाता में दुर्गापूजा चल रही थी. शहर के पंडालों में भीड़ उमड़ रही थी. लोग परिवार और दोस्तों के साथ मां दुर्गा के दर्शन करने निकले थे. किसी को पंडालों की सजावट देखनी थी, तो कोई हर साल की तरह पूजा घूमने पहुंचा था. लेकिन उत्तर कोलकाता के चोरबागान में शनिवार शाम कुछ ऐसा हुआ कि कई परिवारों के लिए त्योहार मातम में बदल गया. किसी ने अपनी पत्नी को भीड़ में खो दिया.

किसी की 17 साल की बेटी दोस्तों के साथ पूजा देखने निकली थी, लेकिन घर नहीं लौटी. और उत्तर हावड़ा के सलकिया में रहने वाले तापस भट्टाचार्य को तो पहले यही बताया गया कि उनके बड़े भाई की तबीयत खराब है. वह अस्पताल पहुंचे. वहां सफेद चादर से ढका शव मिला. चेहरे से कपड़ा हटाया, तो सामने बड़े भाई विकास भट्टाचार्य थे.

विकास 64 साल के थे. अविवाहित थे. दुर्गापूजा के दौरान पंडाल घूमना उन्हें बहुत पसंद था. हर साल अकेले ही मां दुर्गा के दर्शन करने निकल जाते थे. शनिवार यानी 17 अक्टूबर को भी वह दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर से निकले थे. उन्हें क्या पता था कि इस बार की पूजा उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगी.

यहां देखें वीडियो

विकास के परिवार के मुताबिक, वह हर साल दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता के अलग-अलग पंडाल देखने जाते थे. शनिवार को भी वह इसी इरादे से घर से निकले. परिवार को लगा कि वह पंडाल घूमकर लौट आएंगे. लेकिन शाम को तापस भट्टाचार्य के पास पुलिस का फोन आया. उन्हें बताया गया कि उनके भाई की तबीयत खराब है.

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यह भी पढ़ें: बारिश, भीड़ और कन्फ्यूजन... कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान कैसे मची भगदड़, 19 मौतों की पूरी कहानी

यह सुनकर तापस कोलकाता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे. वहां उन्हें विकास का शव सफेद चादर से ढका हुआ मिला. तापस ने चेहरे से चादर हटाई, तो उन्हें अपने बड़े भाई का चेहरा दिखाई दिया. अब भाई की तबीयत पूछने अस्पताल पहुंचे तापस के सामने उनकी मौत की हकीकत थी.

Kolkata Durga Puja Stampede Brother Rushed to Hospital Call Found Body White Sheet

विकास के परिवार ने इस हादसे के लिए पूजा पंडाल में इंतजामों पर सवाल उठाए हैं. तापस का आरोप है कि वहां भीड़ को संभालने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. उन्होंने संकरे रास्तों और पंडाल के भीतर कम रोशनी का भी जिक्र किया. परिवार चाहता है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए.

बारिश शुरू हुई, रास्ते संकरे थे, फिर बिगड़े हालात

चोरबागान में उस शाम क्या हुआ था? वहां मौजूद लोगों के बयानों से धीरे-धीरे तस्वीर सामने आ रही है. नदिया जिले के चकदह के रहने वाले राम सरकार अपनी पत्नी के साथ चोरबागान गए थे. उन्होंने बताया कि पंडाल के आसपास की गलियों में भारी भीड़ जमा थी. लोग कतार में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. तभी तेज बारिश शुरू हो गई.

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बारिश ने हालात और मुश्किल कर दिए. राम के मुताबिक, पंडाल से बाहर निकल रहे कुछ लोग बारिश से बचने के लिए वापस लौटने लगे. दूसरी तरफ, एंट्री गेट से आने वाले लोग भी बारिश से बचने के लिए पंडाल के भीतर घुसने लगे. यानी एक तरफ से लोग बाहर निकलना चाह रहे थे, तो दूसरी तरफ से भीड़ अंदर आ रही थी.

Kolkata Durga Puja Stampede Brother Rushed to Hospital Call Found Body White Sheet

संकरे रास्तों में लोगों का दबाव बढ़ता गया. कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ने लगी. लोग एक-दूसरे से टकराने लगे और फिर भगदड़ जैसे हालात बन गए. कई लोग गिर पड़े. उनके पीछे आ रहे लोगों के लिए रुकना मुश्किल हो गया. राम अपनी पत्नी के साथ थे. लेकिन अफरा-तफरी के बीच दोनों बिछड़ गए. उन्होंने इधर-उधर तलाश की. कुछ देर बाद पत्नी लोगों के नीचे दबी मिलीं. वह बेहोश थीं.

राम का आरोप है कि मौके पर उनकी पत्नी को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस मौजूद नहीं थी. उनके मुताबिक, पुलिस की एक गाड़ी से पत्नी को अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

सोचिए, कोई अपने जीवनसाथी के साथ त्योहार मनाने निकला हो. कुछ देर पहले तक दोनों साथ हों. फिर अचानक भीड़ का दबाव बढ़े और एक इंसान दूसरे को तलाशता रह जाए. राम के बयान से हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है. साथ ही, मौके पर मेडिकल हेल्प और एंबुलेंस को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं.

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17 साल की बरनाली भी दोस्तों के साथ निकली थी

इस हादसे में 17 साल की बरनाली हलदर की भी मौत हो गई. उनके परिजनों के मुताबिक, बरनाली शनिवार शाम करीब छह बजे घर से कोलकाता के दुर्गापूजा पंडाल देखने निकली थीं. वह अपनी सहेलियों के साथ चोरबागान पहुंची थी. बरनाली और उनकी एक दोस्त साकू को हादसे में चोटें आईं और उनकी जान चली गई. परिजनों ने आरोप लगाया कि अगर पंडाल बनाने और भीड़ संभालने के दौरान जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते.

Kolkata Durga Puja Stampede Brother Rushed to Hospital Call Found Body White Sheet

परिजनों ने इस बात पर भी दुख जताया कि अब इतने लोगों की जान जाने के बाद घटना की वजहों पर चर्चा करने का क्या फायदा, जब नुकसान हो चुका है. बरनाली की उम्र 17 साल थी. वह दोस्तों के साथ पूजा देखने निकली थी. इस उम्र में दोस्तों के साथ त्योहार घूमना, पंडाल देखना और घर लौटकर अपने अनुभव शेयर करना आम बात है. लेकिन उनके परिवार के लिए यह शाम कभी न भूल पाने वाला दुख बन गई.

इन तीन कहानियों को देखिए. विकास हर साल की तरह पंडाल घूमने निकले थे. राम अपनी पत्नी के साथ थे. बरनाली दोस्तों के साथ पूजा देखने गई थीं. किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में उनकी जिंदगी बदल जाएगी.

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आयोजक सजल घोष ने क्या कहा?

चोरबागान हादसे पर बीजेपी विधायक और कोलकाता के प्रमुख दुर्गापूजा आयोजनों में शामिल संतोष मित्रा स्क्वायर पूजा के आयोजक सजल घोष ने कहा कि ये एक हादसा है. उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी का पक्ष नहीं ले रहे हैं और घटना में कुछ चूक हुई हो सकती है, जिसकी जांच होनी चाहिए. सजल घोष ने कहा कि ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है. गलतियों को समझकर भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के उपाय किए जाने चाहिए.

सवाल यह है कि चोरबागान में भीड़ आखिर बेकाबू कैसे हुई? क्या संकरे रास्तों पर लोगों की आवाजाही के हिसाब से इंतजाम किए गए थे? बारिश के दौरान भीड़ बढ़ने पर क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था थी? क्या मौके पर पर्याप्त पुलिसकर्मी, एंबुलेंस और मेडिकल हेल्प मौजूद थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही साफ हो सकेंगे. अभी परिजनों के आरोपों और मौके पर मौजूद लोगों के बयानों की जांच जरूरी है. यह भी पता लगाना होगा कि भगदड़ की परिस्थितियां कैसे बनीं और किसी स्तर पर लापरवाही हुई.

Kolkata Durga Puja Stampede Brother Rushed to Hospital Call Found Body White Sheet

दुर्गापूजा पश्चिम बंगाल का बड़ा सांस्कृतिक आयोजन है. इन दिनों कोलकाता में पंडाल देखने के लिए भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं. ऐसे में भीड़ को सुरक्षित तरीके से कंट्रोल करना, एंट्री और एग्जिट खुला रखना और इमरजेंसी में लोगों की तुरंत मदद करना बेहद जरूरी है. चोरबागान की घटना के बाद इन इंतजामों की जांच होनी चाहिए. 

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लेकिन जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके लिए ये सवाल सिर्फ व्यवस्था से जुड़े नहीं हैं. ये उनकी जिंदगी से जुड़े सवाल हैं. तापस भट्टाचार्य को भाई की तबीयत खराब होने का कॉल आया था. वह अस्पताल पहुंचे तो विकास का शव मिला. राम सरकार अपनी पत्नी के साथ पूजा देखने गए थे, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें पत्नी लोगों के नीचे दबी मिलीं. बरनाली हलदर दोस्तों के साथ निकली थीं, लेकिन परिवार के पास लौटकर नहीं आईं. ये लोग दुर्गापूजा देखने निकले थे. किसी ने नहीं सोचा होगा कि घर से निकलते समय की गई विदाई आखिरी साबित होगी.

चोरबागान में हुई मौतों की जांच से हादसे की वजहें सामने आ सकती हैं. यह पता चल सकता है कि कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाने होंगे. लेकिन इन परिवारों के लिए कोई जांच उनके अपनों को वापस नहीं ला सकती. अब जरूरत है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारी तय हो और भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा के इंतजामों को गंभीरता से लिया जाए. ताकि अगली बार जब कोई परिवार मां दुर्गा के दर्शन करने घर से निकले, तो उसे अस्पताल से आने वाले ऐसे फोन का इंतजार न करना पड़े.

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