जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) सोमवार को एक बार फिर नए विवाद से चर्चा में आ गया है. सामने आया है कि यहां एक कार्यक्रम के दौरान जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने 'उमर खालिद की रिहाई' की मांग को लेकर नारेबाजी की. आरोप है कि JNUSU ने SSS-2 बिल्डिंग के बाहर 'उमर खालिद को रिहा करो' और 'जेल के ताले टूटेंगे, सारे साथी छूटेंगे' जैसे नारे लगाए.
असल में सोमवार को यूनिवर्सिटी कैंपस में उमर खालिद की किताब 'Fractured Communities' पर चर्चा आयोजित की गई थी. इसी किताब पर चर्चा के दौरान विवाद हो गया. इसी दौरान (JNUSU) के छात्र नेता 'उमर खालिद को रिहा करो' जैसे नारे लगाने लगे. इसके जवाब में कार्यक्रम का विरोध कर रहे ABVP समर्थकों ने 'खालिद पाकिस्तानी है' जैसे नारे लगाए.
JNUSU ने उमर खालिद की किताब पर चर्चा के लिए कार्यक्रम आयोजित किया था. छात्र संघ के मुताबिक, JNU प्रशासन ने आखिरी समय में कार्यक्रम के लिए ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी. इसके बावजूद JNUSU ने कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया और बाद में इसे SSS-2 बिल्डिंग के बाहर किया गया. इस दौरान ABVP समर्थक भी मौके पर पहुंचे और कार्यक्रम के खिलाफ नारेबाजी की. दोनों पक्षों की ओर से नारे लगाए जाने के कारण कार्यक्रम के दौरान तनाव की स्थिति बन गई.

JNUSU ने प्रशासन और ABVP पर लगाए आरोप
घटना के बाद JNUSU ने बयान जारी कर JNU प्रशासन पर कार्यक्रम की अनुमति आखिरी समय में रद्द करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने प्रशासन को 'संघी प्रशासन' बताते हुए दावा किया कि यह कदम विश्वविद्यालय में बहस, चर्चा और असहमति की संस्कृति को सीमित करने की कोशिश है. JNUSU ने दावा किया कि अनुमति रद्द होने और विरोध के बावजूद सैकड़ों छात्र कार्यक्रम में शामिल हुए. छात्र संघ के मुताबिक, इससे छात्रों ने यह संदेश दिया कि वे विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
JNUSU ने ABVP पर भी कार्यक्रम बाधित करने का आरोप लगाया. छात्र संघ ने दावा किया कि ABVP समर्थकों ने स्पीकर से माइक्रोफोन छीनने की कोशिश की और पैनलिस्टों के साथ दुर्व्यवहार किया. हालांकि, इन आरोपों पर ABVP या JNU प्रशासन की प्रतिक्रिया का विवरण तत्काल उपलब्ध नहीं है.
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JNUSU ने कहा कि वह JNU में बहस और चर्चा की संस्कृति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. छात्र संघ ने उमर खालिद समेत उन लोगों के समर्थन की बात भी कही, जिन्हें उसने अपने बयान में 'राजनीतिक कैदी' बताया. साथ ही ABVP पर हिंसा, नफरत और अकादमिक चर्चाओं को बाधित करने की राजनीति करने का आरोप लगाया.