झारखंड में छात्र पिछले 11 दिनों से JPSC और JSSC परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं. इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ दिया है कि वे छात्रों के साथ हैं. छात्र परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार करने की मांग लेकर धरने पर बैठे हैं.
हेमंत सोरेन ने आश्वासन दिया कि इस मामले में जांच एजेंसियों द्वारा दबिश भी दी जा रही है. उन्होंने छात्रों को बातचीत के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि जिनकी जो भी मांगें सरकार से हैं वह अपनी बातों को सामने रखें.
उन्होंने कहा, "बहुत सारी मांगें हैं. एजेंसियां हैं, कौन किस तरह काम कर रहा है आपको पता है."
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मुख्यमंत्री का कहना है कि कई लोगों को पहले ही गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है और एजेसियां कई जगहों पर अब भी छापेमारी कर रही हैं. मामले पर उन्होंने स्पष्ट कहा है कि एजेंसियां इसमें असरदार तरीके से तेजी से काम कर रही हैं. उनका कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि जल्द ही कोई ठोस समाधान निकलेगा.
मुख्यमंत्री का कहना है कि फिलहाल इस मामले पर उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से बात नहीं की है लेकिन अगर आगे जरूरत पड़ी तो वे गृह मंत्री से बात करेंगे. मुख्यमंत्री ने छात्रों को आश्वासन देते हुए कहा है कि सरकार के दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं. जिनकी जो भी मांग है, वे आगे आकर सरकार के सामने अपनी बात रख सकते हैं. उन्होंने कहा, "हमें पहले से ही कुछ हद तक इन मुद्दों की जानकारी है, और अगर वे अपनी बात रखते हैं, तो हम निश्चित रूप से उस पर गंभीरता से विचार करेंगे."
वहीं झारखंड में छात्र 11 दिनों से धरने पर बैठे हैं. वे इसे दिल्ली से ज्यादा बड़ा आंदोलन बता रहे हैं. उनका कहना है कि वहां एक मंत्री के इस्तीफे की मांग थी, जबकि झारखंड का आंदोलन पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहा है.
रांची के रवींद्र भवन और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास सैकड़ों छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हैं. उनका आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. इसी वजह से वे परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं.