भारत-बांग्लादेश सीमा पर मंगलवार को ऐसा मामला सामने आया, जिसने दोनों देशों की सीमा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए. BSF ने सीमा के पास एक बांग्लादेशी किसान को हिरासत में लिया तो कुछ देर बाद दो भारतीय किसानों को पकड़कर बांग्लादेश ले जाया गया. मामला बढ़ने पर BSF और BGB के बीच फ्लैग मीटिंग हुई, जिसके बाद तीनों को वापस सौंप दिया गया.
पूरा मामला पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से सटे इचाखाली बॉर्डर का है, जो बांग्लादेश के मेहरपुर जिले में पड़ता है. यहां 70 साल के अब्दुल मन्नान सीमा के पास अपनी डेढ़ बीघा जमीन पर हरी मिर्च और दूसरी फसलें उगाते हैं. बांग्लादेश का दावा है कि अब्दुल मन्नान सीमा के समीप स्थित अपने खेत में कीटनाशक का छिड़काव कर रहे थे. इसी दौरान मन्नान को बीएसएफ जवानों ने हिरासत में ले लिया.
वहीं, बीएसएफ का कहना है कि अब्दुल मन्नान मंगलवार सुबह बॉर्डर पिलर नंबर 124/4-S के पास सीमा पार कर घास काट रहे थे. इसी दौरान BSF जवानों ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
गुस्से में पार कर दी सरहद
बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो और द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही मन्नान के पकड़े जाने की खबर उनके गांव में फैली, रिश्तेदार और स्थानीय लोग भड़क गए. उनका कहना था कि जवानों से बार-बार गुजारिश करने के बाद भी बुजुर्ग को नहीं छोड़ा गया.
ऐसे में गुस्साए ग्रामीण बॉर्डर पिलर नंबर 123/3-S के पास अंतर्राष्ट्रीय सीमा लांघकर भारत में घुस आए. वहां खेतों में काम कर रहे सचिन दास और रतन बिस्वास नाम के दो भारतीय किसानों को पकड़कर जबरन बांग्लादेश खींच ले गए. इसके बाद दोनों को पास के BGB (Border Guard Bangladesh) कैंप में सौंप दिया गया.
इमरजेंसी मीटिंग के बाद सुलझा मामला
बॉर्डर पर बने इस तनाव को देखते हुए BSF और BGB ने मंगलवार दोपहर दो से तीन बजे के बीच जीरो लाइन पर इमरजेंसी फ्लैग मीटिंग बुलाई. आपसी बातचीत के बाद BSF ने बुजुर्ग बांग्लादेशी किसान को रिहा किया, जिसके बदले BGB ने दोनों भारतीय किसानों को सुरक्षित BSF के सुपुर्द कर दिया.
जलपाईगुड़ी में भी हुई थी ऐसी ही हरकत
बदले की नीयत से सीमा पार से होने वाले अपहरण का यह पहला मामला नहीं है. बीते शनिवार को जलपाईगुड़ी जिले में भी ऐसी ही वारदात हुई थी. वहां चाय बागान में काम कर रहे दीपांकर गोप को करीब 20 बांग्लादेशी उठाकर ले गए थे. वह मामला भी तारबंदी काटकर भारत में घुस रहे एक बांग्लादेशी की गिरफ्तारी से जुड़ा था.
सीमा से जुड़े इन लगातार मामलों ने किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. फिलहाल फ्लैग मीटिंग के बाद तीनों अपने-अपने देश लौट चुके हैं, लेकिन सीमा पर ऐसे घटनाक्रम दोनों देशों के लिए नई चुनौती बनते दिख रहे हैं.