हरियाणा के सोनीपत जिला न्यायालय में मंगलवार को वकीलों ने बलूचिस्तान के समर्थन में प्रदर्शन किया. वकील हाथों में बलूचिस्तान के झंडे लेकर न्यायालय परिसर में एकत्रित हुए और बलूचिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए. प्रदर्शन के दौरान एक कागज पर बलूचिस्तान के समर्थन में संदेश भी लिखा गया था. वकीलों ने बलूचिस्तान के प्रति अपना समर्थन जताते हुए कहा कि भारत को बलूचिस्तान के मुद्दे पर उसके साथ खड़ा होना चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि बलूचिस्तान पाकिस्तान को अपना देश नहीं मानता और वहां के लोग अपनी अलग पहचान और स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं.
वकीलों ने यह भी कहा कि बलूचिस्तान की संस्कृति और रहन-सहन भारत से मिलते हैं. उन्होंने बलूचिस्तान के समर्थन में आगे भी प्रदर्शन करने की बात कही. सोनीपत जिला न्यायालय में हुए प्रदर्शन के दौरान वकीलों के हाथों में तिरंगा नहीं बल्कि बलूचिस्तान का झंडा नजर आया. प्रदर्शनकारियों ने झंडे के साथ बलूचिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए. वकीलों ने बलूचिस्तान के समर्थन में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. प्रदर्शन में शामिल वकीलों ने कहा कि वो बलूचिस्तान के लोगों की मांग का समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि भारत इस मुद्दे पर उनकी आवाज को समर्थन दे.
वकीलों के मुताबिक, बलूचिस्तान 11 अगस्त 1947 से भारत को अपना देश मानता है. उन्होंने यह दावा भी किया कि बलूचिस्तान ने खुद को आत्मनिर्भर देश घोषित किया है और पाकिस्तान को अपना देश नहीं मानता. ये दावे प्रदर्शन में शामिल वकीलों की तरफ से किए गए. प्रदर्शनकारियों ने इसी आधार पर भारत और बलूचिस्तान के बीच संबंधों का उल्लेख करते हुए अपना समर्थन जताया.
महाशिवरात्रि पर भी की बलूचिस्तान के लिए प्रार्थना
प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने महाशिवरात्रि का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने जल चढ़ाया और बलूचिस्तान की मांग जल्द पूरी होने की कामना की. वकीलों ने कहा कि बलूचिस्तान की संस्कृति और रहन-सहन भारत से जुड़ा हुआ है. उनका कहना था कि इसी वजह से वे बलूचिस्तान के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं. प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने पाकिस्तान पर बलूचिस्तान पर जबरन कब्जा करने का आरोप भी लगाया. उनका दावा था कि पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान पर कब्जा किया हुआ है.
प्रदर्शन में शामिल वकीलों ने कहा कि पाकिस्तान की सेना बलूचिस्तान पर जबरदस्ती कब्जा किए हुए है. उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान की सेना इसका विरोध करती है और पाकिस्तान को कई बार चुनौती देती रही है. वकीलों ने कहा कि बलूचिस्तान हमेशा भारत के साथ रहा है और अब भारत को भी बलूचिस्तान का समर्थन करना चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को एक आत्मनिर्भर देश बनाने की मांग का समर्थन करने की बात कही. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए.
UN और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाने की बात
वकीलों ने कहा कि वे बलूचिस्तान के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र यानी UN और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक अपनी बात पहुंचाएंगे. उनका कहना है कि बलूचिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जरूरत है. प्रदर्शनकारियों ने यह भी घोषणा की कि जल्द ही सोनीपत में बलूचिस्तान के समर्थन में एक बड़ी रैली आयोजित की जाएगी. इस रैली के जरिए अपनी मांग को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी की जा रही है.
वकीलों ने कहा कि वो संयुक्त राष्ट्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बलूचिस्तान के समर्थन में खून से लिखा पत्र भेजेंगे. इसके जरिए वो भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बलूचिस्तान के समर्थन की अपील करेंगे. प्रदर्शन के दौरान वकीलों ने कहा कि यह उनका शुरुआती प्रदर्शन है. आने वाले दिनों में इसे बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है. प्रस्तावित रैली में बड़ी संख्या में लोगों को शामिल करने की बात कही गई है.
वकीलों का कहना है कि रैली के दौरान बलूचिस्तान के समर्थन में अपनी मांग को मजबूती से उठाया जाएगा. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र और प्रधानमंत्री मोदी तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जाएगी. प्रदर्शन में शामिल वकीलों ने कहा कि उनका उद्देश्य बलूचिस्तान के समर्थन में आवाज उठाना है. उन्होंने भारत सरकार से भी इस मुद्दे पर समर्थन देने की अपील की.
वकीलों ने रखी अपनी बात
प्रदर्शन के दौरान वकील सतेंद्र दहिया ने बलूचिस्तान के समर्थन में अपनी बात रखी. उन्होंने बलूचिस्तान के इतिहास, संस्कृति और पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर प्रदर्शनकारियों की तरफ से किए जा रहे दावों का उल्लेख किया. वहीं, वकील संदीप हुड्डा ने भी बलूचिस्तान के समर्थन में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत को बलूचिस्तान के साथ खड़ा होना चाहिए और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाना चाहिए. सोनीपत जिला न्यायालय में हुए इस प्रदर्शन में वकीलों ने बलूचिस्तान के झंडे के साथ नारे लगाए और अपनी मांग को सामने रखा. अब प्रदर्शनकारियों ने आने वाले दिनों में बड़ी रैली करने और संयुक्त राष्ट्र तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से लिखा पत्र भेजने की घोषणा की है.