देश के पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून ने भारी तबाही मचाई है. लगातार हो रही बारिश, बाढ़, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाओं में अब तक करीब 120 लोगों की मौत हो चुकी है. हिमाचल प्रदेश, असम, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में हजारों लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि कई सड़कें, पुल और रेलवे ट्रैक क्षतिग्रस्त हो गए हैं.
हिमाचल प्रदेश में जुलाई महीने में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 66 लोगों की जान गई है. कांगड़ा में बादल फटने से कई मकान और गौशालाएं बह गईं. राज्य में 145 सड़कें बंद हैं, 508 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप हैं और 43 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं. मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
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असम में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई है. पिछले 24 घंटे में 21 लोगों की मौत के बाद इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या 31 पहुंच गई है. 16 जिलों के 5.64 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है.
जम्मू-कश्मीर में पिछले 48 घंटे में बाढ़ और भूस्खलन से 23 लोगों की मौत हुई है. भारी बारिश के चलते अमरनाथ यात्रा एहतियातन रोक दी गई है और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद कर दिया गया है. सेना, SDRF और पुलिस राहत कार्य में जुटी हैं.
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नागालैंड में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है, जबकि चार लोग अब भी लापता हैं. अरुणाचल प्रदेश में भी पांच जिलों में नई बाढ़ आई है और करीब 1.49 लाख लोग मानसून से प्रभावित हुए हैं.
वहीं ओडिशा में लगातार बारिश के कारण महानदी में जलस्तर बढ़ने पर हीराकुंड बांध के 10 गेट खोल दिए गए हैं. प्रशासन ने निचले इलाकों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है.