दिल्ली में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेन सेवाओं पर रोक लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी. कोर्ट अब इस मामले में गुरुवार को सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि रविवार को हुई सुनवाई में वह पीठ का हिस्सा नहीं थे और अब कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए समय चाहिए. वहीं, केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दाखिल की गई है.
दरअसल, ये याचिकाएं 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं में रुकावट और प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लेने से जुड़े मामलों पर हैं. यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में हुआ था.
जस्टिस वी. मोहना की तबीयत खराब, टली सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को मंगलवार को कई याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी. हालांकि, जस्टिस वी. मोहना की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई गुरुवार तक टाल दी गई. सूर्यकांत ने यह भी कहा कि रविवार को हुई सुनवाई में वह पीठ का हिस्सा नहीं थे. अब कई याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिन्हें पढ़ने के लिए समय चाहिए.
शुरुआत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकीलों को बताया कि जस्टिस मोहना की तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वह कोर्ट आए हैं. इसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई टालने का अनुरोध किया. उन्होंने कहा कि सेहत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. इस पर वकील गोपाल शंकरनारायणन समेत दूसरे वकीलों ने भी इस पर सहमति जताई.
केंद्र सरकार को 15 अक्टूबर तक देना होगा जवाब
मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेन सेवाओं में रुकावट को लेकर दाखिल याचिका में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है. इसी आधार पर अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार का हलफनामा तैयार है, लेकिन उसमें कुछ और जानकारी जोड़नी है. इसके बाद केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जवाब की कॉपी याचिकाकर्ताओं के वकीलों को दी जाए.
57 मेट्रो स्टेशन बंद करने के निर्देशों पर उठे थे सवाल
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले दिल्ली में 57 मेट्रो स्टेशन बंद करने और नई दिल्ली व हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द करने से जुड़ी सूचनाएं सामने आई थीं.
9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि प्रदर्शन की आशंका के चलते दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की जानी चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेवाओं को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन उन पर पूरी तरह रोक नहीं लगनी चाहिए. इसके बाद वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने अवमानना याचिका दाखिल की. इसमें अधिकारियों पर कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया और कार्रवाई की मांग की गई.
पत्रकारों और वकीलों के साथ दुर्व्यवहार का मामला भी
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों के साथ मारपीट के आरोपों पर दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को जवाब देने के लिए मौजूद रहने को कहा है. इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान नेताओं, छात्रों, वकीलों और दूसरे लोगों को हिरासत में लेने से जुड़े मामले भी कोर्ट में पहुंचे हैं. कुछ याचिकाओं में कहा गया है कि नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया था.
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन ने वकीलों को हिरासत में लेने और उनके साथ दुर्व्यवहार के मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी इस मामले में याचिका दाखिल की है.
चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने वाले कानून पर भी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक याचिका पर भी नोटिस जारी किया है. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानून की धारा 16 को चुनौती दी गई है. इस धारा के तहत चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक काम से जुड़े कुछ मामलों में कानूनी कार्रवाई से छूट मिलती है. ADR ने इस प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया है.
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को प्रदर्शन, हिरासत, मेट्रो और ट्रेन सेवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई होगी. केंद्र सरकार को भी 15 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना है.