पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के फरमान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. इस संवेदनशील मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. हालात यह हैं कि इस मामले को लेकर अब अदालती लड़ाई और बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी जाने लगी है.
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत सबसे पहले टीएमसी नेता सिद्दीकुला चौधरी के बयान से हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में पुलिस की ओर से कई मस्जिदों में जाकर लाउडस्पीकर उतारने या हटाने का दबाव बनाया जा रहा है. इस आदेश के सामने आने के बाद मुस्लिम संगठनों और नेताओं में गहरी नाराजगी फैल गई है.
इस कड़ी में अब बागी टीएमसी विधायकों और अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है. विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और देश के संविधान पर सीधा हमला है.
मुख्यमंत्री शुभेंदु से मिलेंगे बागी टीएमसी विधायक
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के विरोध में बागी टीएमसी विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल कल शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा. बागी टीएमसी विधायक अक्रुज्जामान ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि उनके पास भी इस तरह की शिकायतें पहुंची हैं जो बेहद दुखद हैं.
उन्होंने कहा, 'हमारा देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है. संविधान ने हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की पूरी आजादी दी है. हिंदू मंदिरों में घंटी बजाएंगे और पूजा करेंगे, मुसलमान मस्जिदों में अजान और नमाज पढ़ेंगे, और ईसाई चर्च में प्रार्थना करेंगे, यही हमारे देश की संस्कृति है. हम शुक्रवार को मुख्यमंत्री से मिलकर यह मांग करेंगे कि इस तरह की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए.'
इस मामले पर केवल बागी विधायक ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी आक्रामक तेवर अपनाए हुए हैं. ISF विधायक नौशाद सिद्दीकी इस पूरे मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील करेंगे. इसके साथ ही सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है. सिद्दीकुल्ला चौधरी ने भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार को आंदोलन की चेतावनी दे डाली है.
बीजेपी बोली-यहां बाबर या तुगलक का शासन नहीं
इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कड़े शब्दों में कहा कि यह एक लोकतांत्रिक देश है, कोई भी विरोध कर सकता है, लेकिन किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि अब यहां बाबर या तुगलक का शासन नहीं है.
शमिक भट्टाचार्य ने दोहरे मापदंडों की राजनीति से बचने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि 'मेरी बात चले, लेकिन दूसरे की नहीं' जैसी राजनीति को बंगाल की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी.
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