पुणे के हिंजवड़ी इलाके में स्थित इंफोसिस का आईटी कैंपस अचानक सुर्खियों में आ गया है. दरअसल, आज गुरुवार को देश के सबसे खतरनाक कमांडो और अमेरिकी सेना के जवान वहां पहुंचे. एक पल के लिए हर कोई हैरान रह गया. लेकिन घबराने की कोई बात नहीं थी, क्योंकि यह किसी असली आतंकी हमले की घटना नहीं, बल्कि एक मॉक ड्रिल थी.
दरअसल, पुणे के हिंजवड़ी स्थित इंफोसिस परिसर में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड यानी एनएसजी (NSG) और अमेरिकी कमांडोज ने साथ मिलकर एक ज्वाइंट मॉक ड्रिल यानी सैन्य अभ्यास किया. इस हाई-इंटेंसिटी अभ्यास में पिंपरी-चिंचवड की स्थानीय पुलिस भी पूरी मुस्तैदी के साथ शामिल रही.
गौरतलब है, इस अभ्यास का मकसद किसी भी आपातकालीन या आतंकी हमले जैसी स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी और तेज प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था.
अधिकारियों का कहना है कि आज के दौर में साइबर सिटी और बड़े आईटी पार्क आतंकियों के निशाने पर रहते हैं. ऐसे में किसी भी आपातकालीन स्थिति या अचानक होने वाले आतंकी हमले से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां कितनी तैयार हैं, यह परखने के लिए यह ड्रिल की गई. इस अभ्यास का मेन मकसद भारत और अमेरिका की सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल को बेहतर बनाना था.
कैसे दिया गया अभ्यास को अंजाम?
इस मॉक ड्रिल के दौरान सुरक्षा बलों ने एक काल्पनिक आतंकी हमले की स्थिति को तैयार किया. कमांडोज ने बेहद कम समय में आईटी कैंपस को अपने कब्जे में लिया और स्थिति को संभाला. अमेरिकी कमांडोज और एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडोज के इस संयुक्त अभियान ने यह दिखा दिया कि वे किसी भी बड़े खतरे से चुटकियों में निपट सकते हैं.
इस अभ्यास में पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने भी अहम भूमिका निभाई. स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के तालमेल से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश दिया गया. इस पूरी कवायद का मकसद यही है कि देश के महत्वपूर्ण संस्थानों और आईटी हब की सुरक्षा पुख्ता रहे. इस सफल मॉक ड्रिल के बाद स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली.
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