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'10वीं की मार्कशीट भी दे दूं...' बेंगलुरु में मकान मालिक के 'इंटरव्यू' से परेशान किराएदार

बेंगलुरु में एक किराए का मकान ढूंढ रहे नए शख्स को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब मकान मालिक ने केवल किराया और डिपॉजिट ही नहीं पूछा, बल्कि सवालों की ऐसी लंबी लिस्ट थमा दी कि लगा मानो कोई जॉब इंटरव्यू चल रहा हो. रेडिट पर शेयर की गई यह कहानी अब इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रही है.

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 बेंगलुरु में घर पाना हुआ मुश्किल (Photo-ITG)
बेंगलुरु में घर पाना हुआ मुश्किल (Photo-ITG)

बेंगलुरु आए एक नए किराएदार के लिए बजट में मकान ढूंढना तो फिर भी आसान रहा, लेकिन मकान मालिकों के सवालों की लंबी लिस्ट का जवाब देना बेहद भारी पड़ गया. रेडिट पर अपना अनुभव शेयर करते हुए इस शख्स ने बताया कि उसे महंगे किराए और भारी-भरकम सिक्योरिटी डिपॉजिट का अंदाजा तो था, लेकिन 'मकान मालिक के इंटरव्यू' के लिए वो बिल्कुल तैयार नहीं था.

इस किराएदार के मुताबिक, मकान मालिक सिर्फ सैलरी और कंपनी के बारे में पूछकर चुप नहीं हुए. उनसे पूछा गया कि वे शादीशुदा हैं या नहीं, आगे शादी का क्या प्लान है, माता-पिता कितनी बार मिलने आते हैं, दोस्त घर आते हैं या नहीं, वे खाने में क्या पसंद करते हैं और ड्रिंक या स्मोक करते हैं या नहीं. हद तो तब हो गई जब उनके आने-जाने के टाइम के साथ-साथ लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल, पिछले तीन महीने की सैलरी स्लिप और पुराने मकान मालिक का रेफरेंस भी मांग लिया गया.

किराएदार ने इस पूरे अनुभव पर चुटकी लेते हुए लिखा, "बेंगलुरु का किराया तो परेशान करने वाला है ही, लेकिन ये इंटरव्यू अलग ही लेवल पर हैं. क्या अब 10वीं का रिपोर्ट कार्ड, ब्लड ग्रुप और पुराने मकान मालिक का सिफारिश पत्र भी देना पड़ेगा?

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इसके साथ ही उसने अपने जेब पर पड़े भारी बोझ का भी जिक्र किया ₹35,000 से ज्यादा का महीना का किराया, 10 महीने का एडवांस सिक्योरिटी डिपॉजिट और पानी का अनिश्चित बिल.

सोशल मीडिया पर बंटी लोगों की राय

रेडिट पर यह पोस्ट काफी वायरल हुई, लेकिन इस पर लोगों के अनुभव अलग-अलग रहे,. एक यूजर ने लिखा, "मैं 2017 से बेंगलुरु में रह रहा हूं और 5 अलग-अलग मकान बदल चुका हूं, लेकिन मेरे साथ कभी ऐसा नहीं हुआ."

वहीं एक अन्य यूजर का कहना था कि यह सब मकान मालिक पर निर्भर करता है. कुछ लोगों ने अपने अच्छे अनुभव भी शेयर किए, जहां एक किराएदार ने बताया कि उसके पुराने मकान मालिक ने पूरे महीने की डिपॉजिट काटने के बजाय सिर्फ खोई हुई चाबी और थोड़े-बहुत पेंट का खर्च ही लिया.

बेंगलुरु जैसे टेक शहर में अब घर ढूंढना सिर्फ एक कागजी प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि कई लोगों के लिए यह एक कड़े इंटरव्यू को पास करने जैसा बन गया है.


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