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नासिक में महसूस किए गए भूकंप के झटके, कुछ मकानों में आई दरारें

नासिक में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. जानकारी के मुताबिक, कुछ जगहों पर मकानों में दरारें आने की भी खबर है. इससे पहले जुलाई में भी यहां भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.

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पहला भूकंप शनिवार रात करीब 10 बजे महसूस किया गया था. (Photo- Representational)
पहला भूकंप शनिवार रात करीब 10 बजे महसूस किया गया था. (Photo- Representational)

महाराष्ट्र के नासिक जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. शनिवार रात आए 4.3 तीव्रता के भूकंप के बाद रविवार सुबह 3.3 तीव्रता का एक और झटका महसूस किया गया. लगातार आए इन झटकों से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए. राहत की बात यह है कि अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है.

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, पहला भूकंप शनिवार रात करीब 10 बजे महसूस किया गया था. इसके बाद रविवार सुबह 5 बजकर 33 मिनट पर दूसरा झटका दर्ज किया गया. भूकंपीय गतिविधि महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास हटगढ़ पर्वत श्रृंखला के निकट भानवड़ इलाके में 5 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज की गई.

भूकंप के झटके नासिक शहर के अलावा सुरगाणा, कलवण, देवला, चांदवड़, पेठ, दिंडोरी और निफाड़ में भी महसूस किए गए. प्रशासन ने जानकारी दी कि कुछ घरों की दीवारों में दरारें आने की सूचना मिली है. हालांकि, किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. एहतियात के तौर पर इलाके के बांधों का भी निरीक्षण किया गया है और वे पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं.

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अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील

जिला कलेक्टर आयुष प्रसाद ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा, 'लोगों को डरने की जरूरत नहीं है और वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें. हालांकि, सतर्क रहते हुए सुरक्षा संबंधी सावधानियां जरूर बरतें.'

बता दें, नासिक में हाल के दिनों में भूकंप आने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले 25 से 28 जुलाई के बीच और फिर 6 अगस्त को भी जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. वहीं, प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, और लोगों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें.

जानें क्यों आता है भूकंप?

धरती के अंदर 7 प्लेट्स ऐसी होती हैं जो लगातार घूम रही हैं. ये प्लेट्स जिन जगहों पर ज्यादा टकराती हैं, उसे फॉल्ट लाइन जोन कहते हैं. बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं. जब प्रेशर ज्यादा बनने लगता है कि तो प्लेट्स टूटने लगती हैं. इनके टूटने के कारण अंदर की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है. इस डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है.

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