उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर हो रहे चुनाव में सपा और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाकर बड़ा दांव खेल दिया है. सपा के इस कदम ने बीजेपी के सामने 10वीं सीट के चुनावी समीकरण को काफी दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है.
यूपी विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी सात सीटें और सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती हैं. ऐसे में 10वीं राज्यसभा सीट के लिए असल मुकाबला होना है, जिसके लिए बीजेपी और सपा दोनों ही पूरी तैयारी में हैं.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने राज्यसभा के लिए जिस तरह से उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी को अपने 'सरप्राइज' उम्मीदवार के रूप में उतारा है, उससे बीजेपी की नींद उड़ गई है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या धनराज नथवानी के सामने बीजेपी अपना 8वां उम्मीदवार उतार पाएगी, क्योंकि यह नाम समाजवादी पार्टी के लिए ट्रम्प कार्ड माना जा रहा है.
उद्योगपति धनराज नथवानी सपा ने बनाया प्रत्याशी
बीजेपी समर्थित राज्यसभा सांसद परिमल नथवानी के बेटे धनराज नथवानी को सपा ने राज्यसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी के रूप में उतारा है. रामगोपाल यादव के साथ ही धनराज नथवानी ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है. धनराज नथवानी जामनगर में रिलायंस पेट्रोलियम के डायरेक्टर हैं. धनराज परिमल नथवानी के पिता परिमल नथवानी झारखंड से बीजेपी समर्थित प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा सांसद बने हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कॉर्पोरेट अफेयर्स के डायरेक्टर परिमल नथवानी भारतीय कॉर्पोरेट और राजनीतिक जगत में खास पहचान रखने वाला चेहरा हैं. राजनीति और बिजनेस के अलावा वह गुजरात फुटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रसिद्ध नाथद्वारा मंदिर बोर्ड के सदस्य भी रहे हैं. धनराज के पिता ने जिस तरह झारखंड में राज्यसभा का चुनाव जीता है, उसके बाद अब यूपी में उनके बेटे पर सपा ने दांव लगाया है.
नथवानी को सपा ने उतारकर उड़ाई बीजेपी की नींद
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने धनराज नथवानी को उतार दिया है, जिसके बाद बीजेपी के लिए सियासी टेंशन बढ़ गई है. अब बीजेपी के लिए अपने आठवें उम्मीदवार के लिए विधायक जुटाना लगभग नामुमकिन हो सकता है, क्योंकि संख्या बल के हिसाब से सपा का पलड़ा भारी पड़ सकता है. सपा ने तीसरा प्रत्याशी उतारने का मन बना रखा है, जिसे लेकर अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. माना जा रहा है कि 3 या फिर 5 अक्टूबर को सपा का तीसरा प्रत्याशी नामांकन दाखिल करेगा.
समाजवादी पार्टी को अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए जितने विधायकों की जरूरत है, बीजेपी को उससे कहीं ज्यादा विधायकों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में अगर क्रॉस वोटिंग के लिए विधायकों का जुगाड़ नहीं हुआ, तो क्या बीजेपी आठवां उम्मीदवार उतार पाएगी? यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
राज्यसभा चुनाव कैसे बीजेपी के लिए बना चैलेंज
समाजवादी पार्टी के भीतर से सेंधमारी या क्रॉस वोटिंग कराना अब बीजेपी के लिए बहुत टेढ़ी खीर है. पिछले चुनाव में जिन लोगों ने क्रॉस वोटिंग की थी, बहुत मुमकिन है कि उनमें से 3 विधायक इस बार वापस समाजवादी पार्टी के पक्ष में वोट कर दें.
सपा के टिकट पर जीते पल्लवी पटेल, आशुतोष मौर्य और विनोद चतुर्वेदी के अपनी पार्टी के साथ भले ही रिश्ते बिगड़े हैं, लेकिन वे बीजेपी से अभी बंधे नहीं हैं. ऐसे में इन तीनों विधायकों के सपा की तरफ लौटने की संभावना बनी हुई है.
क्रॉस वोटिंग का डर समाजवादी पार्टी को नहीं बल्कि बीजेपी के सहयोगी दलों को सबसे ज्यादा है. ओमप्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और संजय निषाद की पार्टी के विधायक धनराज परिमल नथवानी के निशाने पर हो सकते हैं. यही नहीं, राजा भैया बेशक बीजेपी के साथ दिखाई देते हैं, लेकिन उनके विधायक भी राज्यसभा चुनाव में वोट देने के लिए स्वतंत्र हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए आठवीं सीट जीतना अब लगभग नामुमकिन सा होता जा रहा है.
राज्यसभा चुनाव में सपा के वोटों का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सदस्य हैं, लेकिन फिलहाल 397 सदस्य मौजूद हैं. यूपी में सपा के 111 विधायक 2022 में जीतकर आए थे, जिनमें से चार विधायक (मनोज पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, पूजा पाल, अभय सिंह) निष्कासित हो चुके हैं. इसके अलावा 2024 में सपा के चार विधायक सांसद बने, जिनमें से केवल एक सीट ही सपा वापस जीत सकी और तीन सीटें हार गई. इसके अलावा आजम खान और अब्दुल्ला आजम की दो खाली सीटों पर भी बीजेपी और अपना दल ने जीत दर्ज की.
सूबे में सपा की सीटें घटकर 102 रह गईं, जिसके बाद विधायक सुधाकर सिंह के निधन से आंकड़ा 101 पर आ गया. सपा के तीन बागी विधायक (विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य, राकेश कुमार पांडेय) भी हैं. इसके अलावा गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी पिछले राज्यसभा चुनाव में वोट डालने नहीं आई थीं. इस तरह सपा के पास शुद्ध रूप से 98 विधायक बचते हैं.
सपा कैसे जीतेगी तीसरी राज्यसभा सीट?
गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी देवी और पल्लवी पटेल का वोट अगर सपा के साथ रहता है तो यह आंकड़ा 98 बना रहेगा. इसमें कांग्रेस के 2 विधायकों को जोड़ लेते हैं तो संख्या बढ़कर 100 हो जाती है. एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 38 विधायकों का वोट चाहिए होगा. इस लिहाज से सपा दो सीटें 76 विधायकों के आधार पर आसानी से जीत लेगी, जिसके बाद सपा के पास 24 अतिरिक्त वोट बचेंगे. तीसरी सीट जीतने के लिए उसे 14 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
सपा ने धनराज परिमल नथवानी को उतारकर बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है. सपा की नजर अपने बागी विधायकों को साधे रखने के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दलों के विधायकों से क्रॉस वोटिंग कराने पर है. सुभासपा के 6 में से 4 विधायक सपा बैकग्राउंड के हैं, जिनमें से तीन विधायक अपनी गाड़ी में सपा का झंडा लगाकर घूम रहे हैं. सपा अगर सुभासपा के तीन विधायकों को अपने साथ जोड़ लेती है तो यह संख्या बढ़कर 27 पर पहुंच जाएगी.
सपा की नजर आरएलडी के विधायकों पर भी होगी, जिनमें से तीन विधायक सपा बैकग्राउंड के हैं (दो मुस्लिम और एक गुर्जर समाज से). सपा की कोशिश है कि अगर वह इन दोनों मुस्लिम विधायकों को अपने साथ जोड़ लेती है तो यह आंकड़ा 29 विधायकों पर पहुंच जाएगा. इसके बाद भी सपा को तीसरी सीट के लिए 9 अतिरिक्त विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी.
बीजेपी के लिए आठवीं सीट कितनी मुश्किल?
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने 8 नामांकन पत्र खरीदे हैं, जिससे एक बात साफ है कि 2024 की तरह ही वह फिर से 8वें प्रत्याशी को उतारने का प्लान बना रही है. बीजेपी के पास फिलहाल अपने 254 विधायक हैं. बीजेपी के सहयोगी दलों में अपना दल (एस) के 13, सुभासपा के 6, निषाद पार्टी के 5 और आरएलडी के 9 विधायक हैं. इन सभी को मिलाने पर आंकड़ा 287 विधायकों का होता है.
एनडीए के 287 विधायकों में से सुभासपा के तीन विधायकों को हटा दें, तो एनडीए के पास 284 विधायक बचते हैं. सात राज्यसभा सीटों को जीतने के लिए 266 विधायक चाहिए होंगे. इस लिहाज से बीजेपी के पास 18 विधायक अतिरिक्त बचते हैं, जिनमें सपा से निष्कासित 4 विधायकों को जोड़ने पर यह आंकड़ा 22 पर पहुंच जाता है. बीजेपी को 8वीं सीट के लिए 16 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी.
यदि बीजेपी अपने 8वें उम्मीदवार के लिए सपा के तीन बागी विधायकों का समर्थन फिर से जुटा लेती है, तब भी एनडीए का आंकड़ा 25 तक ही पहुंचेगा. इसके बाद भी उसे 13 अतिरिक्त वोट चाहिए होंगे. अगर राजा भैया की पार्टी के दो विधायकों का समर्थन मिल भी जाता है, तब भी 11 वोटों की कमी रहेगी. राजा भैया ने यह साफ नहीं किया है कि वह किसे वोट देंगे. ऐसे में बीजेपी के लिए सपा से भी ज्यादा अतिरिक्त वोटों का जुगाड़ करना होगा, जो धनराज नथवानी के मैदान में उतरने के बाद बिल्कुल आसान नहीं दिख रहा है.