मुंबई में शादी हुई. एक बेटी भी हुई. फिर पति से अनबन हुई तो महिला मुंबई छोड़कर मायके संभाजीनगर आ गई. यहां एक नया रिश्ता बना. करीब तीन साल लिव-इन में रहने के बाद बेटा हुआ. कहानी यहां तक बिल्कुल सामान्य लगती है. लेकिन आरोप है कि बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद उसका 1.20 लाख रुपये में सौदा कर दिया गया. इसके बाद मासूम के हाथ बदलते गए और उसकी कीमत भी बढ़ती गई. पुलिस ने आखिरकार उसे हैदराबाद से बरामद किया.
ये कहानी महाराष्ट्र की रहने वाली एक महिला की है... महिला की शादी कुछ साल पहले मुंबई में हुई थी. शादी के बाद एक बेटी भी हुई. लेकिन पति-पत्नी के बीच सबकुछ ठीक नहीं चला. विवाद बढ़ा तो महिला अपने पति और बेटी को मुंबई में ही छोड़कर अपने मायके छत्रपति संभाजीनगर आ गई.
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यहीं महिला की जिंदगी में योगेश कांबरे नाम का व्यक्ति आया. दोनों पिछले करीब तीन साल से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे. करीब तीन महीने पहले इसी रिश्ते से एक बेटे का जन्म हुआ. बच्चा संभाजीनगर के सरकारी अस्पताल में पैदा हुआ था. घर में नया मेहमान आया था. लेकिन कुछ ही वक्त बाद इस कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी शायद किसी ने कल्पना नहीं की होगी.
पुलिस के मुताबिक, बच्चे के जैविक माता-पिता ने उसे कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये में सीमा नाम की महिला को दे दिया. परिवार की तरफ से बच्चे को पालने में आर्थिक परेशानी की बात कही गई. इस सिलसिले में एक बॉन्ड दिए जाने की बात भी सामने आई, जिसमें बच्चे की देखभाल करने में असमर्थता का जिक्र था. लेकिन पुलिस को जांच में सिर्फ किसी बच्चे को दूसरे परिवार को सौंपे जाने की कहानी नहीं मिली.

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रकम का लेन-देन भी सामने आया. उस रकम के इस्तेमाल ने इस मामले को और चौंकाने वाला बना दिया. पुलिस के मुताबिक, कथित तौर पर मिले पैसों से करीब 62 हजार रुपये के सोने के गहने और दो ब्रांडेड स्मार्टफोन खरीदे गए. यानी जिस बच्चे के लिए पैसे मिले, उन्हीं पैसों से मोबाइल और गहने खरीदने का आरोप है.
जांच आगे बढ़ी तो बच्चे के सफर की अगली कड़ी सामने आई. जिस सीमा को बच्चा कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये में दिया गया था, उसने उसे आगे संगीता आव्हाड को 2.70 लाख रुपये में बेचने की बात जांच में सामने आई. अब बच्चा अपने जैविक माता-पिता के पास नहीं था. वह एक हाथ से दूसरे हाथ में जा चुका था. और उसकी कीमत भी बढ़ चुकी थी. जांच में खुद को डॉक्टर बताने वाले सुरेश गुंटुका का नाम भी सामने आया.
पुलिस के मुताबिक, नांदेड़ में बच्चे की अदला-बदली हुई थी. संभाजीनगर से निकला बच्चा अब नांदेड़ पहुंच चुका था. और इसके बाद उसका सफर महाराष्ट्र की सीमा से बाहर चला गया. पुलिस के मुताबिक, महज करीब 48 घंटे के भीतर बच्चा संभाजीनगर से नांदेड़ होते हुए तेलंगाना पहुंच गया.
सोचिए, एक महीने का मासूम. न अपनी बात कह सकता था, न बता सकता था कि उसे कहां ले जाया जा रहा है. बस लोग बदलते गए. जगह बदलती गई. और कथित तौर पर कीमत भी बढ़ती गई. जांच में सामने आया कि आखिर में बच्चे को हैदराबाद की उमा खटकम को 3.50 लाख रुपये में बेचा गया. यानी जो बच्चा कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये में पहली बार सौदे का हिस्सा बना, उसकी कीमत आगे 2.70 लाख और फिर 3.50 लाख रुपये तक पहुंच गई.

मासूम को बरामद कर संस्था के सुपुर्द किया
मुकुंदवाड़ी पुलिस ने 24 सितंबर को इस मामले में केस दर्ज किया था. जांच शुरू हुई तो पुलिस ने हर एंगल से तफ्तीश शुरू की. कौन उसे लेकर गया? किसके पास रहा? पैसों का लेन-देन किसके बीच हुआ? और आखिर वह हैदराबाद कैसे पहुंचा?जांच में एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती गईं.
पुलिस को बच्चे के हैदराबाद में होने की जानकारी मिली. इसके बाद उसे वहां से सुरक्षित बरामद कर लिया गया और महाराष्ट्र वापस लाया गया. मासूम को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया. समिति के आदेश के बाद फिलहाल उसे एक संस्था के सुपुर्द कर दिया गया है.
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इस मामले में पुलिस ने बच्चे की जैविक मां समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था और इस कथित सौदे में पैसों का पूरा लेन-देन कैसे हुआ.
बच्चा सिर्फ एक महीने का था. उसे अभी दुनिया देखनी शुरू भी नहीं हुई थी. लेकिन वह कथित तौर पर पैसों के ऐसे खेल में पहुंच गया, जहां हर अगले पड़ाव पर उसका सौदा हुआ. पहले 1.20 लाख. फिर 2.70 लाख. और आखिर में 3.50 लाख रुपये. और फिर बच्चा कथित खरीद-फरोख्त की कड़ी में चला गया. आज बच्चा सुरक्षित है.
इस पूरी कहानी में कई सवाल अब भी बाकी हैं. क्या आर्थिक परेशानी सच में बच्चे को सौंपने की वजह थी? बच्चे के बदले रकम का लेन-देन कैसे हुआ? 48 घंटे में वह इतने लोगों के हाथों तक कैसे पहुंचा? और इस नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल हैं? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच से सामने आएंगे.