उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है. 2027 के विधानसभा चुनाव और राज्यसभा की चुनावी जंग के बीच एमएलसी चुनाव की रणनीति ने सूबे का सियासी पारा बढ़ा दिया है. इसके साथ ही बीजेपी और सपा के बीच जमीनी मुकाबले के लिए योद्धा तय हो गए हैं.
यूपी में शिक्षक और स्नातक कोटे की एमएलसी सीटों के लिए बीजेपी ने मंगलवार को छह उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया. इससे पहले सोमवार को ही सपा ने अपने प्रत्याशियों की सूची जारी की थी.
एमएलसी चुनाव में बीजेपी ने जहां अपने पारंपरिक और मजबूत सामाजिक आधार यानी 'सवर्ण' उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है, वहीं सपा ने अपने विनिंग फॉर्मूले 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को केंद्र में रखकर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. ऐसे में देखना होगा कि एमएलसी की सियासी बाजी कौन मारता है.
एमएलसी चुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी
यूपी में कुल 11 विधान परिषद सीटों पर चुनाव होना है. भाजपा पांच नाम पहले ही घोषित कर चुकी थी और छह उम्मीदवारों के नामों का ऐलान मंगलवार को किया. बीजेपी ने वाराणसी स्नातक सीट से केदारनाथ सिंह, मेरठ स्नातक सीट से दिनेश गोयल और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट से अशोक कुमार राठौर पर दांव लगाया है. इसी तरह वाराणसी शिक्षक सीट पर प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट पर इंजीनियर हरिकिशोर त्रिपाठी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर ध्रुव त्रिपाठी को प्रत्याशी बनाया गया है.
बीजेपी पांच एमएलसी सीटों के लिए पहले ही प्रत्याशियों के नामों का ऐलान कर चुकी थी, जिनमें पुराने चेहरे और वर्तमान एमएलसी शामिल हैं. लखनऊ स्नातक सीट पर अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक सीट पर डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लखनऊ शिक्षक सीट पर उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा को प्रत्याशी बनाया गया है.
एमएलसी चुनाव में सपा के उम्मीदवार
यूपी एमएलसी चुनाव के लिए सपा ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया था. मिर्जापुर-वाराणसी शिक्षक खंड से वर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव, लखनऊ खंड शिक्षक क्षेत्र से सुशील कुमार, आगरा खंड शिक्षक क्षेत्र से प्रकाशचंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली शिक्षक क्षेत्र से दानिश अख्तर और मेरठ खंड शिक्षक क्षेत्र से नितिन तोमर को प्रत्याशी बनाया गया है.
वहीं वाराणसी खंड स्नातक क्षेत्र से वर्तमान एमएलसी आशुतोष सिन्हा, झांसी स्नातक क्षेत्र से डॉ. मान सिंह यादव, आगरा खंड स्नातक क्षेत्र से शशांक यादव, मेरठ स्नातक क्षेत्र से परमिंदर भाटी और लखनऊ स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह को उम्मीदवार घोषित किया गया है.
बीजेपी ने सवर्णों पर जताया भरोसा
एमएलसी चुनाव के उम्मीदवारों के चयन में बीजेपी का मुख्य फोकस अपने कोर वोट बैंक को साधे रखने और सामाजिक संतुलन बनाने पर दिख रहा है. बीजेपी ने अपने सवर्ण समाज, खासकर ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ग को साधने का दांव चला है. बीजेपी ने एमएलसी चुनाव में पांच ब्राह्मण, तीन ठाकुर, एक कुर्मी, एक वैश्य और एक पंजाबी समुदाय के प्रत्याशी पर भरोसा जताया है.
बीजेपी का पारंपरिक आधार शुरू से ही सवर्ण जातियों के बीच माना जाता रहा है. एमएलसी चुनाव के जरिए पार्टी इस वर्ग को उचित प्रतिनिधित्व देकर यह संदेश देने की कोशिश में है कि उनके हितों की उपेक्षा नहीं हो रही है. पार्टी ने अपने भरोसेमंद चेहरों पर ही दांव लगाया है ताकि जीत का परचम फहरा सके. बीजेपी ने एक ओबीसी के अलावा किसी अन्य पिछड़े वर्ग को तरजीह नहीं दी है.
एमएलसी चुनाव में सपा का 'पीडीए' दांव
सपा के 11 एमएलसी उम्मीदवारों का जातीय आधार देखें तो अखिलेश यादव अपने विनिंग फॉर्मूले 'पीडीए' के इर्द-गिर्द सियासी बिसात बिछाते नजर आ रहे हैं. सपा ने 11 प्रत्याशियों में 4 यादव, दो कुर्मी, एक गुर्जर, एक मुस्लिम, एक कायस्थ, एक वैश्य और एक क्षत्रिय समुदाय से प्रत्याशी उतारे हैं.
सपा ने अपने कोर वोटबैंक यादव समुदाय पर खास तवज्जो दी है. इसके अलावा कुर्मी समुदाय से दो प्रत्याशी देकर समीकरण बनाने का दांव चला है. अखिलेश यादव एमएलसी चुनाव को भी अपने 'पीडीए' फॉर्मूले को आगे बढ़ाने के बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं. सपा की सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से 7 और सवर्ण जाति से 2 प्रत्याशी शामिल हैं.
सपा एमएलसी चुनाव के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसका गठबंधन केवल कुछ सीमित जातियों का नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व कर रहा है. हालांकि, किसी दलित को प्रत्याशी नहीं बनाया गया है, जिससे 'पीडीए' के समीकरण पर सवालिया निशान जरूर खड़ा हो रहा है.
2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है
एमएलसी का यह चुनाव केवल कुछ सदस्यों को विधान परिषद भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दोनों बड़े दल सूबे की जनता को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहते हैं, क्योंकि इसे 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. बीजेपी अपने सवर्ण वोट बैंक को एकजुट रखते हुए ब्राह्मण समाज की नाराजगी को दूर करने का दांव चल रही है.
वहीं सपा पूरी तरह से 'पीडीए' के इर्द-गिर्द अपनी राजनीति को केंद्रित कर गैर-बीजेपी वोटों का ध्रुवीकरण करने की फिराक में है. दोनों दलों के इस आमने-सामने के दांव ने यूपी की विधान परिषद राजनीति को बेहद दिलचस्प बना दिया है. दोनों ही पार्टियों द्वारा उम्मीदवारों के आधिकारिक नामों के ऐलान के साथ अब यह सियासी जंग और तेज होने के आसार हैं.