मेरठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे जीवंत और महत्वपूर्ण शहरों में से एक है. यह मेरठ जिले और मेरठ डिवीजन, दोनों का प्रशासनिक मुख्यालय है. यह एक बड़ा कमर्शियल और एजुकेशनल हब है और खेल के सामान के फलते-फूलते उद्योग और म्यूकजिल इंस्ट्रूमेंट बनाने के काम के लिए 'भारत की स्पोर्ट्स सिटी' के तौर पर मशहूर है.
मेरठ का इतिहास बहुत पुराना और कई परतों वाला है, जो प्राचीन काल से जुड़ा है. इसका जिक्र महाभारत काल में मिलता है और यह हस्तिनापुर के मशहूर शहर से गहराई से जुड़ा हुआ है. सदियों के दौरान, मुगल और ब्रिटिश शासन में यह एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. इसने आधुनिक भारतीय इतिहास में ब्रिटिश शासन के खिलाफ 1857 के विद्रोह की पहली घटनाओं में से एक के तौर पर अहम जगह बनाई. हाल के दशकों में, शहर ने कई सांप्रदायिक दंगे भी देखे हैं, जिनमें 1982 के सांप्रदायिक दंगे, 1984 के सिख-विरोधी दंगे और 1987 का हाशिमपुरा नरसंहार शामिल है, जिसमें पुलिस फायरिंग में अल्पसंख्यक समुदाय के 42 लोग मारे गए थे.
1951 में बना मेरठ, एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और मेरठ लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह पूरी तरह से शहरी निर्वाचन क्षेत्र है जिसमें मेरठ शहर का एक बड़ा हिस्सा शामिल है.
1952 में पहली बार वोटिंग के बाद से मेरठ ने 17 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. 1993 के चुनावों से पहले फिर से शुरू होने से पहले, 1991 में यह निर्वाचन क्षेत्र कुछ समय के लिए खत्म हो गया था.
कांग्रेस पार्टी ने शुरुआती दशकों में यह सीट छह बार जीती, जिसमें उसकी आखिरी जीत 1985 में हुई थी. इसके बाद बीजेपी सात जीत के साथ एक बड़ी ताकत बनकर उभरी, जिसमें उसके पुराने रूप, भारतीय जनसंघ की तीन जीतें भी शामिल हैं. समाजवादी पार्टी ने दो बार जीत हासिल की है, जबकि जनता दल और यूपी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2012 में, बीजेपी के डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने समाजवादी पार्टी के रफीक अंसारी को 6,278 वोटों से हराकर अपना चौथा कार्यकाल जीता. रफीक अंसारी ने 2017 में बाजी पलट दी और वाजपेयी को 28,769 वोटों से हराकर इस निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को पहली जीत दिलाई. अंसारी ने 2022 में BJP के कमल दत्त शर्मा को 26,065 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. उन्हें 106,395 वोट मिले, जबकि उनके BJP प्रतिद्वंद्वी को 80,330 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान मेरठ विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के रुझानों में अक्सर बदलाव देखा गया है. 2009 में, समाजवादी पार्टी BJP से 2,118 वोटों के मामूली अंतर से आगे थी. 2014 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 29,453 वोटों की स्पष्ट बढ़त हासिल की. 2019 में BSP, BJP से 30,396 वोटों से आगे रही. 2024 में समाजवादी पार्टी एक बार फिर सबसे आगे रही और BJP से 37,915 वोटों की बढ़त बनाई. इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की सुनीता वर्मा को 113,289 वोट मिले, जबकि BJP के अरुण गोविल को 75,374 वोट मिले.
मेरठ विधानसभा क्षेत्र में रजिस्टर्ड वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 में यह संख्या 278,845 थी, जो 2017 में बढ़कर 302,214 और 2019 में 305,513 हो गई. 2022 में यह संख्या और बढ़कर 312,368 हो गई और 2024 के लोकसभा चुनावों में 314,957 हो गई.
वोटिंग प्रतिशत औसत रहा है. यह 2012 में 64.26 प्रतिशत, 2017 में 64.70 प्रतिशत, 2019 में 64.09 प्रतिशत, 2022 में 64.56 प्रतिशत था और 2024 में घटकर 61.29 प्रतिशत हो गया.
मेरठ हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां मुस्लिम आबादी भी काफी है. 2011 की जनगणना के आधार पर अनुमान है कि यहां के लगभग एक-तिहाई वोटर मुस्लिम हैं. अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी कुल वोटरों में 7.26 प्रतिशत है. यह पूरी तरह से शहरी सीट है और इसकी वोटर लिस्ट में कोई भी ग्रामीण वोटर शामिल नहीं है.
मेरठ का इतिहास बहुत समृद्ध और कई दौर वाला रहा है. इसका जिक्र महाभारत काल में मिलता है और यह हस्तिनापुर जैसे मशहूर शहर से गहराई से जुड़ा हुआ है. यह इलाका मौर्यों, गुप्तों और बाद में कई राजपूत वंशों के शासन के अधीन रहा. मध्यकाल में यहां मुगल प्रभाव रहा और यह एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. 19वीं सदी में, ब्रिटिश शासन के दौरान इसे काफी अहमियत मिली.
मेरठ नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) का हिस्सा है और दिल्ली व गाजियाबाद के बाद दिल्ली-NCR का तीसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है. यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में बसा है. शहर में सड़क संपर्क अच्छा है और इसे दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल (RRTS) और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से काफी फायदा हुआ है. इन दोनों ने इसे दिल्ली के तेजी से बढ़ते सैटेलाइट शहर में बदल दिया है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मेरठ सिटी में है. गाजियाबाद और नोएडा यहां से लगभग 70-80 किमी, हापुड़ लगभग 60 किमी और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लगभग 70-80 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 450 किमी दूर है.
मेरठ की स्थानीय अर्थव्यवस्था काफी विविध है. यह अपने खेल के सामान के उद्योग के लिए मशहूर है, जिसके कारण इसे 'भारत की स्पोर्ट्स सिटी' का दर्जा मिला है. अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संगीत वाद्ययंत्र, कैंची, चीनी, इलेक्ट्रॉनिक सामान और व्यापार शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद के बाद मेरठ की GDP तीसरी सबसे ज्यादा है. वोटरों के मुख्य मुद्दों में बेहतर नागरिक सुविधाएं, ट्रैफिक मैनेजमेंट, रोजगार के अवसर, औद्योगिक विकास, कानून-व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण शामिल हैं.
विधानसभा चुनावों में लगातार जीत और 2024 के संसदीय चुनावों में मिली बड़ी बढ़त के आधार पर, ऐसा लगता है कि समाजवादी पार्टी 2027 के चुनावों में मेरठ विधानसभा सीट जीतने की दौड़ में BJP से आगे है. हालांकि, BJP की संभावनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता. उसकी उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि वह किसी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारे जिसकी लोगों के बीच अच्छी पकड़ हो और वह उन वोटरों को भी बाहर निकलने के लिए मना सके जो आमतौर पर वोट नहीं डालते. पार्टी को उम्मीद है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ने से उसे फायदा हो सकता है. साथ ही, BJP यह भी उम्मीद करेगी कि समाजवादी पार्टी का मुस्लिम वोट बैंक बंट जाए, जिससे उसकी जीत का रास्ता साफ हो सके.
(अजय झा)
Kamal Dutt Sharma
BJP
Ranjan Sharma
INC
Dilshad
BSP
Imran Ahmad
AIMIM
Nota
NOTA
Kapil Kumar Sharma
AAAP
Ashok
IND
Ali Sher
ASPKR
Ankit Sharma
IND
Sushil Verma
LJPRV
Afzal
SACP
Kanak Jain
MIHISE
उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन में बदलाव किया है. अनुसूचित जाति मोर्चा के नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई है. किसे मिली नई जिम्मेदारी, पूरी लिस्ट खबर में देखें.
उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है और इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) भी एक बड़ा फैक्टर बनकर उभर रही है. ओवैसी काफी समय से विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन में शामिल होने का प्रयास कर रहे थे. लेकिन वहां से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने के बाद अब उन्होंने गठबंधन को 2 अक्टूबर तक का अंतिम समय दिया है.
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अभी से कमर कस ली है. पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के नेतृत्व ने हाल ही में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और सहारनपुर जिलों का दो दिवसीय दौरा किया. इस दौरे के दौरान बीजेपी नेता नितिन नवीन ने सांगठनिक मजबूती और चुनावी रणनीति को लेकर गहन मंथन किया.
यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच पुराने कार्यकर्ताओं ने नितिन नबीन के सामने चुनौतियों की शिकायत की है. पश्चिमी यूपी के मेरठ और सहारनपुर में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर बाहरी चेहरों को ज्यादा तवज्जो देने और मूल कैडर की उपेक्षा करने के आरोप लगाए. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से मतभेद भूलकर चुनाव की तैयारियों में जुटने की अपील की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मेरठ और सहारनपुर में बीजेपी की बैठकों में पुराने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी खुलकर सामने आई। आखिर "बाहरी बनाम मूल कैडर" का मुद्दा क्यों उठा और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने क्या संदेश दिया? पूरी रिपोर्ट।
बीजेपी के अध्यक्ष नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं. उनके इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अपने इस दौरे के दौरान नितिन नवीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सांसदों, विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे. इस बैठक में वे चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और कार्यकर्ताओं को जीत के लिए जरूरी दिशा-निर्देश देंगे.
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम यूपी पहुंच रहे हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ और पंकज चौधरी के साथ मिलकर वे मेरठ और सहारनपुर मंडल की 71 विधानसभा सीटों की सियासी नब्ज टटोलेंगे और Gen-Z संग संवाद कर 'मिशन-2027' का आगाज करेंगे.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों को तेज करते हुए बीजेपी नेता नितिन नवीन का दो दिवसीय महत्वपूर्ण यूपी दौरा आज से शुरू हो रहा है. इस दौरे की शुरुआत मेरठ से होगी, जहां वे युवा सम्मेलन को संबोधित करेंगे. इसके अलावा वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शक्ति केंद्रों की अहम बैठक में भी हिस्सा लेंगे. नितिन नवीन अपने इस प्रवास के दौरान पार्टी के पूर्व पदाधिकारियों, वर्तमान सांसदों, विधायकों और सक्रिय कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीतियों पर मंथन करेंगे.
UP Election 2027: 2027 की जंग शुरू, BJP की टॉप टीम यूपी में उतरी..यूपी चुनाव में अभी कई महीने बाकी हैं...लेकिन बीजेपी ने 2027 की जंग का बिगुल अभी से बजा दिया है. इस बार सिर्फ रैलियां नहीं...दिल्ली से पार्टी की सबसे ताकतवर टीम यूपी में उतर रही है. मिशन साफ है...जो सीटें हार गए थे, उन्हें हर हाल में वापस जीतना है. बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े के दौरे के बाद अब दो और बड़े चेहरे यूपी पहुंच रहे हैं.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर AIMIM ने तैयारियां तेज कर दी हैं. पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 20 सितंबर से प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा शुरू करेंगे. मेरठ में राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने बताया कि ओवैसी कानपुर, श्रावस्ती और आजमगढ़ समेत कई जगह जनसंपर्क करेंगे.