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Azamgarh District Profile: क्यों खास है आजमगढ़? साहित्य, संस्कृति और सियासत से बनी अलग पहचान

पूर्वांचल की राजनीति में आजमगढ़ की अपनी अलग पहचान है. समाजवादी पार्टी का मजबूत प्रभाव, जातीय और सामाजिक समीकरण, बुनकरों की आजीविका और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे यहां की राजनीति को प्रभावित करते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी 10 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी. यही वजह है कि जिले की चुनावी तस्वीर समझने के लिए इसके सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर नजर डालना जरूरी है.

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आजमगढ़ जिले में दस विधानसभा सीट आती हैं (Photo: AI generated)
आजमगढ़ जिले में दस विधानसभा सीट आती हैं (Photo: AI generated)

आजमगढ़ को पूर्वांचल की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां चुनाव केवल उम्मीदवारों की लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पार्टियों का संगठन, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं के बीच उनकी पकड़ भी नतीजों को प्रभावित करती है. समाजवादी पार्टी लंबे समय से इस जिले में मजबूत रही है. बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस का भी यहां राजनीतिक इतिहास रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करती रही है. आजमगढ़ की खास बात यह है कि यहां की पहचान राजनीति के साथ-साथ साहित्य, शिक्षा, धार्मिक स्थलों और पारंपरिक कारोबार से भी जुड़ी है. 

नवाब आजमशाह के नाम पर पड़ा आजमगढ़

आजमगढ़ उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित है. तमसा नदी के किनारे बसा यह जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रचलित इतिहास के अनुसार, नवाब आजमशाह ने 1665 में इस नगर की स्थापना की थी. उन्हीं के नाम पर इसका नाम आजमगढ़ पड़ा. आजादी के आंदोलन में भी इस क्षेत्र की भूमिका रही है. समय के साथ आजमगढ़ की पहचान शिक्षा, साहित्य और राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में बनी. जिले का नाम कई साहित्यकारों और सांस्कृतिक हस्तियों से भी जुड़ा है. राहुल सांकृत्यायन, कैफी आजमी, अल्लामा शिब्ली नोमानी, हरिऔध उपाध्याय और शबाना आजमी जैसे नाम इसकी पहचान का हिस्सा हैं. धार्मिक और पर्यटन स्थलों की बात करें तो भंवरनाथ मंदिर, दुर्वासा आश्रम, महाराजगंज और अवंतिकापुरी जैसे स्थानों का उल्लेख किया जाता है. जिले की यह सांस्कृतिक विविधता भी इसकी सामाजिक पहचान को खास बनाती है.

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10 विधानसभा सीटें, 2022 में सभी पर सपा की जीत

आजमगढ़ की राजनीति को समझने के लिए 2022 का विधानसभा चुनाव सबसे अहम पड़ाव है. उस चुनाव में जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी. यह नतीजा जिले में पार्टी की मजबूत स्थिति को दिखाता है. इन सीटों में आजमगढ़ सदर, सगड़ी, गोपालपुर, अतरौलिया, निजामाबाद, मुबारकपुर, मेहनगर, लालगंज, दीदारगंज और फूलपुर पवई शामिल हैं.

सपा के दुर्गा प्रसाद यादव ने आजमगढ़ सदर सीट पर जीत दर्ज की थी. सगड़ी से डॉ. एचएन सिंह पटेल, गोपालपुर से नफीस अहमद और अतरौलिया से संग्राम यादव ने जीत हासिल की. निजामाबाद सीट पर आलम, मुबारकपुर में अखिलेश यादव, मेहनगर में पूजा सरोज, लालगंज में बेचई सरोज, दीदारगंज में कमलाकांत राजभर और फूलपुर पवई में रमाकांत यादव विजयी रहे.


अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव से लेकर निहरूआ तक

विधानसभा चुनाव के साथ आजमगढ़ की लोकसभा सीट भी लंबे समय से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में रही है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव यहां से सांसद रह चुके हैं. उनके इस्तीफे के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ ने जीत हासिल की थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने निरहुआ को हराकर सीट पर फिर कब्जा किया. इस नतीजे ने एक बार फिर आजमगढ़ की राजनीति में सपा की स्थिति को चर्चा में ला दिया. 

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बुनकरों, किसानों का मुद्दा कितना अहम?

आजमगढ़ की अर्थव्यवस्था में खेती और पारंपरिक कारोबार की महत्वपूर्ण भूमिका है. गेहूं, धान और गन्ना यहां की प्रमुख फसलों में शामिल हैं. इसके अलावा मुबारकपुर और आसपास के इलाकों में हथकरघा, कपड़ा बुनाई और साड़ी का कारोबार भी लोगों की आजीविका से जुड़ा है. जिले की ब्लैक पॉटरी यानी काली मिट्टी के बर्तनों की कला भी पहचान रखती है. इस पारंपरिक कारोबार से जुड़े कारीगरों के लिए बाजार, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर महत्वपूर्ण मुद्दे हैं. दूसरी ओर, बड़े उद्योगों और स्थानीय स्तर पर पर्याप्त रोजगार के अवसरों की कमी की शिकायत भी समय-समय पर सामने आती रही है. रोजगार की तलाश में युवाओं का दूसरे शहरों और विदेशों की ओर जाना जिले की आर्थिक चुनौतियों में शामिल है.

सामाजिक समीकरण और स्थानीय नेताओं की भूमिका

आजमगढ़ में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग रहते हैं. जिले के कई इलाकों में खेती, व्यापार, बुनकरी और दूसरे व्यवसायों से जुड़े लोगों की बड़ी भूमिका है. दुर्गा प्रसाद यादव जिले की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में गिने जाते हैं. आजमगढ़ सदर सीट से उनकी लगातार 9 चुनावी जीत ने उन्हें सपा की राजनीति में खास पहचान दिलाई है. रमाकांत यादव भी जिले की चर्चित राजनीतिक हस्तियों में शामिल रहे हैं. वह अलग-अलग समय पर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे और सांसद तथा विधायक के रूप में अपनी पहचान बनाई. जिले की राजनीति में ऐसे नेताओं का प्रभाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है.

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