कझाक्कूट्टम तिरुवनंतपुरम शहर के उत्तरी छोर पर स्थित है और तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. समय के साथ यह केरल के सबसे महत्वपूर्ण शहरी इलाकों में बदल गया है. यहां स्थित टेक्नोपार्क, जो केरल का पहला आईटी हब है, जो इस क्षेत्र की पहचान का केंद्र है. टेक्नोपार्क की वजह से यहां बड़ी संख्या में लोग बाहर से आए, निवेश बढ़ा और लोगों की आकांक्षाएं बदलीं, जिससे इलाके का रूप और राजनीति दोनों बदल गए.
कझाक्कूट्टम की राजनीति केवल नारों या प्रतीकों पर नहीं चलती. यहां वोट इस बात पर पड़ता है कि सड़कें आईटी ऑफिसों की ट्रैफिक संभाल पा रही हैं या नहीं, पानी की व्यवस्था बढ़ती अपार्टमेंट आबादी के लिए पर्याप्त है या नहीं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोजाना आने-जाने वालों का बोझ उठा पा रहा है या नहीं, और सरकारी योजनाएं इतनी गतिशील और विविध आबादी तक पहुंच रही हैं या नहीं. यहां का मतदाता पढ़ा-लिखा, बहु-संस्कृतिक और प्रशासन की धीमी रफ्तार से जल्दी नाराज होने वाला है.
कझाक्कूट्टम की राजनीतिक पहचान पूरी तरह टेक्नोपार्क से जुड़ी है. जो इलाका कभी एक योजनाबद्ध तकनीकी परिसर था, वह अब बाहर की ओर फैल चुका है. इसके आसपास रिहायशी कॉलोनियां, व्यावसायिक इलाके, सर्विस इंडस्ट्री और अनौपचारिक बस्तियां बन गई हैं. आईटी प्रोफेशनल, सर्विस सेक्टर के कर्मचारी, दूसरे राज्यों से आए मजदूर, पुराने स्थानीय कामकाजी परिवार और तटीय समुदाय, सब अब एक ही राजनीतिक दायरे में रहते हैं.
इस बदलाव ने कझाक्कूट्टम को केरल के सबसे तेजी से शहरीकरण वाले विधानसभा क्षेत्रों में शामिल कर दिया है. जमीन के उपयोग में तेजी से बदलाव हुआ है, लेकिन बुनियादी ढांचा उतनी तेजी से विकसित नहीं हो पाया. रोजमर्रा का प्रशासन लगातार दबाव में रहता है. बड़ी संख्या में गैर-केरल निवासी मतदाताओं की मौजूदगी, खासकर प्रवासी मजदूरों और सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों की, चुनावी व्यवहार को और जटिल बना देती है.
कझाक्कूट्टम में नागरिक समस्याएं लगातार बनी रहती हैं. ट्रैफिक जाम, सड़कों की मजबूती, पानी की सप्लाई, कचरा प्रबंधन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट, ये सब रोजमर्रा की चर्चा का हिस्सा हैं. यहां शासन की साख इस बात से बनती है कि समस्या पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दी गई. किसी जाम वाले चौराहे को ठीक करना या बस सेवा में सुधार करना बड़े विकास भाषणों से ज्यादा मायने रखता है. जनप्रतिनिधियों से उम्मीद की जाती है कि वे प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और नगर निकायों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखें.
कझाक्कूट्टम का मतदाता वर्ग सामाजिक रूप से बेहद विविध है. यहां हिंदू बहुसंख्या में हैं, लेकिन ईसाई और मुस्लिम समुदाय भी अलग-अलग वार्डों में फैले हुए हैं. अब जाति या धर्म से ज्यादा महत्व पेशा, वर्ग और लोगों की आवाजाही को मिलने लगा है.
यहां बड़ी संख्या में गैर-केरल निवासी वोटर हैं, जो आईटी, निर्माण, रिटेल और सर्विस सेक्टर में काम करते हैं. भले ही सभी राजनीतिक रूप से सक्रिय न हों, लेकिन उनकी मौजूदगी ने चुनावी मुद्दों, प्राथमिकताओं और राजनीति की भाषा को बदल दिया है. अब आवास, परिवहन, सुरक्षा और नगर सेवाएं उतनी ही अहम हैं जितनी कल्याणकारी योजनाएं.
कझाक्कूट्टम की राजनीतिक संस्कृति में नेताओं से सक्रियता और दक्षता की उम्मीद की जाती है. उनसे अपेक्षा होती है कि वे ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ अपार्टमेंट एसोसिएशनों से भी जुड़ें, प्रवासी मजदूर बस्तियों और पारंपरिक मोहल्ला समितियों, दोनों से संवाद बनाए रखें.
इतिहास में कझाक्कूट्टम वामपंथ का गढ़ रहा है. CPI(M) की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और श्रमिक नेटवर्क ने इसे सहारा दिया है. यह आधार अब भी पुराने रिहायशी वार्डों और कामकाजी इलाकों में कायम है.
इसके साथ ही भाजपा ने कझाक्कूट्टम को उभरते हुए मजबूत क्षेत्र के रूप में देखना शुरू किया है. पार्टी की रणनीति यहां की बहुसांस्कृतिक आबादी, मध्यम वर्गीय पेशेवरों, प्रवासी मतदाताओं और शहरी प्रशासन की समस्याओं पर आधारित है. लगातार चुनावों में भाजपा ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए विपक्ष की मुख्य चुनौती बनने की कोशिश की है.
कांग्रेस, जो कभी मुख्य विपक्ष हुआ करती थी, अब एक अनुशासित वामपंथ और आक्रामक भाजपा के बीच फंस गई है. नतीजतन मुकाबला संरचनात्मक रूप से तीन-कोणीय बन गया है.
2021 के विधानसभा चुनाव ने इस बदलते राजनीतिक परिदृश्य को साफ दिखाया. CPI(M) के उम्मीदवार कडकमपल्ली सुरेन्द्रन ने 63,690 वोट हासिल किए, जो कुल मतों का 46.04 प्रतिशत था. उन्होंने भाजपा की शोभा सुरेन्द्रन को 23,497 वोटों के अंतर से हराया, जिन्हें 40,193 वोट यानी 29.06 प्रतिशत मिलेय.
कांग्रेस उम्मीदवार डॉ. एस. एस. लाल तीसरे स्थान पर रहे. उन्हें 32,995 वोट मिले, जो 23.86 प्रतिशत थे. मतदान प्रतिशत लगभग 71 रहा, जो यह दर्शाता है कि शहरी मुद्दों पर यहां के मतदाता लगातार सक्रिय रहते हैं. इस नतीजे ने यह साबित किया कि तेज शहरी बदलाव के बावजूद वामपंथ अपनी जमीन बनाए रखने में सफल रहा. साथ ही यह भी साफ हुआ कि भाजपा अब मुख्य चुनौती बनकर उभरी है, भले ही वह अभी संख्या में आगे न हो.
टेक्नोपार्क के आसपास के वार्ड और घनी अपार्टमेंट कॉलोनियां ट्रैफिक, परिवहन और नागरिक सेवाओं को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. पुराने रिहायशी इलाकों में जल निकासी, सफाई और पानी की विश्वसनीयता अहम मुद्दे हैं. व्यावसायिक क्षेत्रों में नियमों की स्पष्टता और सेवाओं की गुणवत्ता प्राथमिकता बनती है. यहां जीत-हार बड़े राजनीतिक झटकों से नहीं, बल्कि मतदान प्रतिशत और माइक्रो-लेवल पर की गई मेहनत से तय होती है.
शहरी बुनियादी ढांचा यहां राजनीतिक मूल्यांकन का केंद्र है. सड़कें, पानी, कचरा प्रबंधन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सुरक्षा रोजमर्रा के अनुभव को प्रभावित करते हैं. कल्याणकारी योजनाएं अब भी अहम हैं, लेकिन उन्हें कुशल शहरी प्रबंधन से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है.
कझाक्कूट्टम में चुनाव आम तौर पर शहरी प्रशासन की क्षमता, विविध मतदाता समूहों तक संगठन की पहुंच और नेताओं की उपलब्धता पर केंद्रित रहते हैं. कझाक्कूट्टम उन नेताओं को चुनता है जो जटिलताओं को संभाल सकते हैं. दूरी बनाए रखने वाले नेताओं को जल्दी नकार दिया जाता है.
(ए के शाजी)
Sobha Surendran
BJP
Dr. S. S. Lal
INC
Nota
NOTA
Kochumani
BSP
V. Sasikumaran Nair
IND
Lalumon
IND
Syamlal
IND
Adv. Sen A. G.
IND
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