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Eravipuram Vidhan Sabha Results Live: केरल के एराविपुरम विधानसभा क्षेत्र में RSP का दबदबा, CPM को हराया
Kerala Election Result 2026 Live: एराविपुरम विधानसभा सीट पर RSP ने दोबारा चखा जीत का स्वाद
Eravipuram Vidhan Sabha Result 2026 Live: एराविपुरम सीट पर विशाल जीत की ओर RSP! जानिए कितना पीछे CPM?
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केरल के कोल्लम जिले के दक्षिणी किनारे पर स्थित एराविपुरम विधानसभा क्षेत्र (सीट नंबर 125) कोल्लम लोकसभा सीट का हिस्सा है. यह इलाका समुद्री तट, पोर्ट से जुड़ी मजदूर बस्तियों, घने रिहायशी वार्डों और तेजी से फैलते शहरी किनारों का मिश्रण है. इसलिए यहां राजनीति किसी दूर की बहस जैसी नहीं लगती, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में लगातार चलने वाली स्थानीय बातचीत जैसी महसूस होती है. एराविपुरम के मतदाता कामकाज, सुविधाओं और जवाबदेही के आधार पर नेताओं को आंकते हैं.
एराविपुरम के वोटर को अक्सर “कठिन” मतदाता माना जाता है. यहां लोग बड़े-बड़े वादों से जल्दी प्रभावित नहीं होते. वे नेता से निरंतर मौजूदगी, संगठन की ताकत और छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान चाहते हैं. यहां चुनावी समर्थन पूरी तरह स्थायी नहीं होता, लेकिन अचानक भावनाओं के आधार पर भी नहीं बदलता. निर्णय आम तौर पर मोहल्ले की स्मृति, स्थानीय प्रतिष्ठा और काम की निरंतरता से बनता है.
इस सीट की राजनीतिक पहचान इसकी भौगोलिक बनावट से निकलती है. तटीय इलाकों के साथ-साथ यहां इनलैंड रिहायशी कॉलोनियां, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, छोटे औद्योगिक पॉकेट और व्यापारिक बाजार भी हैं. सामाजिक संरचना में डॉक और पोर्ट से जुड़े श्रमिक, परिवहन क्षेत्र के कर्मचारी, असंगठित क्षेत्र के परिवार, छोटे व्यापारी और सेवा क्षेत्र का मध्यमवर्ग शामिल है.
यह मिश्रण एक ऐसा मतदाता बनाता है जो राजनीतिक रूप से सतर्क है और संगठनात्मक रूप से जड़ें जमाए हुए है. यूनियनें, रेजिडेंट असोसिएशन और मोहल्ला समितियां शिकायतों को तेजी से आगे बढ़ाती हैं, और प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर कड़ी निगरानी रखती हैं.
एराविपुरम में चुनाव का सबसे बड़ा आधार नागरिक सुविधाएं हैं. संकरी सड़कें, भारी ट्रैफिक, बरसात में जलभराव, कमजोर ड्रेनेज, कचरा प्रबंधन और पेयजल की समस्या यहां लगातार चर्चा में रहती है.
यहां सरकार या विधायक का मूल्यांकन घोषणाओं से नहीं, बल्कि दिन-प्रतिदिन के समाधान से होता है. नाला जाम होना, सड़क पर गड्ढा, कूड़े का ढेर या पानी की सप्लाई बाधित होना, ये सब तुरंत राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं. वहीं समय पर मरम्मत, सफाई और फॉलो-अप से विश्वास मजबूत हो जाता है.
एराविपुरम में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय पास-पास रहते हैं. शहरी घनता के कारण पारंपरिक जातिगत सीमाएं अपेक्षाकृत कम प्रभावी होती गई हैं. यहां राजनीति में अब अधिक असर डालते हैं रोजगार, आय, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच और महंगाई.
मजदूर और निम्न आय वर्ग के लिए नौकरी की स्थिरता, पेंशन, राशन और कल्याण योजनाएं महत्वपूर्ण हैं. मध्यमवर्ग के लिए सड़क, ट्रांसपोर्ट, सुरक्षा, साफ-सफाई और शहर की व्यवस्था बड़ी प्राथमिकता बनती है.
एराविपुरम की राजनीतिक संस्कृति में सुलभता और परिचय सबसे बड़ा गुण माना जाता है. यहां प्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह पूरे कार्यकाल में सक्रिय रहे, लोगों की शिकायतें सुने और स्थानीय समितियों व यूनियनों के संपर्क में बना रहे. बरसात में जलभराव या तटीय इलाकों में नुकसान जैसे संकट के समय नेता की मौजूदगी निर्णायक बन जाती है. यहां लोग पार्टी से ज्यादा व्यक्ति की स्थानीय पकड़ और प्रशासन से काम निकलवाने की क्षमता को महत्व देते हैं.
एराविपुरम लंबे समय से वामपंथ की मजबूत सीट रही है. इसका आधार मजदूर राजनीति और तटीय श्रमिक वर्ग रहा है. समय के साथ CPI(M) ने संगठनात्मक नियंत्रण मजबूत किया है, जबकि पुराने समाजवादी समूहों का प्रभाव घटा है. हालांकि राजनीतिक स्मृति मजबूत है, लेकिन अब वोट का आधार अधिकतर संगठन, काम और स्थानीय नेटवर्क बन गया है, न कि केवल वैचारिक निष्ठा.
2021 विधानसभा चुनाव में एराविपुरम ने स्पष्ट और बड़ा जनादेश दिया. CPI(M) के उम्मीदवार एम. नौशाद को 71,573 वोट मिले. उन्होंने RSP के बाबू दिवाकरन को हराया, जिन्हें 43,452 वोट मिले. जीत का अंतर 28,121 वोट रहा था. BJP तीसरे स्थान पर रही और उसे 8,468 वोट मिले। मतदान प्रतिशत लगभग तीन-चौथाई रहा. यह परिणाम बताता है कि यह सीट अनिश्चितता वाली शहरी सीट नहीं है, यहां मतदाता अक्सर स्थिरता और निरंतरता को प्राथमिकता देता है.
एराविपुरम के भीतर मतदान व्यवहार अलग-अलग माइक्रो जोन में बदलता है. तटीय वार्ड सीट का भावनात्मक केंद्र हैं, जहां मत्स्यजीवी आजीविका, समुद्री कटाव और आपदा राहत बड़े मुद्दे हैं. पुराने रिहायशी इलाकों में जलनिकासी, कचरा और सड़क मरम्मत जैसे मुद्दे वोट को प्रभावित करते हैं. तेजी से शहरी बनते किनारे और ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर ऐसे क्षेत्र हैं जहां कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सुविधा और सार्वजनिक संस्थानों की गुणवत्ता निर्णायक भूमिका निभाती है.
BJP ने कुछ हिस्सों में संगठन और वोट शेयर बढ़ाया है, लेकिन सीट का मुख्य मुकाबला अभी भी वामपंथ और उसके प्रतिद्वंद्वियों के बीच केंद्रित रहता है. कांग्रेस का प्रभाव कमजोर हुआ है, जबकि वामपंथी खेमे के भीतर स्थानीय समीकरण कभी-कभी असर डालते हैं.
(ए के शाजी)
Babudivakaran
RSP
Renjith Ravindran
BDJS
Ayathil Riyas
SDPI
Nota
NOTA
Mohanan Mayyanad
BSP
M. Unnikrishnan
ADHRMPI
S. Sudhilal
SUCI
N. Shihabudeen
IND
केरलम में कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है. दिल्ली में लगातार बैठकों और नेताओं को तलब किए जाने के बीच सस्पेंस और गहरा गया है. पार्टी के भीतर अलग-अलग दावे, सहयोगी दलों की बेचैनी और समय का दबाव हाईकमान के सामने नई चुनौती है.
केरल के कोट्टायम में कांग्रेस कार्यकर्ता ने वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग करते हुए आत्महत्या की कोशिश की. उसने सार्वजनिक रूप से खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसका लाइटर छीनकर बड़ा हादसा टाल दिया. घटना के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया.
केरलम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने वामपंथी गढ़ को तोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की है. इस चुनाव में कांग्रेस ने एकजुट होकर काम किया और जीत हासिल की.
केरलम में कांग्रेस की यह जीत राहुल की संगठनात्मक पकड़ और प्रियंका की जन-संवाद शैली का एक सफल प्रयोग है. राहुल गांधी ने जहां पार्टी के भीतर की राजनीति को संभाला और नैरेटिव सेट किया, वहीं प्रियंका गांधी ने जमीनी स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित कर UDF के लिए निर्णायक बढ़त सुनिश्चित की.
शशि थरूर के तिरुवनंतपुरम क्षेत्र में 7 में से 4 सीटें यूडीएफ को मिलीं, जबकि 3 सीटें अन्य दलों के खाते में गईं. कांग्रेस ने नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम जीतीं, जबकि बीजेपी और सीपीआई(एम) को भी सफलता मिली. 2021 के मुकाबले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन किया है. थरूर ने स्टार प्रचारक के रूप में अहम भूमिका निभाई. हालांकि बीजेपी का बढ़ता जनाधार और संगठनात्मक चुनौतियां कांग्रेस के लिए आगे भी चिंता का विषय बनी रहेंगी.
पश्चिम बंगाल में चुनावी जीत के साथ ही, भारतीय जनता पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अधूरी सफलता का चक्र पूरा कर लिया है. ब्रांड मोदी के जरिए तेजी से रफ्तार भर रही बीजेपी के लिए केरल और तमिलनाडु के नतीजों ने भी रास्ता आसान कर दिया है.
Rajeev Chandrasekhar Vidhan Sabha Chunav Result Updates: निमोम विधानसभा सीट पर 25 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चन्द्रशेखर ने शानदार जीत दर्ज की. उन्होंने CPI के सिवनकुट्टी को 4,978 वोटों से हराया. सिवनकुट्टी को कुल 52,214 वोट मिले, जबकि चंद्रशेखर को 57,192 वोट प्राप्त हुए. परिणाम के साथ ही इस सीट पर बीजेपी ने बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की.
केरल में UDF की जीत के बाद कांग्रेस के अंदर मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान तेज हो गई है. वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला है, जबकि अंतिम फैसला हाई कमान और CLP बैठक के बाद होगा.
Election Results 2026 Updates: देश के चार राज्यों बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को घोषित हो गए. पश्चिम बंगाल और असम के साथ ही पुडुचेरी में बीजेपी एनडीए की जीत हुई है. तमिलनाडु में विजय की टीवीके ने डीएमके को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, वहीं केरलम में कांग्रेस ने लेफ्ट गठबंधन को हराकर 10 साल का सत्ता का वनवास खत्म किया.
Kerala Election Results 2026 Winning Candidates List: 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में UDF ने 102 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया और राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ फिर से साबित कर दी. इस जीत के साथ ही कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPI-M) के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश पर रोक लग गई.