तिरुवल्ला कोई ऐसा निर्वाचन क्षेत्र नहीं है जहां चुनावी राजनीति में ज्यादा शोर-शराबा या नाटकीयता दिखाई दे. केरल के मध्य भाग के उपजाऊ इलाके में स्थित यह क्षेत्र एक ऐसे समाज का प्रतिनिधित्व करता है जो आर्थिक समझदारी, संस्थागत अनुशासन और धार्मिक संस्थाओं के नैतिक प्रभाव से संचालित होता है. यहां चुनाव आमतौर पर शांत रहते हैं. लोगों की राजनीतिक राय चर्चों, परिवारों की बैठकों, सहकारी बैंकों और कल्याणकारी दफ्तरों में धीरे-धीरे बनती है. तिरुवल्ला के मतदाता किसी जोश या नारेबाजी से नहीं, बल्कि स्थिरता, प्रशासनिक कामकाज और सामाजिक संतुलन को देखकर सोच-समझकर वोट देते हैं.
यह क्षेत्र पथनमथिट्टा जिले में आता है और पथनमथिट्टा लोकसभा सीट का हिस्सा है. यह न तो परंपरागत रूप से वामपंथ का गढ़ रहा है और न ही यूडीएफ का. यहां पार्टी से ज्यादा महत्व सरकार के काम, नेतृत्व की विश्वसनीयता और समाज के संतुलन को संभालने की क्षमता को दिया जाता है. तिरुवल्ला का भूगोल पंबा और मणिमला नदियों से जुड़ा है, जो बरसात में बाढ़ की चिंता बढ़ा देती हैं. पहले यहां धान की खेती प्रमुख थी, लेकिन मजदूरों की कमी, मौसम परिवर्तन और कम मुनाफे के कारण खेती घटती गई. उसकी जगह खाड़ी देशों से आने वाला पैसा, बैंकिंग, सहकारी संस्थाएं, निजी अस्पताल, शिक्षा और छोटे व्यापार अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन गए हैं.
यहां की परेशानियां मजदूर आंदोलनों से ज्यादा बुज़ुर्गों की देखभाल, इलाज का खर्च, पेंशन और बचत की सुरक्षा से जुड़ी हैं. इसलिए सड़क, बाढ़ नियंत्रण, नदी प्रबंधन और अस्पतालों की सुविधा जैसे मुद्दे चुनाव में अहम रहते हैं और विचारधारा से ज्यादा प्रशासनिक क्षमता देखी जाती है.
सामाजिक रूप से यहां सीरियन ईसाई समुदाय का प्रभाव बहुत है, खासकर ऑर्थोडॉक्स, मार थोमा और कैथोलिक चर्चों का, जो केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सहमति के केंद्र भी हैं. पहले ये समुदाय अधिकतर यूडीएफ के साथ रहे, लेकिन अब वे व्यावहारिक होकर स्थिर शासन और भरोसेमंद नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं. हिंदू समाज में एझवा और नायर प्रमुख हैं. एझवा समुदाय कल्याणकारी योजनाओं के कारण एलडीएफ की ओर झुका है, जबकि नायर वर्ग प्रशासनिक कुशलता और सामाजिक व्यवस्था को महत्व देता है. मुस्लिम आबादी कम है और व्यापार से जुड़ी है, जबकि अनुसूचित जाति के लोग कल्याणकारी पेंशन, आवास और स्वास्थ्य योजनाओं से लाभ पाकर एलडीएफ से जुड़े रहे हैं. यहां के मतदाता नेताओं को उनके भाषणों से नहीं बल्कि बाढ़, अस्पताल, पेंशन और दफ्तरों के कामकाज में उनकी उपलब्धता से आंकते हैं.
2021 के विधानसभा चुनाव में जेडी(एस) के मैथ्यू टी. थॉमस ने एलडीएफ के टिकट पर लगभग 63,500 वोट पाकर जीत हासिल की, जबकि यूडीएफ के कुंजु कोशी पॉल को करीब 52,400 वोट मिले और भाजपा काफी पीछे रही. यह नतीजा महामारी के समय सरकार के काम, बाढ़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन और प्रशासनिक स्थिरता के प्रति भरोसे को दिखाता है. यहां जीतने के लिए चर्चों, सहकारी बैंकों, अस्पतालों और स्थानीय प्रशासन से तालमेल बनाना जरूरी है.
संकट के समय मौजूद रहना बहुत मायने रखता है. एलडीएफ को कल्याण योजनाओं से समर्थन मिला है, लेकिन तिरुवल्ला आंख बंद कर समर्थन नहीं देता. यहां गलती याद रखी जाती है. विधानसभा क्षेत्र संख्या 111 वाला तिरुवल्ला, जहां की अर्थव्यवस्था प्रवासी धन, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा और छोटे व्यापार पर टिकी है, एक ऐसा इलाका है जहां प्रशासनिक योग्यता विचारधारा से ऊपर रहती है. नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ और ढाँचे की समस्या, शहरों में स्वास्थ्य और बुज़ुर्गों की देखभाल, व्यापारिक क्षेत्रों में सड़क और बैंकिंग की चिंता, और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे मतदाताओं के मन को प्रभावित करते हैं. कुल मिलाकर तिरुवल्ला व्यवस्था, शांति और भरोसेमंद शासन चाहता है. यह नेताओं को उनके काम से परखता है, याद रखता है और अनुभव के आधार पर वोट देता है, न कि क्षणिक भावनाओं या शोर-शराबे के आधार पर.
(K. A. Shaji)
Kunju Koshy Paul
KEC
Ashokan Kulanada
BJP
Adv. Thomas Mathew (roy)
IND
Rajendradas
BSP
Nota
NOTA
Vinod Kumar
DSJP
Surendran Kottoorathil
IND
K .p Yesudas
IND
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