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कोल्लम विधानसभा चुनाव 2026 (Kollam Assembly Election 2026)

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कोल्लम विधानसभा चुनाव 2026 (Kollam Assembly Election 2026)

कोल्लम एक विधानसभा क्षेत्र है जो कोल्लम जिले के शहरी केंद्र में स्थित है और कोल्लम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है.इसमें नगर निगम के घनी आबादी वाले वार्ड, भीड़भाड़ वाले बाजार और उनसे जुड़े अर्ध-शहरी पंचायत क्षेत्र शामिल हैं, जहां तेजी से हो रहे विस्तार का दबाव साफ दिखता है. यहां की राजनीति किसी चुनावी मौसम तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रोजमर्रा के नागरिक जीवन में लगातार चलती रहती है और इस बात से तय होती है कि सत्ता आम समस्याओं के समय कैसा प्रदर्शन करती है.

कोल्लम के मतदाता किसी भी नेता या पार्टी को लंबे समय तक आंख बंद करके समर्थन नहीं देते. सड़कें, जलनिकासी, पीने का पानी, कचरा प्रबंधन, परिवहन व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों का व्यवहार ही यहां की राजनीति की असली भाषा है. इसी कारण यह सीट ‘कड़ी’ मानी जाती है, क्योंकि यहां जीत आसान नहीं होती, हर जीत पर लगातार नजर रखी जाती है और समय-समय पर दोबारा परखा जाता है.

कोल्लम की राजनीतिक पहचान उसके शहरी भूगोल से गहराई से जुड़ी है. रिहायशी इलाके, थोक बाजारों, बस अड्डों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी दफ्तरों से सटे हुए हैं. संकरी सड़कों पर भारी ट्रैफिक रहता है. मानसून में नालियों की असली परीक्षा होती है. सार्वजनिक जगहें दुकानदारों, यात्रियों, निवासियों और नगर प्रशासन के बीच तालमेल और टकराव का मैदान बन जाती हैं. पुराने इलाकों में जर्जर ढांचा बढ़ती आबादी से टकराता है, जबकि नए अपार्टमेंट और अर्ध-शहरी इलाकों में तेज निर्माण और सुविधाओं की कमी लोगों की नाराजगी बढ़ाती है. यहां किसी चौराहे का जलमग्न होना, टूटी सड़क या पानी की किल्लत केवल परेशानी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन जाती है.

यहां की जनता सामाजिक रूप से विविध है. हिंदुओं के साथ बड़ी संख्या में मुस्लिम और ईसाई समुदाय भी अलग-अलग इलाकों में फैले हुए हैं. शहर का माहौल पारंपरिक जातिगत दीवारों को कुछ हद तक कमजोर करता है. प्रोफेशनल लोग, व्यापारी, बंदरगाह से जुड़े मजदूर, ट्रांसपोर्ट वर्कर, असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी और पेंशन पर निर्भर बुज़ुर्ग एक-दूसरे के करीब रहते हैं. पहचान जरूरी है, लेकिन अकेली पहचान वोट तय नहीं करती. महंगाई, शिक्षा, रोजगार और नागरिक सुविधाएं अक्सर समुदायों की सीमाओं से ऊपर उठकर वोटिंग व्यवहार को प्रभावित करती हैं.

कोल्लम की राजनीतिक संस्कृति में यह अपेक्षा रहती है कि नेता पूरे कार्यकाल में उपलब्ध रहें, केवल चुनाव के समय नहीं. लोग चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि समस्याओं पर तुरंत हस्तक्षेप करें, अफसरशाही से काम करवाएं और नगर प्रशासन से लगातार संपर्क में रहें. रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, व्यापार मंडल, मजदूर संगठन और नागरिक मंच राजनीतिक राय बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां विचारधारा से ज्यादा यह देखा जाता है कि नेता काम करवा पा रहे हैं या नहीं.

यह सीट अक्सर बेहद कम अंतर से फैसला देती है. यहां चुनाव समर्थन का प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि कामकाज की ऑडिट रिपोर्ट जैसा होता है. 

2021 का विधानसभा चुनाव भी इसी स्वभाव को दिखाता है, जब जीत और हार के बीच सिर्फ लगभग दो हजार वोटों का अंतर था.

2016 में जब लंबे समय से विधायक रहे सीपीआई(एम) नेता पी. के. गुरुदासन की जगह एम. मुकेश को उम्मीदवार बनाया गया, तो इसे पार्टी ने नवीनीकरण बताया, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ कार्यकर्ताओं और जागरूक मतदाताओं में असंतोष भी पैदा हुआ. कई लोगों को लगा कि वाम राजनीति संगठन और वरिष्ठता से हटकर अब प्रसिद्धि और मीडिया छवि पर ज्यादा निर्भर हो रही है. यह बेचैनी पूरी तरह कभी खत्म नहीं हुई.

बाद में मुकेश पर लगे गंभीर आपराधिक आरोपों ने इस असहजता को और बढ़ा दिया. उनके खिलाफ एक महिला द्वारा यौन शोषण की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ, जो मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सामने आए बड़े खुलासों के संदर्भ में सामने आया. पुलिस ने उनसे पूछताछ की और मामला अदालत में है. सीपीआई(एम) ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का विषय बताते हुए उनका समर्थन किया, लेकिन कोल्लम की शहरी राजनीति में यह मुद्दा केवल कानूनी नहीं रहा. महिलाओं, युवाओं और मध्यमवर्गीय इलाकों में यह सवाल बनने लगा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और जवाबदेही के क्या मानक होने चाहिए. कम अंतर से जीतने वाली इस सीट में ऐसी असहजता राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है.

2021 के चुनाव में लगभग 1.76 लाख मतदाताओं में से 1.30 लाख से ज्यादा ने मतदान किया. एम. मुकेश को 58,524 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की एडवोकेट बिंदु कृष्णा को 56,452 वोट मिले. जीत का अंतर सिर्फ 2,072 वोट था. भाजपा उम्मीदवार एम. सुनील को 14,252 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे. छोटे दलों और नोटा को भी कुछ वोट मिले. नतीजा यह साफ दिखाता है कि वाम दल जीता तो, लेकिन बहुत पतले अंतर से, और कांग्रेस पूरी तरह मुकाबले में रही.

यहां मुख्य मुद्दे शहरी ढांचे से जुड़े हैं- सड़कें, नालियां, कचरा प्रबंधन, पीने का पानी, ट्रैफिक, पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन. बुज़ुर्गों और असंगठित मजदूरों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और आवास योजनाओं में देरी भी नाराजगी पैदा करती है. पर्यावरण, जलस्रोतों की सुरक्षा, विरासत क्षेत्रों का संरक्षण और अतिक्रमण भी बहस का हिस्सा हैं.

व्यापारिक इलाके सबसे ज्यादा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, जहां सड़क खुदाई, नियमों का पालन और ढांचागत समस्याएं तुरंत प्रतिक्रिया पैदा करती हैं. पुराने रिहायशी इलाकों में पानी और ड्रेनेज प्रमुख मुद्दे हैं, जबकि अर्ध-शहरी इलाकों में परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर रहता है. भाजपा की मौजूदगी बढ़ी है, लेकिन मुख्य मुकाबला अब भी वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच ही रहता है.

(K. A. Shaji)
 

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Phase 1

चुनाव शेड्यूल

मतदान की तारीख
09 अप्रैल 2026
मतगणना की तारीख
04 मई 2026
पूरे चुनाव शेड्यूल के लिए
यहां क्लिक कीजिए
कोल्लम विधानसभा क्षेत्र में मतदान फेज 1 में 09 अप्रैल 2026 को होगा और मतगणना 04 मई 2026 को की जाएगी.

कोल्लम विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2021
2016
WINNER

M Mukesh

img
CPI(M)
वोट58,524
विजेता पार्टी का वोट %44.9 %
जीत अंतर %1.6 %

कोल्लम विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Adv. Bindhu Krishna

    INC

    56,452
  • Sunil M

    BJP

    14,252
  • Nota

    NOTA

    750
  • Remanan

    BSP

    290
  • Baby S

    ADHRMPI

    183
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केरल विधानसभा चुनाव 2026 से जुड़े Frequently Asked Questions (FAQs)

कोल्लम विधानसभा सीट के लिए मतदान की तारीख क्या है? यहां किस चरण में मतदान होगा?

कोल्लम विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2021) विधायक कौन हैं?

2021 में कोल्लम में CPI(M) का विजयी वोट प्रतिशत कितना था?

2021 के कोल्लम चुनाव में M Mukesh को कितने वोट मिले थे?

2021 में कोल्लम सीट पर उपविजेता कौन था?

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