कुंडारा एक विधानसभा क्षेत्र है, यह पूर्वी कोल्लम जिले के औद्योगिक और तेजी से शहरीकरण वाले इलाके में स्थित है और कोल्लम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यहां राजनीति को बड़े-बड़े वादों या विचारधाराओं से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी के अनुभव से परखा जाता है. यहां फैक्ट्रियों के टाउनशिप, पुराने रिहायशी वार्ड और तेजी से बढ़ते नए शहरी इलाके एक साथ मिलते हैं. यहां के मतदाता यह देखते हैं कि नौकरियां सुरक्षित हैं या नहीं, सिविक सुविधाएं ठीक से मिल रही हैं या नहीं, सरकारी योजनाओं और पेंशन जैसी कल्याणकारी सुविधाएं बिना रुकावट लोगों तक पहुंच रही हैं या नहीं, और जब कोई समस्या आती है तो नेता उपलब्ध रहते हैं या नहीं.
कुंडारा में चुनाव आसान जीत नहीं होते, बल्कि भरोसे, जमीनी मौजूदगी और काम के आधार पर लड़े जाते हैं. इस क्षेत्र की राजनीतिक पहचान इसके औद्योगिक इतिहास से जुड़ी है, जहां लंबे समय से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की फैक्ट्रियां रही हैं, जिनसे मजदूर बस्तियां और मजबूत ट्रेड यूनियन संस्कृति बनी. इसके साथ-साथ शहरी विस्तार ने नई रिहायशी कॉलोनियां, बाजार और सड़कों का जाल खड़ा किया है. इसलिए यहां शासन की परीक्षा फैक्ट्री गेट, बस स्टॉप और राशन दुकान तक होती है. सामाजिक रूप से यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, लेकिन ईसाई और मुस्लिम समुदाय भी बड़ी संख्या में हैं. मजदूर संगठन, सहकारी संस्थाएं और रेजिडेंट्स एसोसिएशन राजनीति को प्रभावित करते हैं. पहचान से ज्यादा वर्ग, संगठन और सरकारी लाभों तक पहुंच चुनावी व्यवहार तय करती है.
यहां के मतदाता सजग हैं और प्रशासनिक कमियों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं. राजनीतिक तौर पर वही नेता टिकते हैं जो जमीनी स्तर पर लगातार मौजूद रहते हैं और संकट में हस्तक्षेप करते हैं. औद्योगिक विवाद, बाढ़, हादसे, पेंशन या राशन में देरी जैसी समस्याओं पर जो नेता सक्रिय रहते हैं, उन्हें भरोसा मिलता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में यह साफ दिखा, जब सत्तारूढ़ वाम मोर्चे की वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मंत्री जे. मर्सीकुट्टी अम्मा को कांग्रेस के पी.सी. विष्णुनाथ ने 4,523 वोटों के अंतर से हराया. विष्णुनाथ को 76,405 और मर्सीकुट्टी अम्मा को 71,882 वोट मिले. यह नतीजा यह बताने वाला था कि मंत्री पद की हैसियत भी तब काम नहीं आती, जब जमीनी असंतोष बढ़ जाए. भाजपा तीसरे स्थान पर रही और उसका एक स्थायी वोट आधार तो है, लेकिन मुकाबला मुख्यतः कांग्रेस और वाम मोर्चे के बीच ही रहता है. यहां रोजगार की सुरक्षा, मजदूर कल्याण, फैक्ट्रियों पर पर्यावरण नियमों का पालन, सड़क, जलनिकासी, सफाई, पानी, परिवहन, पेंशन, राशन, आवास, स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई जैसे मुद्दे निर्णायक होते हैं.
यहां अलग-अलग इलाकों में अलग प्राथमिकताएं हैं. औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूर अधिकार, पुराने वार्डों में सिविक सुविधाएं और नए इलाकों में सड़क-ड्रेनेज व आवास जैसे मुद्दे हैं. कहना गलत नहीं होगा कि कुंडारा वही नेताओं को चुनता है जो संगठन के साथ-साथ आम लोगों के बीच लगातार मौजूद रहें और काम करके दिखाए.
(K. A. Shaji)
J.mercykutty Amma
CPI(M)
Vanaja Vidyadharan
BDJS
Nota
NOTA
R.rahul
SUCI
Santhosh Adooran
IND
Sibu Karamcodu
ADHRMPI
Shiju M Varghese
DSJP
Vinod Bahuleyan
RJD
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