केरल की राजनीति में चंगनास्सेरी एक शांत क्षेत्र है. यह न तो किसी नैतिक प्रतीकों या शहरी आक्रामकता के कारण चर्चा में रहता है, फिर भी यह राज्य के सबसे शिक्षाप्रद विधानसभा क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां की राजनीति टकराव या कट्टर विचारधाराओं से नहीं चलती. यह संवाद, सामाजिक संतुलन और सीमाओं की मौन समझ के जरिए आगे बढ़ती है. चंगनास्सेरी में सत्ता छीनी नहीं जाती, बल्कि धीरे-धीरे, समझौतों के माध्यम से जोड़ी जाती है.
कोट्टायम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला यह विधानसभा क्षेत्र भौगोलिक रूप से मध्य केरल में स्थित है, जहां कृषि, धार्मिक संस्थान, व्यापारिक नेटवर्क और परिवहन मार्ग एक-दूसरे से मिलते हैं. यही वजह है कि यहां की राजनीतिक संस्कृति प्रतिस्पर्धा से अधिक सहअस्तित्व पर आधारित रही है. चुनाव यहां किसी बड़े बदलाव या टूटन का संकेत नहीं होते, बल्कि राजनीतिक संतुलन साधने की प्रक्रिया माने जाते हैं.
चंगनास्सेरी की भौगोलिक संरचना उसकी राजनीति को भी दर्शाती है. ग्रामीण इलाकों में रबर की खेती प्रमुख है, जबकि कस्बा व्यापार और परिवहन का केंद्र है, जो कोट्टायम, अलप्पुझा और पथानामथिट्टा को जोड़ता है. कृषि, छोटे व्यापार, परिवहन से जुड़े रोजगार, सेवा क्षेत्र और विदेशों से आने वाली आय यहां की अर्थव्यवस्था की नींव हैं. यह मिश्रित आर्थिक ढांचा न तो अत्यधिक अस्थिरता पैदा करता है और न ही राजनीतिक उदासीनता. मतदाता स्थिरता को महत्व देते हैं और अचानक होने वाले राजनीतिक बदलावों को संदेह की दृष्टि से देखते हैं.
सामाजिक संरचना की बात करें तो चंगनास्सेरी में ईसाई समुदाय, विशेषकर सीरियन ईसाई, कृषि, शिक्षा और व्यापार में मजबूत उपस्थिति रखते हैं. उनका राजनीतिक व्यवहार भावनाओं के बजाय नेतृत्व की विश्वसनीयता और गठबंधन की व्यावहारिकता पर आधारित होता है. नायर समुदाय भी प्रशासनिक दक्षता और संतुलित नेतृत्व को प्राथमिकता देता है. एझवा समुदाय, जो श्रमिकों, सेवा क्षेत्र और छोटे व्यापारियों में फैला है, अब कल्याण योजनाओं और रोजगार सुरक्षा को देखकर मतदान करता है. मुस्लिम समुदाय संख्या में कम होने के बावजूद व्यापार और परिवहन क्षेत्र में सक्रिय है और करीबी मुकाबलों में निर्णायक भूमिका निभाता है. अनुसूचित जाति और अन्य वंचित वर्गों के लिए कल्याण योजनाएं, आवास, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सम्मान अहम मुद्दे हैं.
चंगनास्सेरी न तो किसी एक दल का गढ़ है और न ही स्थायी रणक्षेत्र. समय-समय पर यहां सत्ता परिवर्तन हुए हैं, जो वैचारिक बदलाव से अधिक गठबंधन और स्थानीय नेतृत्व के समीकरणों का परिणाम रहे हैं. यहां वही उम्मीदवार सफल होते हैं जो संयमित, सुलभ और बातचीत के माध्यम से काम करने की क्षमता रखते हों.
2021 के विधानसभा चुनाव ने इस प्रवृत्ति को साफ तौर पर दिखाया. केरल कांग्रेस (एम) के एडवोकेट जॉब माइचिल ने एलडीएफ के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. जीत का अंतर करीब छह हजार वोटों का रहा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यहां मतदाता किसी भी दल को खुला जनादेश देने से बचते हैं. इस परिणाम को विचारधारात्मक समर्थन के बजाय संतुलित नेतृत्व और गठबंधन की स्वीकार्यता के रूप में देखा गया.
स्थानीय राजनीति में कस्बाई क्षेत्र व्यापारियों और परिवहन से जुड़े लोगों की सोच तय करते हैं, जबकि रबर बेल्ट में कीमतों और कृषि आय का असर सीधा मतदान पर पड़ता है. शिक्षा और धार्मिक संस्थान चुपचाप राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करते हैं. युवाओं का पलायन और रोजगार की अनिश्चितता भी उभरते मुद्दे हैं.
(K. A. Shaji)
V. J. Laly
KEC
Adv G Raman Nair
BJP
Tijo Karikkandam
IND
Amruth Dev T
BSP
M. K. Nizamuddin
SDPI
Nota
NOTA
Rejitha Jayaram
SUCI
Joemon Joseph Srampickal
IND
Babychen Mukkadan
IND
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