बिहार के दरभंगा जिले में स्थित कीरतपुर प्राइमरी स्कूल की जर्जर बिल्डिंग में पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा को लेकर आजतक की ओर से दिखाई गई खबर का बड़ा असर हुआ है. सरकार ने जर्जर सरकारी स्कूल की इमारत को गिरा दिया है. यह कार्रवाई 9 अक्टूबर को की गई. अब इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी संज्ञान लेते हुए दरभंगा के जिलाधिकारी (DM) को नोटिस जारी किया है और आयोग ने दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
यह स्कूल दरभंगा जिले के अलीनगर ब्लॉक के कीरतपुर गांव में स्थित था. 2 अक्टूबर को बिहार के 5 अलग-अलग जिलों के सरकारी स्कूलों की हालात को आजतक ने दिखाया था, जहां पर बच्चे पढ़ाई कर रहे थे.
खराब थी इमारत की हालात
कीरतपुर स्थित स्कूल की इमारत की हालत इतनी खराब थी कि उसका एक मुख्य खंभा गिर चुका था. छत को सहारा देने के लिए बेंच, डेस्क और ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा था. यहां करीब 191 बच्चे पढ़ते थे, जिनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई थी.
रिपोर्ट के बाद दूसरे स्कूल में शिफ्ट किए गए बच्चे
आजतक की ओर से जब 2 अक्टूबर को स्कूल की जर्जर इमारत की स्थिति सामने आई तो लोग हैरान हो गए. इस रिपोर्ट प्रसारित होने के कुछ ही समय बाद ही बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दरभंगा के इस जर्जर स्कूल के मामले में संज्ञान लेते हुए सभी 191 बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने का आदेश जारी किया.
इसके बाद 5 अक्टूबर से किरतपुर प्राथमिक विद्यालय की कक्षाएं पास के मध्य विद्यालय गोसवा परिसर में चलने लगीं. बच्चों को शिफ्ट करने के चार दिन बाद, 9 अक्टूबर को पुराने और जर्जर स्कूल भवन को बुलडोजर से गिरा दिया गया.
NHRC ने दरभंगा के DM से मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 8 अक्टूबर को मीडिया रिपोर्टों के आधार पर इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया. आयोग ने दरभंगा के जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है. NHRC ने कहा कि अगर रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही हैं, तो यह मानवाधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंता का विषय है. आयोग ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन को स्कूल की जर्जर हालत की जानकारी नहीं थी. अब जिला प्रशासन को इस मामले में अपनी रिपोर्ट देनी है.
कई महीने से खराब थी स्कूल की इमारत
रिपोर्ट के मुताबिक, स्कूल का मुख्य खंभा खबर प्रसारित होने से करीब चार से पांच महीने पहले ही गिर गया था. इसके बाद छत को सहारा देने के लिए बेंच, डेस्क और ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा था. इमारत के प्रभावित हिस्से में कक्षाएं बंद कर दी गई थीं और बच्चों को स्कूल परिसर में बने टिन शेड के नीचे पढ़ाया जा रहा था. स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार ने बताया कि भवन की खराब हालत के बारे में प्रखंड और जिला स्तर के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई थी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में पत्र भी भेजे गए थे और अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण भी किया था. इसके बावजूद इमारत की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया था.