अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 25-26 भारतीय नागरिक मारे गए. भारत ने इसे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का सीधा हमला माना. इसके जवाब में मई 2025 में भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर नामक सैन्य कार्रवाई शुरू की. यह कार्रवाई 7 से 10 मई 2025 के बीच चली और लगभग 88 घंटे तक चली. इसमें तीनों सेनाओं ने मिलकर काम किया, लेकिन हवाई अभियान में भारतीय वायुसेना की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही.
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र उस समय भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे. पश्चिमी कमान दिल्ली से सियाचिन, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और अभियानों की जिम्मेदारी संभालती है.
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यह पाकिस्तान सीमा से सटा सबसे महत्वपूर्ण कमांड है. मिश्र के नेतृत्व में इस कमांड ने आतंकी ठिकानों और पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए. उन्होंने लक्ष्य चुनने, हथियार तय करने और नुकसान कम रखने में सीधी भूमिका निभाई. उनकी सेवा के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) दिया गया.

कब बने पश्चिमी कमांड के इंचार्ज
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को पश्चिमी वायु कमान का पदभार संभाला. इससे पहले वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (ऑपरेशंस) थे. वे दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के रूप में वायुसेना में शामिल हुए थे. उनके पास 3000 से ज्यादा उड़ान घंटे का अनुभव है.
वे फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं. कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) में उन्होंने मिराज 2000 पर लेजर गाइडेड बम तैयार करने में भी मदद की थी. अप्रैल 2026 में वे सेवानिवृत्त हुए.
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ऑपरेशन सिंदूर कैसे पूरा किया गया
ऑपरेशन की शुरुआत 6-7 मई 2025 की रात को हुई. भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आतंकी शिविरों पर हमला किया. शुरुआती हमलों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने निशाने पर थे. मुरीदके, बहावलपुर, मुजफ्फराबाद और अन्य जगहों पर शिविर नष्ट किए गए.
जब पाकिस्तान ने जवाबी हमले शुरू किए तो भारत ने सैन्य ठिकानों पर भी निशाना साधा. इसमें पाकिस्तानी एयरबेस जैसे नूर खान और रहीम यार खान शामिल थे. हमले भारतीय हवाई सीमा के अंदर से स्टैंड-ऑफ हथियारों से किए गए. सीमा पार नहीं किया गया. लक्ष्य चुनने में खुफिया जानकारी का इस्तेमाल हुआ ताकि सिविलियन नुकसान कम हो. सरकार ने सेना को काफी स्वतंत्रता दी थी लेकिन नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया.
एयर मार्शल मिश्र ने बताया कि पाकिस्तानी विमान जब भी उड़ान भरते तो एस-400 उन्हें रोक देता. एक बार उन्होंने खुद एस-400 ऑपरेटर को शूट करने का आदेश दिया. 314 किलोमीटर दूर लक्ष्य नष्ट हो गया. यह इतिहास का सबसे लंबा सरफेस-टू-एयर किल माना जाता है. पाकिस्तान ने एस-400 की लोकेशन पता लगाने के लिए जासूस और स्लीपर सेल भी लगाए, लेकिन सफलता नहीं मिली.
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पाकिस्तान को कैसे हराया गया
भारत ने हवाई श्रेष्ठता हासिल की. पाकिस्तान के रडार, AWACS और एयर डिफेंस सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसकी आंखें छीन ली गईं. पाकिस्तानी विमान भारतीय सीमा के 200 किलोमीटर के अंदर आने से रोक दिए गए. कई पाकिस्तानी विमान और ड्रोन नष्ट हुए. पाकिस्तान ने दिल्ली पर फतह मिसाइल से हमला करने की कोशिश की लेकिन सिरसा के आसमान में उसे मार गिराया गया.
चार दिनों के अंदर पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ. उसकी एयर फोर्स अक्षम हो गई. अंत में दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी. भारत ने क्षेत्र कब्जा नहीं किया बल्कि आतंकी ढांचे और सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाकर उद्देश्य हासिल किया. यह नॉन-कॉन्टैक्ट युद्ध का उदाहरण बना जहां सीमा पार किए बिना दूर से सटीक हमले किए गए.
मुख्य हथियारों में शामिल थे...
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अपनाई गई रणनीति
रणनीति का आधार था – सटीकता, नियंत्रण और कम नुकसान. लक्ष्यों को पहले से चुना गया. स्टैंड-ऑफ रेंज से हमले किए गए. इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और इंटीग्रेटेड एयर कमांड सिस्टम से समन्वय रखा गया. पाकिस्तान के एयर डिफेंस को पहले कमजोर किया गया फिर गहरे ठिकाने पर हमला किया गया. नागरिक इलाकों से दूर रहने का ध्यान रखा गया. कैलिब्रेटेड एस्केलेशन अपनाया गया यानी जरूरत पड़ने पर ही हमले बढ़ाए गए. महिला पायलट भी अभियान में शामिल रहीं.
यह ऑपरेशन भारत की नई सैन्य सोच का प्रतीक बना जहां आतंकवाद के जवाब में तेज, सटीक और नियंत्रित कार्रवाई की जाती है. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नेतृत्व ने पश्चिमी मोर्चे पर सफलता सुनिश्चित की.