पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के टिटागढ़ इलाके में कई मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाए जाने का मामला सामने आया है. टिटागढ़ पुलिस स्टेशन की ओर से प्रशासन के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई. पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में मस्जिदों से लगे लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाए गए. इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर विवाद भी शुरू हो गया है.
बताया गया है कि टिटागढ़ समेत उत्तर 24 परगना के कुछ अन्य इलाकों में भी मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने की कार्रवाई की गई है. स्थानीय पुलिस थानों की ओर से मस्जिद समितियों को ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए निर्देश दिए गए. हालांकि, मुस्लिम संगठनों और कुछ स्थानीय नेताओं का आरोप है कि उन्हें इस संबंध में कोई लिखित आदेश या सरकारी अधिसूचना नहीं दी गई.
मस्जिद समितियों और मुस्लिम नेताओं का कहना है कि पुलिस ने लाउडस्पीकर हटाने के लिए मुख्य रूप से मौखिक निर्देश दिए. उनका सवाल है कि अगर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक आदेश है तो उसे लिखित रूप में क्यों नहीं दिया गया. मुस्लिम संगठनों ने इस मामले में स्पष्टता की मांग करते हुए कहा है कि कार्रवाई का आधार और नियम सार्वजनिक किए जाने चाहिए. साथ ही उन्होंने एक स्पष्ट SOP जारी करने की मांग भी की है.
वहीं प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी एक धर्म या समुदाय को ध्यान में रखकर नहीं की जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देश मौजूद हैं. इन नियमों का पालन सभी धार्मिक स्थलों पर किया जाना है और कार्रवाई उसी के तहत की जा रही है. प्रशासन का तर्क है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के संबंध में तय ध्वनि सीमा और अन्य नियमों का पालन जरूरी है.
मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाए जाने की कार्रवाई पर मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि यदि ध्वनि प्रदूषण के नियमों को लागू किया जा रहा है तो उसके लिए एक समान और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए. संगठनों ने प्रशासन से लिखित आदेश जारी करने और यह स्पष्ट करने की मांग की है कि किन नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना है कि मौखिक निर्देशों के बजाय आधिकारिक दस्तावेज के जरिए स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए.
इस पूरे मामले ने अब कानूनी रूप भी ले लिया है. मामले को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में जनहित याचिका यानी PIL दायर की गई है. याचिका के जरिए कार्रवाई और उसके तरीके को लेकर सवाल उठाए गए हैं और संबंधित दिशा-निर्देशों को स्पष्ट करने की मांग की गई है. अब इस मामले में अदालत की कार्यवाही और प्रशासन की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी.
दरअसल, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर देश में पहले भी अदालतों और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के तहत कई बार कार्रवाई होती रही है. ऐसे मामलों में धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े नियमों के बीच संतुलन का सवाल उठता है. टिटागढ़ में हुई कार्रवाई के बाद भी यही मुद्दा चर्चा में है.