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हर महीने इंवेस्ट करने के लिए सिर्फ ₹5000 हैं? जानें FD, RD या SIP में क्या रहेगा बेहतर

हर महीने ₹5,000 की बचत छोटी जरूर लग सकती है, लेकिन सही जगह निवेश करने पर लंबे समय में बड़ा फंड तैयार हो सकता है. सवाल यह नहीं कि FD, RD या SIP में से कौन सबसे बेहतर है, बल्कि यह है कि आपको पैसे की जरूरत कब और किस मकसद के लिए है. 1-2 साल के लक्ष्य के लिए FD, तय बचत के लिए RD और लंबे समय के लक्ष्य के लिए इक्विटी SIP पर विचार किया जा सकता है. हालांकि SIP में बाजार जोखिम भी रहता है.

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हर महीने ₹5,000 की छोटी बचत लंबे समय में बड़ा फंड बना सकती है. (सांकेतिक तस्वीर)
हर महीने ₹5,000 की छोटी बचत लंबे समय में बड़ा फंड बना सकती है. (सांकेतिक तस्वीर)

महीने के आखिर में अगर खर्च निकालने के बाद आपके पास निवेश के लिए सिर्फ ₹5,000 बचते हैं, तो सबसे बड़ा सवाल होता है- इसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में लगाएं, रिकरिंग​ डिपॉजिट (RD) में बचाएं या सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करें? इसका कोई एक सही जवाब नहीं है. NYVO Money के CEO हर्ष सोनी के मुताबिक, निवेश का फैसला इस बात से होना चाहिए कि पैसे की जरूरत किस उद्देश्य के लिए है.

सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसे की जरूरत कब पड़ेगी, आपका मकसद क्या है और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं. मान लीजिए दो लोग हर महीने ₹5,000 निवेश कर रहे हैं. एक व्यक्ति को एक साल के भीतर इमरजेंसी फंड तैयार करना है, जबकि दूसरा 30 साल की उम्र में अगले 20 साल के लिए रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना चाहता है. तो दोनों के इंवेस्टमेंट विकल्प एक जैसे नहीं हो सकते.

सबसे पहले तय करें पैसे का मकसद

इन्वेस्टमेंट शुरू करने से पहले अपनी बचत को किसी लक्ष्य से जोड़ना जरूरी है. हर्ष सोनी के मुताबिक, इमरजेंसी फंड के लिए FD या लिक्विड म्यूचुअल फंड जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. वहीं, अगर लक्ष्य 8-10 साल या उससे ज्यादा दूर है, तो SIP के जरिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश पर विचार किया जा सकता है. Wise FinServ की सीओओ चारू पाहुजा के मुताबिक, 2-3 साल दूर के लक्ष्य के लिए FD या RD ज्यादा उपयुक्त हैं, जबकि 5 साल से लंबे लक्ष्य में इक्विटी SIP बेहतर विकल्प हो सकता है. यानी हर महीने बचने वाले वही ₹5,000 अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग तरीके से लगाए जा सकते हैं.

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₹5,000 की मंथली सेविंग्स कितनी बन सकती है?

अगर आप हर महीने ₹5,000 इंवेस्ट करते हैं, तो एक साल में कुल ₹60,000 और 15 साल में आपकी जेब से कुल ₹9 लाख जाएंगे. चारू पाहुजा के मुताबिक, अगर 7% सालाना रिटर्न का अनुमान लगाया जाए, तो 15 साल में यह रकम करीब ₹15.8 लाख हो सकती है. वहीं, 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर यह करीब ₹25 लाख तक पहुंच सकती है. हालांकि, ये सिर्फ उदाहरण हैं. म्यूचुअल फंड और इक्विटी इन्वेस्टमेंट में रिटर्न मार्केट पर निर्भर करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती.

यह भी पढ़ें: पहली सैलरी से ही डालें बचत की आदत, जानें SIP, FD और RD में से कब क्या चुनें?

FD कब बेहतर विकल्प हो सकता है?

FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट की सबसे बड़ी खासियत इसकी निश्चितता है. एफडी में निवेश करने वाले को इंटररेस्ट रेट, टेन्योर और मैच्योरिटी के बाद कितना फंड मिलेगा इसके बारे में पहले ही पता होता है. इसलिए कम अवधि के लक्ष्यों और इमरजेंसी बचत के लिए यह उपयोगी विकल्प हो सकता है. लेकिन FD के ब्याज पर टैक्स लागू हो सकता है. इसके अलावा महंगाई समय के साथ पैसे की वास्तविक खरीद क्षमता को कम कर सकती है. हर्ष सोनी के मुताबिक, FD का मुख्य काम सुरक्षा और स्थिरता देना है, न कि बहुत ज्यादा रिटर्न हासिल करना. FD में पैसा लगाने से पहले प्रीमैच्योर विड्रॉल के नियम और इस पर लगने वाली पेनल्टी को भी जरूर समझ लें.

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RD किसके लिए उपयोगी है?

RD यानी रिकरिंग डिपॉजिट उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो हर महीने एक तय रकम बचाने की आदत बनाना चाहते हैं. इसमें हर महीने नियमित रकम जमा की जाती है और तय अवधि के बाद मैच्योरिटी पर रकम मिलती है. छुट्टियां मनाने, गैजेट खरीदने, शादी, गाड़ी या घर की डाउन पेमेंट जैसे कुछ तय और अपेक्षाकृत कम अवधि वाले लक्ष्यों के लिए RD पर विचार किया जा सकता है.

SIP में ज्यादा रिटर्न की संभावना, लेकिन जोखिम भी

SIP के जरिए नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है. अगर SIP इक्विटी फंड में है, तो बाजार के उतार-चढ़ाव का असर निवेश की वैल्यू पर पड़ता है. कुछ महीनों में निवेश बढ़ सकता है, तो कुछ समय में उसकी वैल्यू गिर भी सकती है. इसलिए 10-15 साल जैसे लंबे लक्ष्य के लिए SIP पर विचार करने वाले निवेशक को कुछ महीनों के रिटर्न के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए. इंवेस्टमेंट का समय जितना लंबा होता है, शेयर बाजार की अस्थिरता को झेलने की क्षमता भी उतनी अधिक होती है.

अगर किसी व्यक्ति के पास अभी इमरजेंसी फंड नहीं है, तो वह अपनी मासिक ₹5,000 की बचत को अलग-अलग उद्देश्यों के हिसाब से बांटने पर विचार कर सकता है. उदाहरण के लिए, ₹2,000 सुरक्षित विकल्प में और ₹3,000 इक्विटी SIP में. हालांकि, यह कोई तय फॉर्मूला नहीं है. ऐसा बंटवारा तभी समझदारी भरा होगा, जब निवेशक के दो अलग लक्ष्य और उनके लिए अलग समय-सीमा हो.

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यह भी पढ़ें: Post Office की FD में 5 लाख का निवेश.... 1, 3, 5 साल बाद कितना होगा?

पहली बार निवेश कर रहे हैं तो क्या करें?

अगर आप पहली बार निवेश शुरू कर रहे हैं, तो शुरुआत किसी प्रोडक्ट से नहीं बल्कि अपने लक्ष्य से करें.

1-2 साल में पैसे की जरूरत है: FD या अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्पों पर विचार करें.

2-3 साल का लक्ष्य है: RD या FD जैसे विकल्प उपयोगी हो सकते हैं.

5 साल से ज्यादा का लक्ष्य है: जोखिम क्षमता के मुताबिक इक्विटी म्यूचुअल फंड SIP पर विचार किया जा सकता है.

10-15 साल या उससे ज्यादा का लक्ष्य है: लंबी अवधि के लिए इक्विटी SIP में ग्रोथ की ज्यादा संभावना हो सकती है.

सिर्फ हाल के शानदार रिटर्न देखकर निवेश का फैसला न करें. इक्विटी इन्वेस्टमेंट में गिरावट के दौरान घबराकर SIP बंद करने से भी बचना चाहिए, बशर्ते आपका मूल लक्ष्य, समय-सीमा और जोखिम क्षमता नहीं बदली हो.

₹5,000 कहां लगाएं? जवाब लक्ष्य में छिपा है

हर निवेशक के लिए FD, RD या SIP में से एक ही विकल्प सही नहीं हो सकता. अगर पैसे की जरूरत जल्दी है, तो सुरक्षा और लिक्विडिटी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है. नियमित छोटी बचत के किसी तय लक्ष्य के लिए RD उपयोगी हो सकती है. वहीं, 10 साल या उससे लंबे लक्ष्य के लिए इक्विटी SIP में ज्यादा ग्रोथ की संभावना हो सकती है, लेकिन इसके साथ बाजार जोखिम भी जुड़ा है. इसलिए हर महीने बचने वाले ₹5,000 को कहां लगाना है, इसका सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि FD ज्यादा देगी या SIP, बल्कि यह है कि आपको यह पैसा कब और किस काम के लिए चाहिए. यही दो बातें आपके लिए सही निवेश रास्ता चुनने में सबसे ज्यादा मदद करेंगी.

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