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आ गया देश में बेरोजगारी का डाटा, जॉब मार्केट का क्या रहा हाल, एक साल में कितने बदले हालात?

भारत में औसतन अप्रैल-जून 2026 के दौरान 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 56.6 करोड़ लोग काम कर रहे थे, जिनमें से 40.2 करोड़ पुरुष और 16.4 करोड़ महिलाएं थीं.

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पिछले एक साल में बेरोजगारी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. (Photo: Representative image)
पिछले एक साल में बेरोजगारी की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है. (Photo: Representative image)

पिछले एक साल में भारत के जॉब मार्केट में कोई बदलाव नहीं हुआ है. यानी की नौकरी के मौके न तो बढ़े हैं और न ही घटे हैं. सोमवार को जारी सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस फाइनेंशियल ईयर की अप्रैल-जून तिमाही के दौरान भारत में बेरोजगारी की दर का अनुपात स्थिर रहा है. इसके अलावा देश में काम करने वाली आबादी (वर्किंग पॉपुलेशन) का अनुपात भी लगभग स्थिर बना रहा है. इसका मतलब यह है कि बेरोजगारी के आंकड़े लगभग पिछले साल के समान ही बने रहे.

सोमवार को स्टैटिस्टिक्स मिनिस्ट्री की ओर से जारी लेटेस्ट डेटा के मुताबिक बेरोजगारी की दर इस तिमाही में 5.5 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 5.6 प्रतिशत थी. बेरोजगारी दर बिना नौकरी वाली कामकाजी उम्र की आबादी को मापती है. 

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जून 2026 में कामकाजी आबादी का अनुपात पिछले महीने की तरह ही 51.4 प्रतिशत पर बना रहा, जबकि जून 2025 में यह 51.2 प्रतिशत था, यानी इसमें 0.2 प्रतिशत अंक की मामूली बढ़ोतरी हुई. 

शहरी जॉब मार्केट न बढ़ा, न घटा

मंत्रालय के तहत नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की ओर से किए गए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे में देश के शहरी जॉब मार्केट में स्थिति स्थिर पाई गई.

इसका मतलब यह है कि शहरों में नौकरी के मौके न घटे और न ही बढ़े. यह सर्वे बेरोजगारी और कुल लेबर फोर्स में काम करने वालों की भागीदारी को मापता है.

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साल-दर-साल के आधार पर शहरी बेरोजगारी दर पिछले साल जून में 7.1 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 6.6 प्रतिशत हो गई. इसी दौरान ग्रामीण बेरोजगारी दर मोटे तौर पर स्थिर रही. 

आंकड़ों के अनुसार कुल लेबर फ़ोर्स पार्टिसिपेशन रेट जो नौकरी कर रही या सक्रिय रूप से नौकरी की तलाश कर रही कामकाजी उम्र की आबादी को मापता है, इस साल जून में 54.4 प्रतिशत रहा. यह आंकड़ा पिछले महीने के बराबर ही था और जून 2025 में दर्ज 54.2 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा था. 

ग्रामीण आबादी में जेंडर गैप कम हुआ

सर्वे में यह भी पाया गया कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में काम करने वाली आबादी में जेंडर गैप (स्त्री-पुरुष के बीच का अंतर) कम हुआ है.

ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की लेबर फ़ोर्स पार्टिसिपेशन रेट इस साल जून में बढ़कर 36.6 प्रतिशत हो गई, जो जून 2025 के 35.2 प्रतिशत की तुलना में 1.4 प्रतिशत अंक ज़्यादा है. 

इसके उलट, शहरी इलाकों में महिलाओं की भागीदारी थोड़ी कम होकर 24.8 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले साल जून में यह 25.2 प्रतिशत थी. यानी कि शहरों में महिलाओं के लिए नौकरी के मौके में मामूली गिरावट दर्ज की गई है.

ग्रामीण इलाकों में कुल वर्कर पॉपुलेशन रेश्यो 53.8 प्रतिशत पर स्थिर रहा; यह पिछले महीने के बराबर ही था और पिछले साल जून में दर्ज 53.3 प्रतिशत से 0.5 प्रतिशत अंक ज़्यादा था. 

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सांख्यिकी मंत्रालय ने बताया कि 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के कामगारों की कुल संख्या का अनुमान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के अनुमानित जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है.

लगभग 56 करोड़ लोग कर रहे हैं काम

औसतन अप्रैल-जून 2026 के दौरान देश में 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के 56.6 करोड़ लोग काम कर रहे थे, जिनमें से 40.2 करोड़ पुरुष और 16.4 करोड़ महिलाएं थीं.
 

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