बेरोजगारी (Unemployment) आज भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के सामने एक गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्या बनकर खड़ी है. यह वह स्थिति है जब काम करने की इच्छा और योग्यता रखने के बावजूद लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता. बेरोजगारी न केवल व्यक्ति के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचाती है, बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा बनती है.
बेरोजगारी के कई कारण हो सकते हैं जैसे- जनसंख्या वृद्धि, शिक्षा प्रणाली में व्यावहारिकता की कमी, औद्योगिक विकास की धीमी गति, कौशल विकास की कमी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता, सरकारी नीतियों का अभाव या प्रभावहीन क्रियान्वयन.
दिल्ली-एनसीआर के नोएडा और फरीदाबाद में हजारों कर्मचारी सड़कों पर हैं. आरोप है कि कंपनियां फाइलों में सैलरी 25 हजार दिखाती हैं, पर हाथ में सिर्फ 10 हजार आते हैं. यहां हम नए लेबर कोड (2025-26) के उन नियमों के बारे में बता रहे हैं जो ऐसे शोषण को रोकने के लिए बनाए गए हैं. अगर आप प्राइवेट जॉब में हैं, तो ये नियम आपके कानूनी हथियार हैं.
सोसायटी में 1.4 करोड़ का घर लिया, बड़े-बड़े सपने थे. लेकिन नौकरी जाना एक प्रोफेशनल के लिए काफी भारी पड़ गया. उनके दोस्त ने सोशल मीडिया पर प्रोफेशनल के ईएमआई के बोझ और अचानक बदली जिंदगी की कहानी एक्स पर साझा करते हुए पूछा कि अगर इस जगह पर आप होते तो क्या करते? जानिए- इस पर क्या जवाब मिले...
यूपी में रिकॉर्ड तोड़ 32,019 फैक्ट्रियां रजिस्टर्ड हो चुकी हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा 10,895 पश्चिमी यूपी (नोएडा बेल्ट) में हैं. लेकिन क्या इन फैक्ट्रीज में काम करने वाले युवा अपनी मेहनत के बदले इतनी कमाई कर पा रहे हैं जिसमें असल में जिया जा सके या सिर्फ 'सर्वाइवल' की जंग लड़ रहे हैं? समझें क्या होती हैं इस शहर की दुश्वारियां?
Degree vs Skills Gap: नोएडा की सड़कों पर उतरा कर्मचारियों का गुस्सा सिर्फ सैलरी की मांग नहीं, बल्कि हमारी शिक्षा व्यवस्था की नाकामी का भी सबूत है. जानिए क्यों 90% अंक लाने वाले छात्र भी 10 हजार की नौकरी के लिए तरस रहे हैं.
यह छंटनी 2026 की दूसरी तिमाही में शुरू होगी और साल के अंत तक पूरी होने की संभावना है. कंपनी को इस पुनर्गठन पर 11.5 से 15 मिलियन डॉलर का खर्च आने का अनुमान है. GoPro ने राजस्व में गिरावट और प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण यह कदम उठाया है. कंपनी अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार कर बाजार में वापसी की योजना बना रही है.
Oracle Lays Off: ओरेकल ने भारत में बेंगलुरु स्थित IDC के लगभग 12,000 कर्मचारी शामिल हैं. वहीं दुनियाभर में 30,000 कर्मचारियों की छंटनी कर रही है ओरेकल. भारत में बेंगलुरु स्थित IDC के कर्मचारियों ने सोशल मीडिया पर बताया अपना दर्द और कंपनी से मिला 'विदाई पैकेज'.
2026 में पारंपरिक करियर विकल्पों की जगह नए और उभरते हुए करियर विकल्पों की मांग बढ़ रही है. AI प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एग्रो-टेक, ड्रोन टेक्नोलॉजी, सस्टेनेबिलिटी मैनेजमेंट और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्र युवाओं के लिए बेहतर अवसर प्रदान कर रहे हैं. ये करियर न केवल बेहतर सैलरी देते हैं बल्कि कम समय में विशेषज्ञता हासिल करने के मौके भी देते हैं.
अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की 'स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026' रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में लगभग 40% युवा ग्रेजुएट बेरोजगार हैं, जो पिछले 40 वर्षों से लगभग स्थिर है. केवल 7% ग्रेजुएट युवाओं को ही एक साल के भीतर स्थायी नौकरी मिल पाती है. आर्थिक तंगी के कारण 72% युवाओं ने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी है.
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका में 1,000 से 2,000 कर्मचारियों को पहले ही WARN नोटिस भेजे जा चुके हैं. अमेरिकी कानून के तहत बड़ी छंटनी से पहले ऐसा नोटिस देना जरूरी होता है, हालांकि अमेजॉन ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है.
MGNREGA की जगह अब केंद्र सरकार नया कानून VB-G RAM G यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) लाने जा रही है. नए कानून में काम के दिन तो बढ़ाए ही जा रहे हैं, खेती के मौसम में ब्रेक पीरियड के भी प्रावधान किए जा रहे हैं.
मोदी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून MGNREGA को समाप्त करके एक नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की योजना बनाई है. विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन VB-G RAM G बिल, 2025 को वर्तमान शीतकालीन सत्र में चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया है. इस बिल का उद्देश्य 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक नया विकास मॉडल बनाना है.
भारत के सबसे शिक्षित राज्य केरल, गोवा और मिजोरम जहां साक्षरता दर 90% से ज्यादा है, अब एक नई चुनौती से जूझ रहे हैं. पढ़े-लिखे युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रहीं. PLFS 2022-23 की रिपोर्ट बताती है कि ऊंची साक्षरता के बावजूद इन राज्यों में युवाओं की बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा है. सवाल अब यही है कि जब शिक्षा बढ़ रही है तो रोजगार क्यों नहीं?
जुलाई-सितंबर 2025 में ग्रामीण महिलाओं की श्रम भागीदारी 37.5% पर पहुंची, बेरोजगारी में कमी और कुल रोजगार 56.2 करोड़ तक हो गया है.
हरियाणा में बीजेपी सरकार को सत्ता में आए एक साल से ज्यादा हो गया है, लेकिन बेरोजगारी अब भी गंभीर समस्या है. सरकार ने 2 लाख सरकारी और 5 लाख अप्रेंटिसशिप नौकरियों का वादा किया था, लेकिन विपक्ष का दावा है कि सिर्फ 10-11 हजार पद भरे गए.
छठ पूजा के बाद बिहार की सियासत गरमाने वाली है. कांग्रेस ने चुनावी मोर्चे पर बेरोजगारी, पलायन और SIR जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर नीतीश कुमार के 'सुशासन मॉडल' को घेरने की तैयारी कर ली है. राहुल गांधी खुद महागठबंधन के चेहरे के तौर पर मैदान में उतरेंगे और NDA सरकार से बीते 20 साल के कामकाज पर जवाब मांगेंगे.
बिहार में बेरोजगारी दर तो घटी है लेकिन पढ़े-लिखे युवाओं के लिए हालात अब भी मुश्किल हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जहां अनपढ़ों में बेरोजगारी सिर्फ 0.8% है, वहीं ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट युवाओं में यह 15 से 19% तक पहुंच चुकी है. सवाल ये है कि स्किल प्रोग्राम्स के बावजूद नौकरी क्यों नहीं मिल रही?
14 देशों की इस स्टडी में पता चला कि ज्यादातर लोग दो बच्चे चाहते हैं. भारत में 41% महिलाएं और 33% पुरुष कहते हैं कि वो दो बच्चों का परिवार चाहते हैं. लेकिन भारत की फर्टिलिटी रेट यानी एक महिला से औसतन बच्चों की संख्या 1.9 हो गई है जो 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से कम है.
Government Job in Rajasthan: राजस्थान नें सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी है. सरकार ने कॉन्स्टेबल पदों पर भर्ती का ऐलान किया है. राजस्थान पुलिस विभाग के अनुसार, 9617 रिक्त पदों में कांस्टेबल सामान्य, चालक, बैण्ड, और पुलिस दूरसंचार में ऑपरेटर व चालक के पद शामिल हैं. भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा, शारीरिक परीक्षा (फिजिकल टेस्ट), और दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के आधार पर किया जाएगा.
मध्य प्रदेश में नौकरी तलाश रहे युवाओं को 'आकांक्षी युवा' नाम दिया गया है, लेकिन इन युवाओं की आकांक्षाएं पिछले कई सालों से पूरी नहीं हो पा रही हैं.
बेरोजगारी की बात तब तक पूरी नहीं होती, जब तक हम श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) को न देखें. अगर लोग नौकरी की तलाश छोड़ देते हैं, तो बेरोजगारी दर अपने आप कम हो जाती है लेकिन भारत के मामले में ऐसा नहीं है. भारत की LFPR भी बढ़ रही है, यानी अधिक लोग नौकरी की तलाश में श्रम बाजार में आ रहे हैं और उन्हें नौकरियां भी मिल रही हैं.