अमेरिका-ईरान जंग के बीच भारत ने रूसी तेल आयात को तेजी से बढ़ाया है और हर महीने रूसी तेल आयात रिकॉर्ड बना है. जून और जुलाई के दौरान रूस से भारत ने रिकॉर्ड लेवल पर तेल आयात किया है. जुलाई 2026 में भारत ने रूस से करीब 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया, जो भारत के कुल क्रूड इंपोर्ट का करीब 55.5% है. इसी तरह, जून के दौरान कुल कच्चे तेल आयात का 50 फीसदी खरीद हुआ.
हालांकि, अब अमेरिका के सीनेट द्वारा एक ऐसा बिल पास किया गया है, जिसके तहत रूस से भारत का तेल आयात रुक सकता है. दरअसल, अमेरिका ऐसे टॉप 5 देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जो रूसी तेल का आयात बड़े स्तर पर करते हैं.
इस हिसाब से देखा जाए तो भारत का रूस से तेल आयात प्रभावित हो सकता है, जो एक बड़े झटके से कम नहीं होगा. यहां हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि अगर रूसी तेल का आयात बंद होता है, तो भारत क्या करेगा? दरअसल, भारत पिछले कुछ महीनों से विकल्प पर तेजी से काम कर रहा है. अमेरिका-रूस के अलावा कई छोटे-बड़े देशों से भारत कच्चा तेल का आयात कर रहा है.
फिलहाल भारत क्या होगा असर?
1. दूसरे बड़े सप्लायर से आयात बढ़ाना होगा
अभी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बन चुका है. अगर अचानक रूसी सप्लाई रुकी है, तो भारत को सऊदी अरब, UAE, इराक, अमेरिका और दूसरे देशों से एक्स्ट्रा तेल खरीदना पड़ेगा. हालांकि, भारत को इसमें परेशानी नहीं होगी, क्योंकि मौजूदा समय में भारत 41 जगहों से तेल का आयात कर रहा है. इस कारण भारत के पास बहुत से विकल्प मौजूद हैं, लेकिन भारत के सामने एक चुनौती अब भी होगी कि बड़े स्तर पर तेल की खरीदना आसान नहीं होगा. इसकी लागत भी ज्यादा बढ़ सकती है.
2. तेल की लागत बढ़ सकती है
रूसी तेल का सबसे बड़ा फायदा भारतीय रिफाइनर्स को इसकी कीमत में मिलने वाली छूट रही है. हालांकि, जुलाई के अंत तक यह डिस्काउंट काफी घटकर करीब 1 से 2 डॉलर प्रति बैरल रह गया था, जबकि जुलाई की शुरुआत में यह 10 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा था. ऐसे में अगर रूसी तेल बंद होता है तो भारत को महंगे तेल का आयात करना पड़ सकता है. इससे रिफाइनर्स की कॉस्ट बढ़ सकती हैं.
3. बढ़ सकती है महंगाई
कच्चे तेल के महंगे आयात से सीधा असर ईंधन पर हो सकता है, जिस कारण पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं. अगर लंबे समय तक कच्चा तेल आयात किया जाता है तो लॉजिस्टिक कॉस्ट और भारत की इंडस्ट्री पर भी असर हो सकता है. इससे महंगाई बढ़ सकती है. महंगा क्रूड से ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, फिर माल की ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी और फिर कई वस्तुओं की कीमतों पर असर होगा.
4. रुपये पर भी असर
पिछले दिनों हमे यह भी देखा था कि होर्मुज के बंद होने के कारण कच्चे तेल का आयात महंगा हुआ, जिस कारण भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करके कच्चे तेल का आयात करना पड़ा. इसका असर ये हुआ कि भारतीय रुपये पर दबाव आया और यह ऑल टाइम लो पर पहुंच गया. ऐसे में रूसी सस्ते तेल का आयात बंद होता है और महंगा तेल आयात किया जाता है तो एक बार फिर रुपये पर दबाव आ सकता है.
रूसी तेल का आयात बंद होने पर भी नहीं होगा गंभीर असर
अभी तो रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड ऊंचाई पर मौजूद है, लेकिन अगर रूसी तेल का आयात धीरे-धीरे कम भी होता है तो भी भारत पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं होगा. क्योंकि भारत के पास 41 अन्य विकल्प मौजूद हैं, जहां से वह अपने तेल का आयात बढ़ा सकता है और गंभीर समस्या को खत्म कर सकता है.
यह समस्या तब ज्यादा गंभीर होगी, जब रूसी तेल का आयात अचानक से बंद हो जाए और ग्लोबल स्तर पर भी कई देशों से सप्लाई किसी ना किसी वजह से रुक जाए. तब भारत पर तेल आयात को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.