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HDFC Bank को क्या हो गया? रोज गिर रहा शेयर... 5 साल में जीरो रिटर्न

HDFC Bank के शेयर में जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. 12 अगस्त को स्टॉक ₹722 के 52-वीक लो पर पहुंच गया. कमजोर Q1FY27 नतीजे, NIM में दबाव और FIIs की लगातार बिकवाली शेयर पर भारी पड़ रही है. बैंक का मार्केट कैप भी इस साल करीब ₹4 लाख करोड़ रुपये घट चुका है.

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एचडीएफसी बैंक का शेयर 52-वीक लो पर पहुंच गया. (File Photo)
एचडीएफसी बैंक का शेयर 52-वीक लो पर पहुंच गया. (File Photo)

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) की गिनती भारतीय बैंकिंग सेक्टर के सबसे कद्दावर कंपनियों में होती है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इस बैंक का शेयर मार्केट में परफॉर्मेंस उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है. साल 2023 में HDFC Ltd के मर्जर के बाद बैंक का आकार काफी बढ़ गया. हालांकि, मर्जर के बाद बैंक को अपनी बड़ी बैलेंस शीट के साथ ग्रोथ और मार्जिन के बीच संतुलन बनाने में समय लग रहा है.

निवेशकों को उम्मीद थी कि मर्जर के बाद HDFC Bank तेजी से अपनी कमाई और रिटर्न रेशियो में सुधार करेगा, लेकिन यह रिकवरी उम्मीद से धीमी रही है. HDFC मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से अब भी देश का सबसे बड़ा बैंक बना हुआ है, लेकिन उसे ICICI बैंक से कड़ी टक्कर मिल रही है. फिलहाल दोनों बैंकों के मार्केट कैपिटलाइजेशन के बीच का अंतर सिर्फ 9% के आसपास रह गया है.

शेयर 52-हफ्ते के लो पर

ब्लूमबर्ग के डेटा के मुताबिक, 12 अगस्त को जब HDFC बैंक का शेयर अपने 52-हफ्ते के नए निचले स्तर पर पहुंचा, तो उसका मार्केट कैप ₹11.14 लाख करोड़ था, जबकि ICICI बैंक का मार्केट कैप ₹10.21 लाख करोड़ था. इन दोनों के बाद भारतीय स्टेट बैंक का नंबर आता है, जिसका 12 अगस्त को मार्केट कैपिटलाइजेशन 9.96 लाख करोड़ था.

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HDFC Bank के शेयरों पर इस साल दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. 12 अगस्त 2026 को बैंक का शेयर कारोबार के दौरान ₹722 के 52-वीक लो पर पहुंच गया. कमजोर पहली तिमाही के नतीजों, मार्जिन पर दबाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली ने शेयर सेंटीमेंट को प्रभावित किया है. साल की शुरुआत में बैंक का शेयर ₹991 के स्तर पर ​था.

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13 अगस्त को दोपहर 3 बजे तक NSE पर HDFC Bank का शेयर करीब 0.37% गिरकर ₹726.25 पर कारोबार कर रहा था. वहीं BSE पर 0.39% गिरकर 726.15 पर कारोबार कर रहा था. NSE और BSE दोनों पर बैंक का मार्केट कैप करीब ₹11.19 लाख करोड़ था. 1 जनवरी 2026 को करीब ₹15.26 लाख करोड़ के मार्केट कैप के मुकाबले बैंक के मार्केट वैल्यू में इस साल अब तक करीब ₹4 लाख करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है.

अगस्त में भी शेयर पर दबाव

HDFC Bank के शेयर में अगस्त के दौरान भी कमजोरी बनी हुई है. अगस्त 2026 में अब तक 8 में से 7 ट्रेडिंग सेशन में शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ है. महीने में अब तक इसमें 3.5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. इससे पहले 20 से 24 जुलाई के बीच बैंक का शेयर करीब 9.3 फीसदी टूट गया था. यह गिरावट जून तिमाही के नतीजे जारी होने के बाद आई, जिन्हें बाजार की उम्मीदों के मुकाबले कमजोर माना गया.

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कैसे थे बैंक के Q1 नतीजे?

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में HDFC Bank का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5 फीसदी बढ़कर ₹19,060 करोड़ रहा. हालांकि, बैंक के प्रोविजन में बड़ी गिरावट ने मुनाफे की गुणवत्ता को लेकर बाजार में सवाल खड़े किए. बैंक के प्रोविजन ₹14,442 करोड़ से घटकर ₹3,060 करोड़ रह गए. यानी इसमें करीब 79 फीसदी की कमी आई. दूसरी ओर, बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 6.7 फीसदी बढ़कर ₹33,534 करोड़ रही. NII बैंक के कोर लेंडिंग बिजनेस की कमाई का एक अहम संकेतक माना जाता है.

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नेट इंटरेस्ट मार्जिन बड़ी चिंता

HDFC Bank के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में नेट इंटरेस्ट मार्जिन यानी NIM का दबाव शामिल है. जून तिमाही में बैंक का NIM 3.38 फीसदी से घटकर 3.26 फीसदी रह गया. यह बैंक के लिए रिकॉर्ड पर सबसे निचले स्तरों में से एक है. ऐतिहासिक तौर पर HDFC Bank का NIM 4 फीसदी से ऊपर रहा है. HDFC Ltd. के साथ विलय के बाद से भी बैंक के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है. लो-यील्डिंग होम लोन पोर्टफोलियो और अपेक्षाकृत महंगी फंडिंग लागत को इसके पीछे अहम कारणों में गिना जाता है. पहली तिमाही के नतीजों के बाद 20 जुलाई को बैंक का शेयर एक ही कारोबारी सत्र में 5 फीसदी से ज्यादा टूट गया था. पूरे जुलाई में भी शेयर में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई.

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FIIs की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

HDFC Bank के शेयर पर विदेशी निवेशकों की घटती हिस्सेदारी का भी असर पड़ा है. जून 2026 तिमाही के अंत में बैंक में FIIs की हिस्सेदारी 41.82 फीसदी रह गई, जबकि मार्च 2026 तिमाही के अंत में यह 44.05 फीसदी थी. तुलना करें तो वित्त वर्ष 2025-26 की जून तिमाही में FIIs के पास बैंक की 48.84 फीसदी हिस्सेदारी थी. यानी पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों का एक्सपोजर लगातार कम हुआ है. इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs की हिस्सेदारी बढ़ी है. Q1FY26 में 35.95 फीसदी के मुकाबले Q1FY27 में यह बढ़कर 41.92 फीसदी हो गई.

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Nifty पर भी पड़ता है सीधा असर

HDFC Bank सिर्फ एक बड़ा बैंकिंग स्टॉक नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद अहम शेयर है. 31 जुलाई 2026 तक Nifty 50 में इसकी हिस्सेदारी 10.27 फीसदी थी, जो इंडेक्स में शामिल सभी कंपनियों में सबसे ज्यादा थी. यही वजह है कि HDFC Bank में तेज गिरावट या तेजी का असर Nifty 50 और व्यापक बाजार के सेंटीमेंट पर भी पड़ सकता है. FIIs की भारतीय बाजार से बिकवाली के पीछे दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले भारत के हाई वैल्यूएशन, अमेरिकी बाजार में आकर्षक बॉन्ड यील्ड और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी जैसे कारण बताए जाते रहे हैं.

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पांच साल के रिटर्न पर भी सवाल

HDFC Bank के शेयर में हालिया कमजोरी ने लंबे समय के रिटर्न को लेकर भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है. पिछले पांच वर्षों में, HDFC बैंक के शेयरों ने लगभग जीरो या न के बराबर रिटर्न (करीब 3% से 5% रिटर्न) दिया है. हालांकि, किसी भी अवधि का रिटर्न निकालते समय शुरुआती तारीख, डिविडेंड और कॉरपोरेट एक्शन को ध्यान में रखना जरूरी है. इसलिए सिर्फ शेयर के मौजूदा भाव की तुलना 5 साल पुराने भाव से करना पूरी तस्वीर नहीं बताता.

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