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न्यूक्लियर एनर्जी से स्टील तक... बिहार को मिले ₹51,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

बिहार में इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने करीब ₹51,600 करोड़ के निवेश प्रस्तावों से जुड़े MoU साइन किए हैं. 6 अगस्त को पटना में हुए इन समझौतों में न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर का ₹22,500 करोड़ का प्रस्ताव सबसे बड़ा है. स्टील, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और फार्मास्युटिकल सेक्टर में भी निवेश प्रस्ताव आए हैं.

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बिहार को न्यूक्लियर एनर्जी, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर में ₹51,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले. (Photo: X/@samrat4bjp)
बिहार को न्यूक्लियर एनर्जी, स्टील और टेक्सटाइल सेक्टर में ₹51,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले. (Photo: X/@samrat4bjp)

बिहार सरकार ने राज्य में इं​डस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए करीब ₹51,600 करोड़ के निवेश प्रस्तावों से जुड़े समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इनमें सबसे बड़ा प्रस्ताव न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित लागत ₹22,500 करोड़ है. ये समझौते 6 अगस्त को पटना में हुए. इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इन निवेश प्रस्तावों का दायरा स्टील, न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और फार्मास्युटिकल सेक्टर तक फैला हुआ है.

निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ा दांव ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (GRACE Pvt Ltd) ने लगाया है. कंपनी ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में ₹22,500 करोड़ के निवेश के लिए एमओयू साइन किया है. राज्य सरकार इस निवेश को ऊर्जा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की अपनी रणनीति से जोड़कर देख रही है. सरकार का जोर क्लीन और न्यूक्लियर एनर्जी के जरिए राज्य की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर है.

स्टील सेक्टर में कुल 6 मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इनमें नक्षत्र आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड का ₹6,836 करोड़, अंकुल स्टील प्राइवेट लिमिटेड का ₹6,000 करोड़ और श्री लंगटा बाबा मेटल्स एंड पावर लिमिटेड का ₹5,500 करोड़ का निवेश प्रस्ताव शामिल है. सरकार का मानना है कि स्टील और मेटल सेक्टर में बड़े निवेश से बिहार को एक प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही इन परियोजनाओं से औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.

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टेक्सटाइल और अपैरल पर खास फोकस

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को राज्य के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया है. सरकार के मुताबिक, ये लेबर-इंटेंसिव सेक्टर हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं. इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग और फार्मास्युटिकल सेक्टर में भी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य अलग-अलग उद्योगों के जरिए राज्य में आर्थिक गतिविधियों को गति देना है.

एमओयू को धरातल पर उतारने पर जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य निवेश प्रस्तावों को तेजी से जमीन पर उतारना है, ताकि राज्य में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकें. उन्होंने स्टील और मेटल सेक्टर के निवेश को बिहार को बड़े स्टील हब के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम बताया. उन्होंने क्लीन और न्यूक्लियर एनर्जी के जरिए राज्य के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया.

बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारियों की भी समीक्षा की. सरकार के मुताबिक, यह पहल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को बिहार में निवेश के नए अवसरों से जोड़ने का प्लेटफॉर्म बनेगी. राज्य के इंडस्ट्रियल कैम्पेन को 'बिल्ड एंड बिलीव इन बिहार' थीम के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी है. सरकार का फोकस निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने और प्रस्तावित परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी एवं क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ाने पर है.

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