चीन की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले और देश को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल कराने वाले पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी का 98 साल की उम्र में निधन हो गया है. सरकारी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बीजिंग में अंतिम सांस ली. उनके निधन से चीन के राजनीतिक और आर्थिक जगत में एक युग का अंत हो गया है.
गौरतलब है, झू रोंगजी का जन्म अक्टूबर 1928 में हुआ था. उन्होंने साल 1998 से 2003 तक चीन के प्रधानमंत्री के रूप में देश की कमान संभाली थी, जबकि उससे पहले वह उप-प्रधानमंत्री भी रहे.
झू रोंगजी को चीन की राजनीति में एक बेहद सख्त, बेबाक और सुधारवादी नेता के रूप में जाना जाता था. वह अपनी बात को बहुत ही बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते थे, यही वजह है कि लोग उन्हें सम्मान और डर दोनों भाव से देखते थे.
चीन की अर्थव्यवस्था को दी थी नई रफ्तार
1990 के दशक में जब चीन की अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ रही थी और सरकारी उद्योगों की हालत बहुत खराब थी, तब झू रोंगजी ने बेहद कड़े फैसले लिए. उन्होंने बिना डरे घाटे में चल रहे सरकारी उद्योगों में भारी फेरबदल किया, जिससे देश में आर्थिक सुधारों का एक नया दौर शुरू हुआ. उनके इन्हीं सुधारवादी कदमों ने आगे चलकर चीन को दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई आर्थिक महाशक्तियों में खड़ा कर दिया.
झू रोंगजी के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि चीन को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शामिल कराना माना जाता है. साल 2001 में उनके नेतृत्व में चीन ने सालों की लंबी और कठिन बातचीत के बाद डब्ल्यूटीओ की सदस्यता हासिल की. इस एक फैसले ने चीन के लिए वैश्विक बाजारों के दरवाजे खोल दिए और देखते ही देखते चीन दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बन गया.
पूर्व प्रधानमंत्री झू रोंगजी के निधन की खबर सामने आने के बाद पूरी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है. अर्थशास्त्रियों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जो बना है, उसके पीछे झू रोड़जी की दूरगामी सोच और उनकी ओर से उठाए गए कड़े आर्थिक कदम ही सबसे बड़ा आधार रहे हैं. उनके जाने से चीन ने अपने एक ऐसे दूरदर्शी नेता को खो दिया है, जिसने आधुनिक चीन के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाई थी.
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