भारत में UPI पेमेंट को लेकर एक बार फिर फीस लगाने की चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, आम यूजर से कोई UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स पर शुल्क लगाने का कोई फैसला नहीं हुआ है. संसद में हुए हालिया कानूनी बदलाव से भविष्य में कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क या छूट तय करने का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन इससे अपने आप UPI पर कोई फीस लागू नहीं होती.
सरकार ने साफ किया है कि आम यूजर्स के लिए UPI ट्रांजैक्शन फिलहाल मुफ्त रहेगा. यानी बैंक अकाउंट से किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को पैसे भेजने या किसी दुकान पर UPI से भुगतान करने पर ग्राहक से अलग से शुल्क नहीं लिया जाएगा.
दरअसल, बहस का केंद्र Merchant Discount Rate यानी MDR है. यह वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट सिस्टम के इस्तेमाल पर आमतौर पर मर्चेंट से लिया जा सकता है. UPI के बैंक अकाउंट आधारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन लंबे समय से जीरो-MDR मॉडल पर चल रहे हैं.
संसद के बदलाव से क्यों बढ़ी चर्चा?
संसद से हुए कानूनी बदलाव ने सरकार को भविष्य में कुछ डिजिटल पेमेंट पर शुल्क या छूट से जुड़ा ढांचा तय करने की गुंजाइश दी है. हालांकि, यह अभी सिर्फ एक प्रावधान है. इसका मतलब यह नहीं है कि UPI पर तुरंत कोई नया शुल्क लागू हो गया है. असल सवाल यह है कि देश में हर दिन होने वाले अरबों UPI ट्रांजैक्शन के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑपरेशन की लागत आखिर कौन उठाएगा.
2016 में शुरू हुआ था UPI
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने की थी. उस समय 21 बैंक इस सिस्टम से जुड़े थे और पहले महीने सिर्फ 373 ट्रांजैक्शन हुए थे. इसके बाद UPI ने तेजी से विस्तार किया. मई 2026 में UPI पर करीब 23.20 बिलियन यानी 2,320 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू लगभग ₹29.90 लाख करोड़ रही. FY2025-26 में UPI ने करीब 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनकी वैल्यू ₹314 लाख करोड़ से ज्यादा थी. सरकार के मुताबिक, देश के डिजिटल पेमेंट वॉल्यूम में UPI की हिस्सेदारी अब करीब 85% है.
PhonePe और Google Pay क्या UPI हैं?
यहां एक अंतर समझना जरूरी है. PhonePe, Google Pay और Paytm खुद UPI नहीं हैं. ये ऐसे पेमेंट ऐप हैं, जिनके जरिए यूजर्स UPI नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं. UPI एक बेसिक डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो अलग-अलग बैंक खातों के बीच रियल टाइम में पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता है. इसी वजह से अब छोटे पेमेंट के लिए बैंक अकाउंट नंबर और IFSC की जरूरत कम हो गई है. UPI ID, मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए भुगतान करना संभव है.
छोटे कारोबारियों के लिए UPI क्यों अहम?
UPI ने ₹20, ₹50 और ₹100 जैसे छोटे भुगतान को भी डिजिटल बनाना आसान किया है. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के 2026 के आकलन के मुताबिक, 94% छोटे कारोबारियों ने UPI स्वीकार करने की बात कही. वहीं 72% व्यापारी डिजिटल पेमेंट से संतुष्ट थे और 57% ने कहा कि इससे उनकी बिक्री बढ़ी. इसी आकलन में 57% यूजर्स ने UPI को अपना पसंदीदा पेमेंट मोड बताया. 65% UPI यूजर्स ने रोजाना कई डिजिटल ट्रांजैक्शन करने की बात कही.
मुफ्त UPI मॉडल की लागत कौन उठाता है?
जीरो-MDR मॉडल का मतलब यह है कि ज्यादातर बैंक अकाउंट आधारित UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लिया जाता. सरकार ने इस मॉडल को बनाए रखने के लिए इंसेंटिव के जरिए समर्थन दिया है. डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, इसके लिए ₹8,276 करोड़ का बजटीय सपोर्ट दिया गया. अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने इसे ऐसी महत्वपूर्ण सब्सिडी बताया है, जिसने UPI को अंतिम यूजर के लिए मुफ्त बनाए रखने में मदद की है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा भी पहले यह सवाल उठा चुके हैं कि UPI के संचालन की लागत आखिर कोई न कोई चुका रहा है.
बड़े कारोबारियों से MDR लेने की चर्चा
UPI की लागत को लेकर भविष्य में बड़े मर्चेंट से कुछ शुल्क लेने की चर्चा होती रही है. 2024 में NPCI के तत्कालीन MD और CEO दिलीप अस्बे ने कहा था कि बड़े मर्चेंट उचित चार्ज दे सकते हैं, जबकि छोटे कारोबारियों को इससे बचाया जाना चाहिए.
कुछ प्रस्तावित मॉडलों में ₹2,000 से अधिक के बड़े मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR की चर्चा हुई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ऐसे ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का करीब 4% हो सकते हैं, लेकिन वैल्यू के लिहाज से इनकी हिस्सेदारी करीब 67% है. दूसरी रिपोर्ट्स में 0.25% से 0.4% तक की संभावित दरों का जिक्र किया गया है. हालांकि, अभी न तो कोई अंतिम MDR दर तय हुई है और न ही कोई निश्चित थ्रेशोल्ड लागू हुआ है.
क्या आम UPI यूजर पर पड़ेगा असर?
फिलहाल आम यूजर के लिए UPI इस्तेमाल करने का तरीका नहीं बदला है. दोस्त को ₹500 भेजना, परिवार के सदस्य को पैसे ट्रांसफर करना या किसी दुकान पर ₹200 का भुगतान करना अब भी बिना UPI चार्ज के किया जा सकता है. भविष्य में अगर कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू किया जाता है, तो यह मुख्य रूप से मर्चेंट-साइड लागत होगी. मर्चेंट इस लागत को खुद वहन कर सकता है या अपने कारोबार की कीमतों में उसका कुछ हिस्सा शामिल कर सकता है. यह अभी तय नहीं है.