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कहानी नेपाल के उन 3 जिलों की, जिन्होंने भोटेकोशी नदी का रौद्र रूप सबसे करीब से झेला

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी तबाही मचा दी. तेज बहाव के साथ आया मलबा बाजारों, घरों, सड़कों और पुलों को बहा ले गया. 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई, जबकि 270 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई है.

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फ्लैश फ्लड में ये तीन जिले सबसे ज्यादा तबाह हुए. (Photo- PTI)
फ्लैश फ्लड में ये तीन जिले सबसे ज्यादा तबाह हुए. (Photo- PTI)

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास से अचानक आई भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने कुछ ही घंटों में नेपाल के कई इलाकों की तस्वीर बदल दी. पानी के साथ आया मलबा, पत्थर और पेड़ों का बहाव इतना तेज था कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. शुरुआती रिपोर्ट्स में बाढ़ की वजह को लेकर अलग-अलग आशंकाएं सामने आईं.

बाद के आकलनों में सीमा के पास चट्टानों और बर्फ के बड़े हिस्से के खिसकने से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे आने की बात सामने आई. इस आपदा का सबसे ज्यादा असर रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में देखने को मिला. यहां अब तक 277 लोगों की मौत हो चुकी है और भारतीय समेत सैकड़ों लोग लापता है.

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1. रसुवा: जहां सबसे पहले पहले मची तबाही

इस तबाही की सबसे भयावह तस्वीर रसुवा से सामने आई. भोटेकोशी नदी के रास्ते आया पानी सबसे पहले इसी जिले के टिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में पहुंचा. देखते ही देखते बाजार, दुकानें, होटल, सड़कें और सुरक्षा चौकियां पानी और मलबे में घिर गईं. जिन जगहों पर कुछ देर पहले तक लोगों की आवाजाही थी, वहां बाढ़ के बाद सिर्फ मलबा नजर आया.

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रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में हालात इतने खराब हो गए कि राहत और बचाव टीमों के लिए सड़क के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया. कई जगह सड़कें और पुल टूट गए. पासांग ल्हामू हाईवे को भी भारी नुकसान पहुंचा, जिससे इलाके का संपर्क प्रभावित हुआ.

रसुवा इसलिए भी बेहद अहम है क्योंकि नेपाल-चीन सीमा की तरफ से आने वाला भोटेकोशी का पानी इसी इलाके से होकर नीचे की तरफ बढ़ता है. यानी यहां जो हुआ, उसका असर आगे नदी के पूरे रास्ते पर पड़ा.

2. नुवाकोट: जब भोटेकोशी त्रिशूली में मिली

रसुवा के बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट की तरफ बढ़ा. यहां भोटेकोशी का पानी त्रिशूली नदी की धारा में शामिल हुआ और उसका असर नदी किनारे बसे कई इलाकों में दिखाई दिया. बेत्रावती, मैलुड, शांतिबाजार और त्रिशूली बाजार जैसे इलाकों में पानी और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया.

कई जगह सड़कें टूट गईं और पुल क्षतिग्रस्त हो गए. नदी किनारे रहने वाले परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों की तरफ जाना पड़ा. यहां सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि बाढ़ सिर्फ एक छोटी धारा तक सीमित नहीं रही. भोटेकोशी का पानी त्रिशूली में मिलने के बाद इसका दायरा और बढ़ता चला गया.

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3. धादिंग: पानी के साथ पहाड़ भी बने खतरा

धादिंग में हालात और मुश्किल रहे. तेज बहाव ने नदी के किनारों को काटा तो कई जगह भूस्खलन भी शुरू हो गया. यानी लोगों के सामने खतरा सिर्फ नदी का नहीं था, बल्कि पहाड़ों से गिरते मलबे और टूटती सड़कों का भी था. कई इलाकों में सड़कें कट गईं और पुलों को नुकसान पहुंचा. इसका सीधा असर राहत और बचाव अभियान पर पड़ा. जिन इलाकों तक सामान्य परिस्थितियों में सड़क से आसानी से पहुंचा जा सकता था, वहां पहुंचना भी चुनौती बन गया.

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19 पुल और 40 किलोमीटर सड़क तबाह

इस आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी बड़ा झटका दिया. आंकड़ों के मुताबिक भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र में कम से कम 19 पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई. सड़क और पुल टूटने का मतलब सिर्फ आवाजाही बंद होना नहीं है, बल्कि राहत सामग्री, दवाइयां और बचाव दलों को प्रभावित लोगों तक पहुंचाना भी मुश्किल होना है. इसी वजह से नेपाल को कई इलाकों में राहत और बचाव के लिए हेलीकॉप्टर का सहारा लिया जा रहा है.

भोटेकोशी की यह बाढ़ सिर्फ पानी का एक तेज बहाव नहीं थी. इसने रास्ते में आने वाले घरों, बाजारों, सड़कों और पुलों को अपने साथ बहा दिया. रसुवा में जहां लोगों ने सबसे पहले इस सैलाब का रौद्र रूप देखा, वहीं नुवाकोट और धादिंग तक पहुंचते-पहुंचते यह पूरी नदी घाटी के लिए बड़ी आपदा बन चुकी थी. इसकी रफ्तार 55 किलोमीटर प्रति घंटा आंकी गई. हालात ऐसे थे कि 15 मिनट के भीतर मलबा 13 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका था. 15 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आई तबाही ने मौत का तांडव मचा दिया.

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