भोटेकोशी (Bhotekoshi) नेपाल की एक प्रमुख नदी है, जो कोशी नदी तंत्र का हिस्सा है. इसे सूर्य कोशी नदी की ऊपरी धारा और मुख्य सहायक नदी के रूप में जाना जाता है. यह नदी नेपाल और तिब्बत के बीच बहती है और दोनों क्षेत्रों में इसके अलग-अलग नाम प्रचलित हैं.
26 अगस्त 2026 को भोटेकोशी नदी में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के कारण अचानक बाढ़ की स्थिति बनी, जिससे रसुवा जिले और त्रिशूली नदी बेसिन में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ.
भोटेकोशी का सामान्य अर्थ तिब्बती नदी माना जाता है. नेपाल में इस नदी को भोटेकोशी कहा जाता है. नेपाली भाषा में भोटे या भोटिया शब्द का अर्थ तिब्बती होता है, जबकि कोशी का अर्थ नदी है. तिब्बत में इसे पोइकु नाम से जाना जाता है. शुरुआती एवरेस्ट अभियानों के दौरान इसे पो चू भी कहा गया था, जिसका अर्थ तिब्बत की नदी बताया जाता है. नदी का तिब्बती नाम मात्सांग त्सांगपो है.
भोटेकोशी और पोइकु नदी का उद्गम तिब्बत में झांगझांगबो ग्लेशियर के आसपास माना जाता है. नदी लुमी चिमी झील से निकलकर आगे बढ़ती है. नेपाल में प्रवेश करने के बाद इसे भोटे कोशी नाम मिलता है. इसके बाद बाह्रबिसे गांव से आगे जाने पर इसे सूर्य कोशी कहा जाता है.
भोटेकोशी का प्रवाह काफी तेज और ढलान वाला है. नेपाल में यह नदी राफ्टिंग और कयाकिंग के लिए खास तौर पर जानी जाती है. करीब 15 मीटर प्रति किलोमीटर के ढलान के कारण इसे नेपाल में राफ्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सबसे तेज ढलान वाली नदियों में गिना जाता है. नदी के कई हिस्सों में तेज बहाव और कठिन रैपिड्स देखने को मिलते हैं.
भोटेकोशी के आसपास बंजी जंपिंग और स्विंग जैसी साहसिक गतिविधियां भी लोकप्रिय हैं. नदी का ऊपरी हिस्सा काफी खड़ा और तेज बहाव वाला है, लेकिन आगे बढ़ने के साथ इसका प्रवाह कुछ शांत होता जाता है. लामोसुंगा बांध तक करीब 46 किलोमीटर के हिस्से में नदी का स्वरूप कई जगह बदलता दिखाई देता है. अधिक पानी के समय यहां के रैपिड्स को चौथी से पांचवीं श्रेणी का माना जाता है, जबकि कम पानी में कई हिस्से तीसरी श्रेणी के होते हैं.
हालांकि भोटेकोशी पर्यटन और रोमांचक खेलों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे जुड़े प्राकृतिक खतरे भी हैं. जुलाई 1981 में नदी के ऊपरी क्षेत्र में स्थित झांगझांगबु-चो झील में अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा गिरने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड आया था. इसके कारण मलबे का तेज बहाव आया और कई पुलों के साथ अरनिको राजमार्ग तथा नेपाल-चीन राजमार्ग के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ पर दुख जताया है. उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि सरकार राहत और बचाव कार्यों को तेज करने के लिए सभी संसाधन जुटा रही है. शाह ने बताया कि घायलों के इलाज के लिए काठमांडू के अस्पतालों में 100 बेड आरक्षित किए गए हैं. इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, पानी और अस्थायी आवास के इंतजाम किए जा रहे हैं.
नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाके में आई बाढ़ में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं को फंस गए हैं. ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने बताया कि गिरोंग में इमिग्रेशन सेंटर बाढ़ की चपेट में आ गया है, जहां उनकी संस्था की ओर से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 77 लोग फंसे हैं.