भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते धीरे-धीरे सुधरने लगे हैं. करीब 6 साल के बाद नाथुला दर्रा (Nathu La Pass) रूट को व्यापार के लिए खोल दिया गया है. दोनों देशों के बीच इस रूट से पहले बड़े पैमाने पर व्यापार होता था. इस रास्ते के दोबारा खुलने से स्थानीय व्यापारियों, अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में बेहतरी के संकेत मिल रहे हैं.
दरअसल, जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सैन्य झड़प के चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ गया था. जिसके बाद नाथुला दर्रा रूट को बंद कर दिया गया था. करीब 6 साल के बाद इस रूट को सीमा व्यापार के लिए खोल दिया गया है. इस बारे में भारत में मौजूद चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग (Yu Jing) ने जानकारी दी है.
इस रूट को बहाल करने के बाद करीब 600 स्थानीय भारतीय व्यापारी चावल, चाय, मसाले और रोजमर्रा की जरूरी चीजें लेकर सीमा पार कर रहे हैं, और साथ ही चीन से ऊन, कच्चा रेशम और तिब्बत का अन्य सामान वापस ला रहे हैं.
दरअसल, सिक्किम और आसपास के इलाकों के लगभग 600 स्थानीय भारतीय व्यापारी इस मार्ग से तिब्बत जा रहे हैं, वे अपने साथ मुख्य रूप से भारतीय चावल, चाय, पारंपरिक मसाले और रोजमर्रा की जरूरी सामग्रियां ले जा रहे हैं. वापस लौटते समय व्यापारी चीन के तिब्बत क्षेत्र से उच्च गुणवत्ता वाली ऊन, कच्चा रेशम और अन्य स्थानीय तिब्बती सामान भारत ला रहे हैं.
चीन और भारत के बीच रिश्ते सुधरने के एक और संकेत
यह दर्रा न केवल सिक्किम के स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका के लिए एक लाइफलाइन है, बल्कि यह सीमावर्ती क्षेत्रों में पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करता है. करीब 6 साल के बाद व्यापारिक गतिविधियों की यह बहाली स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के चेहरे पर नई उम्मीद और खुशी लेकर आई है.
बता दें, व्यापार दोबारा शुरू होना भारत और चीन के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत का सफल परिणाम माना जा रहा है. साल 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं बैठक में नाथुला (सिक्किम), लिपुलेख (उत्तराखंड) और शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश) के व्यापारिक मार्गों को फिर से खोलने पर सहमति बनी थी.
समुद्र तल से 4,302 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह नाथुला दर्रा भारत और तिब्बत को जोड़ने वाला एक बहुत ही खास ऐतिहासिक व्यापार लिंक माना जाता है. साल 1962 में टकराव के बाद ये रूट लंबे समय तक बंद था. साल 2006 में एक समझौते के तहत इस रूट से फिर व्यापार शुरू हुआ था. लेकिन 2020 में कोविड-19 महामारी और उसके बाद गलवान घाटी में हुए गतिरोध के कारण इसे फिर से रोक दिया गया था.