
नेपाल में तबाही के ग्राउंड जीरो पर देश का पहला चैनल, नुवाकोट से आजतक की Exclusive रिपोर्ट. जहां चारों तरफ सिर्फ मलबा, कीचड़ और तबाही का मंजर है, वहां आजतक की टीम सबसे पहले पहुंची और उन हालातों को कैमरे में कैद किया, जिन्हें देखकर रूह कांप जाए.
भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल को झकझोर कर रख दिया है. सैकड़ों लोग लापता हैं और 175 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सबसे ज्यादा तबाही चितवन, नुवाकोट और तैमूर के इलाकों में मची है, जहां सड़कें और रास्ते पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं.

कई लोग जान बचाने के लिए पहाड़ों पर चढ़ गए और अब वहीं फंसे हुए हैं. नेपाल की सेना और सिविल फोर्स दिन-रात एक करके रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं, लेकिन खराब मौसम और मुश्किल भौगोलिक हालात ने इस मिशन को और भी कठिन बना दिया है.
मौके से आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक, अब सिर्फ हेलीकॉप्टर ही जिंदगी और मौत के बीच की आखिरी उम्मीद बचे हैं, क्योंकि जमीन के सारे रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं. जगह-जगह मलबा और कीचड़ इतना ज्यादा है कि हेलीकॉप्टर को उतरने तक की जगह नहीं मिल पा रही.
मजबूरन लोगों को हवा में ही एयरलिफ्ट किया जा रहा है, जो बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक और मुश्किल भरा काम साबित हो रहा है. रोसोवो और तैमूर के बीच का इलाका सबसे बुरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है, जहां एक हाइड्रो प्रोजेक्ट भी चल रहा था और वहां सैकड़ों लोग काम करते थे. जब अचानक सैलाब आया, तो कई लोग वहीं फंसकर रह गए.
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राहत की बात सिर्फ इतनी है कि जहां भी थोड़ी सी जगह मिल रही है, वहां तुरंत छोटे-छोटे हेलीपैड बनाए जा रहे हैं ताकि छोटे हेलीकॉप्टर उतर सकें और लोगों को तीन-चार की संख्या में निकाला जा सके. फिलहाल करीब 14 से 15 हेलीकॉप्टर इस बड़े रेस्क्यू मिशन में जुटे हैं, जिनमें नेपाल की सेना के साथ-साथ सिविलियन अथॉरिटीज भी शामिल हैं. लेकिन आगे का करीब 50 किलोमीटर का इलाका अब भी पूरी तरह तबाही की चपेट में है, जहां हालात कब सुधरेंगे, कहना मुश्किल है.
आजतक की टीम जब शहर की एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत पर चढ़ी, तो वहां से नजारा देखकर हर कोई सन्न रह गया. जो शहर कभी रंग-बिरंगा और खूबसूरत हुआ करता था, अब वो सिर्फ एक ही रंग में नजर आ रहा है, वो रंग है कीचड़ और तबाही का. एक तरफ नदी बह रही है, जिसका बहाव अब भले कम दिख रहा हो, लेकिन किनारों पर बनी बाउंड्री लाइन बता रही है कि जब यह नदी अपने प्रवाह से बाहर निकली थी, तब पानी की ऊंचाई जमीन से 60 से 70 फीट तक ज्यादा थी.

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इसी नदी के किनारे कभी बड़ा बाजार और हजारों लोगों की आबादी वाला रिहायशी इलाका हुआ करता था. अब वहां के मकानों की पहली और दूसरी मंजिल तक कीचड़ के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं. ऊपर की मंजिलों में फंसे लोगों को निकालना सबसे बड़ी चुनौती बन गया था. इक्का-दुक्का लोग अब जेसीबी की मदद से अपने घरों तक पहुंच रहे हैं, ताकि जो थोड़ा-बहुत सामान बचा है, उसे लेकर आ सकें और जिंदगी को किसी तरह पटरी पर ला सकें.
शहर के दूसरे हिस्से में स्थिति और भी भयावह है. यहां कृषि विकास कार्यालय की पूरी पहली और दूसरी मंजिल मलबे में दब चुकी है. नदी जो पहले इस इमारत से करीब 50 मीटर दूर बहती थी, इस बार इतनी ऊंचाई पर आई कि उसने पूरी इमारत को ही अपनी चपेट में ले लिया. जिस ऊंचाई से यह सैलाब नीचे आया, उसमें गुरुत्वाकर्षण और मलबे की ताकत इतनी ज्यादा थी कि रास्ते में जो कुछ भी आया, सब कुछ बहाकर ले गई. यह तबाही इतनी भयानक थी कि नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग शायद इसे सालों तक नहीं भूल पाएंगे.
शहर के आधे हिस्से में पहुंचने पर पता चलता है कि अब यहां बचा ही कुछ नहीं है. सड़क के एक तरफ जो कमर्शियल दुकानें थीं और दूसरी तरफ जो रिहायशी घर थे, दोनों ही सैलाब की भेंट चढ़ चुके हैं. एक दंपती जेसीबी के सहारे किसी तरह अपने घर तक पहुंचा, ताकि थोड़ा बचा-खुचा सामान लेकर जिंदगी को आगे बढ़ा सके. लेकिन यहां सिर्फ एक परिवार की जिंदगी पर ही नहीं, पूरे शहर की रफ्तार पर ही ब्रेक लग गया है. ज्यादातर मकानों की पहली और दूसरी मंजिल मलबे में तब्दील हो चुकी है, और तबाही के इस मंजर से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां दोबारा पहुंचना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती है.
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इस पूरे हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू वो हजारों परिवार हैं जो अपनों की एक झलक पाने के लिए तड़प रहे हैं. सेना ने एक बेस कैंप और इन्फॉर्मेशन सेंटर बनाया है, जहां लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी लेने के लिए उमड़ पड़े हैं. कई परिवार दूर-दराज के इलाकों से चलकर यहां तक पहुंचे हैं, बस इस एक उम्मीद में कि शायद कोई अच्छी खबर मिल जाए. छोटे-छोटे बच्चे अपने पिता का इंतजार कर रहे हैं, तो पत्नियां अपने पतियों की राह तक रही हैं. जैसे ही कोई हेलीकॉप्टर उतरता है, हर आंख उम्मीद से चमक उठती है कि शायद इस बार कोई अपना जिंदा वापस आ जाए.
आजतक से बातचीत करते हुए एक परिवार ने बताया कि अगर वो दो मिनट भी यहां रुकते तो वह बच नहीं पाते. वह पानी में बह जाते.
नेपाल इस भीषण आपदा से जूझने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है, लेकिन संसाधनों की भारी कमी साफ महसूस हो रही है. फिर भी सेना, पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर हर उस कोने तक पहुंचने की जी-तोड़ कोशिश में जुटे हैं, जहां अब भी किसी की जान बचाई जा सकती है. रास्तों को दोबारा बहाल करना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि पहाड़ी इलाकों में एक बार अगर रास्ता टूट जाए, तो उसे फिर से बनाना आसान नहीं होता. आजतक की टीम अगले कई दिनों तक इस इलाके से लगातार अपडेट देती रहेगी, ताकि देश तक सच्चाई पहुंच सके.