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'Air India को जिंदा रखना हमारी जिम्मेदारी नहीं', एयरलाइन को लेकर सिंगापुर की संसद में घमासान

एअर इंडिया की मुश्किलें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं. भारी घाटे के बीच एयरलाइन ने अपने प्रमोटर्स टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से करीब $1.5 बिलियन की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है. फंडिंग की यह मांग अब सिंगापुर की संसद में भी चर्चा का मुद्दा बन गई है.

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घाटे से जूझ रही एअर इंडिया की फंडिंग की मांग सिंगापुर की संसद में चर्चा का मुद्दा बन गई. (File Photo: X/@AirIndia)
घाटे से जूझ रही एअर इंडिया की फंडिंग की मांग सिंगापुर की संसद में चर्चा का मुद्दा बन गई. (File Photo: X/@AirIndia)

एअर इंडिया (Air India) ने अपने मालिकों टाटा संस (Tata Sons) और सिंगापुर एयरलाइंस (Singapore Airlines) से करीब $1.5 बिलियन (₹14,313 करोड़) की नई इक्विटी फंडिंग मांगी है. यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब एयरलाइन भारी घाटे से जूझ रही है. एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने मार्च में समाप्त वित्त वर्ष में संयुक्त रूप से $2.33 बिलियन (₹22,180) का घाटा दर्ज किया है.

फंडिंग का यह मामला सिंगापुर की संसद तक पहुंच गया है. एअर इंडिया में टाटा संस की करीब 75% हिस्सेदारी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास करीब 25% हिस्सेदारी है. सिंगापुर एयरलाइंस की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर वहां की सरकारी इंवेस्टमेंट कंपनी टेमासेक होल्डिंग्स (Temasek Holdings) है.

सिंगापुर की संसद में उठे सवाल

सिंगापुर की वर्कर्स पार्टी के सांसद केनेथ टियोंग बून कियाट ने एअर इंडिया की नई डिमांड पर सवाल उठाया है. उन्होंने 8 सितंबर को होने वाली सिंगापुर की संसदीय बैठक में ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है. केनेथ टियोंग ने कहा, 'एअर इंडिया ने अपने मालिकों से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग मांगी है. सिंगापुर एयरलाइंस के पास एअर इंडिया की करीब एक-चौथाई हिस्सेदारी है और टेमासेक के पास सिंगापुर एयरलाइंस की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. इसलिए यह मामला सिर्फ निजी शेयरहोल्डर्स तक सीमित नहीं है. दोनों में से जो भी एअर इंडिया को फंडिंग देता है, उसका टेमासेक पर बड़ा असर पड़ेगा.'

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केनेथ टियोंग ने कहा, 'टाटा संस के चेयरमैन ने एअर इंडिया के टर्नअराउंड में एक दशक तक का समय लगने की बात कही थी. वही चेयरमैन फरवरी 2027 में पद छोड़ रहे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके मतभेदों की एक वजह एअर इंडिया का घाटा भी था. पिछले तिमाही में सिंगापुर एयरलाइंस भी घाटे में चली गई थी. एअर इंडिया को जिंदा रखने की जिम्मेदारी किसी की नहीं है, खासकर सिंगापुर के लोगों की तो बिल्कुल नहीं.'

उन्होंने आगे कहा, 'मैं एअर इंडिया को सहारा देने के लिए सिंगापुर एयरलाइंस के जरिए भविष्य में टेमासेक के फंड के किसी भी इस्तेमाल का समर्थन नहीं करूंगा और न ही ऐसी उम्मीद करता हूं. अगर सिंगापुर एयरलाइंस एअर इंडिया में अपना निवेश जारी रखना चाहती है, तो उसे यह फैसला अपने दम पर लेना चाहिए, टेमासेक के पैसे के सहारे नहीं.'

एअर इंडिया का घाटा दोगुना बढ़ा

नई फंडिंग की जरूरत उस समय सामने आई है, जब एअर इंडिया का वित्तीय प्रदर्शन दबाव में है. मार्च 2026 में खत्म हुए वित्त वर्ष में एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा करीब $2.33 बिलियन यानी 22000 करोड़ रुपये से अधिक रहा. यह पिछले साल के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है. एअर इंडिया फिलहाल अपने कारोबार को बदलने और मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रही है. इसमें पुराने विमानों का रिफर्बिशमेंट, फ्लीट में सुधार और ऑपरेशनल बदलाव शामिल हैं.

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टर्नअराउंड में लग सकते हैं 10 साल

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन पहले कह चुके हैं कि एअर इंडिया को पूरी तरह बदलने में लंबा समय लग सकता है. उनके मुताबिक, एयरलाइन के टर्नअराउंड में करीब एक दशक तक का समय लग सकता है. ऐसे में $1.5 बिलियन की नई फंडिंग की मांग बताती है कि एअर इंडिया के बदलाव के लिए अभी और पूंजी की जरूरत है. हालांकि, इस फंडिंग पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.

कई चुनौतियों से गुजर रही एयरलाइन

एअर इंडिया के लिए पिछला साल काफी मुश्किल रहा. कंपनी को अहमदाबाद विमान हादसे, पाकिस्तान के एयरस्पेस बैन करने और अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण इंटरनेशनल फ्लाइट नेटवर्क में आई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इन घटनाओं के अलावा एयरलाइन अपने फ्लीट और ऑपरेशंस को भी सुधारने की प्रक्रिया में है. इन सबके बीच कंपनी को कारोबार को स्थिर करने के लिए अतिरिक्त पूंजी की जरूरत पड़ रही है.

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