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आखिरी कॉल, फिर फोन खामोश, किसी का मैसेज रह गया अधूरा... लोगों की जुबानी नेपाल त्रासदी की कहानी

नेपाल में आई भयानक त्रासदी से चारों तरफ कहर और तबाही का मंजर है. इसी बीच कैलाश-मानसरोवर की यात्रा में निकले कई भारतीयों का उनके परिवारों से संपर्क टूट चुका है. अब परिजन बाढ़ में फंसे अपने प्रियजनों की खबर और सलामती की दुआ कर रहे हैं.

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नेपाल की त्रासदी में कई परिवारों का अपने प्रियजनों से संपर्क टूट चुका है (Photo-ITG)
नेपाल की त्रासदी में कई परिवारों का अपने प्रियजनों से संपर्क टूट चुका है (Photo-ITG)

नेपाल में भोटेकोशी नदी की भीषण बाढ़ ने सिर्फ सड़कें और पुल ही नहीं बहाए, बल्कि सैकड़ों परिवारों की खुशियां भी छीन लीं. कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीयों से संपर्क टूटने के बाद उनके परिवार आखिरी कॉल और संदेशों को याद कर अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं. भारत के कई परिवार अब नेपाल से आने वाली किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं.

नेपाल में कुदरत के कहर ने ऐसा मंजर दिखाया है, जिसे देखने के बाद भी यकीन करना मुश्किल है. रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़कें, पुल, घर और बस्तियां अपनी चपेट में ले लीं. इस तबाही के बीच सबसे दर्दनाक कहानी उन परिवारों की है, जिनके अपने कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गए थे. अब उनकी आवाज सुनाई नहीं दे रही.

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बाढ़ के बाद 384 पर्यटकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. इनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली पर्यटक बताए जा रहे हैं. इनमें 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक कई परिवार अपने परिजनों की जानकारी के लिए सरकार और दूतावास से लगातार संपर्क कर रहे हैं.

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किसी के पास आखिरी वीडियो कॉल की याद है, तो किसी के फोन में आखिरी ऑडियो मैसेज अब भी सुरक्षित है. कोई आखिरी बार अपने परिवार से बात करके निकला था, तो किसी ने सिर्फ इतना कहा था- ‘चिंता मत करना.’ लेकिन उसके बाद फोन खामोश हो गया.

बेटी से आखिरी बातचीत, फिर फोन की घंटी बजती रही

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर का गांगुली परिवार भी ऐसे ही इंतजार में है. तपोवन सिटी, बामनारा के रहने वाले मौसुमी गांगुली और अरिंदम गांगुली 21 अगस्त को कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए ‘चलो जाए’ संस्था के साथ रवाना हुए थे. बताया जा रहा है कि समूह में दुर्गापुर के करीब 5-6 लोग और कुल लगभग 36 यात्री थे.

परिवार के मुताबिक, यात्रा को लेकर दोनों बेहद उत्साहित थे. पड़ोसी गौतम अधिकारी बताते हैं कि अरिंदम इस कठिन यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास तक कर रहे थे.

यात्रा पर जाने के बाद दोनों की बेटी से पिछली रात तक बातचीत हुई थी. उसके बाद फोन पर घंटी तो जाती रही, लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. शुरुआत में परिवार ने इसे पहाड़ी इलाके में नेटवर्क की समस्या समझा. लेकिन जैसे-जैसे नेपाल में तबाही की खबरें सामने आईं, वैसे-वैसे चिंता डर में बदलती गई.

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‘घबराने की जरूरत नहीं’... आखिरी वीडियो कॉल के बाद संपर्क टूटा

तमिलनाडु के मुथुनाथन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उनकी पत्नी शिवरंजनी 23 अगस्त की शाम कैलाश पर्वत की धार्मिक यात्रा के लिए निकली थीं. यात्रा के दौरान बस तिब्बत सीमा के पास पहुंची. मुथुनाथन के मुताबिक, अचानक तेज आवाज सुनाई दी और फिर भारी भूस्खलन हुआ. बस में सवार यात्री किसी तरह वहां से निकलकर एक सैन्य शिविर तक पहुंच पाए.

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अगली सुबह करीब 11:30 बजे शिवरंजनी ने वीडियो कॉल कर पति को बताया कि घबराने की जरूरत नहीं है. परिवार को लगा कि हालात संभल गए हैं. लेकिन कुछ ही देर बाद बाढ़ की खबर ने सबकुछ बदल दिया. शाम करीब 4:30 बजे मुथुनाथन को पत्नी का एक ऑडियो मैसेज मिला. उसमें बताया गया कि यात्री नेपाल सरकार से संपर्क कर रहे हैं और हवाई रास्ते से रेस्क्यू की कोशिश की जा रही है. वह उनका आखिरी संदेश था. इसके बाद फोन खामोश हो गया.

32 यात्रियों से टूटा संपर्क

कोलकाता के ‘चलो जाए’ ट्रैवल क्लब से जुड़े करीब 32 यात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. इनमें कस्बा इलाके के कई लोग शामिल हैं. समूह में अमेरिका में रहने वाला एक भारतीय नागरिक भी बताया जा रहा है. चंदननगर और बारासात के कुछ यात्रियों के भी नेपाल में फंसे होने की जानकारी सामने आई है. समूह के साथ गए दो मैनेजरों से भी संपर्क नहीं हो पाया है. बताया गया है कि आखिरी बार बुधवार सुबह करीब 8 बजे उनसे बात हुई थी.

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60 साल की चित्रा की भी तलाश

तमिलनाडु के कुंभकोणम की 60 वर्षीय चित्रा भी ‘सुपर यात्रा’ समूह के साथ नेपाल गई थीं. बुधवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने WhatsApp कॉल पर तंजावुर में रहने वाली अपनी बहू से बात की थी. उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यही बातचीत उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगी. इसके बाद चित्रा से संपर्क नहीं हो पाया.

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दुर्गापुर से कोलकाता और तमिलनाडु तक कहानी अलग-अलग है, लेकिन दर्द एक ही है. किसी के पास आखिरी वीडियो कॉल है, किसी के पास अधूरा ऑडियो मैसेज और किसी के फोन में अब भी उस शख्स का नंबर सेव है, जिसकी घंटी बजती है लेकिन आवाज नहीं आती.

अब इन परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा भारी है. हर फोन कॉल एक नई उम्मीद लेकर आती है और हर अनजान नंबर पर दिल धड़क उठता है. उन्हें सिर्फ एक खबर का इंतजार है- ‘आपके अपने सुरक्षित हैं.’

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