नेपाल और चीन (तिब्बत) के सीमावर्ती इलाकों में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. इस हादसे के बाद तिब्बत के गिरोंग में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया ईशा फाउंडेशन का एक पूरा ग्रुप फंस गया है. वापसी के दौरान जब श्रद्धालु चीन के इमिग्रेशन दफ्तर में मौजूद थे, तभी अचानक आई बाढ़ ने पूरी इमारत और कस्बे को अपनी चपेट में ले लिया.
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्ग वासुदेव (सद्गुरु) ने बताया कि घटना के बाद से ही इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद किसी भी व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है. ऐसे में वो खुद इस मुश्किल समय में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए गिरोंग पहुंच चुके हैं.
सद्गुरु ने सोशल मीडिया पर आपदा पर जताते हुए कहा, 'चीन-तिब्बत के गिरोंग में भीषण बाढ़ आई है. हमारा एक कैलाश समूह इसकी चपेट में आ गया है. वापसी के दौरान जब वो इमिग्रेशन ऑफिस में थे, तभी बाढ़ आ गई. ऐसा लगता है कि इमारत और कस्बे का ज्यादातर हिस्सा जलमग्न हो गया है.'
रेस्क्यू में जुटे सद्गुरु
उन्होंने आगे कहा, 'हमारी पूरी टीम और वॉलंटियर्स गहरे संकट में हैं और बचाव कार्य में हर मुमकिन मदद कर रहे हैं. हम अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि उस जगह तक पहुंचा जा सके. हम सभी खतरों को उठाकर भी रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं.'
कैलाश सोजर्न के श्रद्धालुओं की डिटेल्स
ईशा फाउंडेशन के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल कैलाश यात्रा के लिए 21 ग्रुप गए हुए थे. इनमें से 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग फिलहाल तिब्बत में और 148 लोग नेपाल में मौजूद हैं. वहीं 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर में फंसे हैं या लापता. इसके अलावा तिमुरे (नेपाल) में 3 वॉलंटियर्स मौजूद है.
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मौजूद सद्गुरु ने श्रद्धालुओं के परिजनों को भरोसा दिलाते हुए कहा, 'मैं इस मुश्किल समय में प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के दर्द को समझता हूं. हम इस बेहद मुश्किल घड़ी में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. मैं खुद यहां मौजूद हूं ताकि मौजूदा हालात में हर मुमकिन और बेहतर कदम उठाया जा सके.'