तिब्बत (Tibet) मध्य एशिया में पठारों और पहाड़ों के एक विशाल क्षेत्र पर स्थित है, जहां माउंट एवरेस्ट है. इसकी सीमा उत्तर-पूर्व में चीनी प्रांत किंघई, पूर्व में सिचुआन और दक्षिण-पूर्व में युन्नान से लगती है, दक्षिण में म्यांमार (बर्मा), भारत, भूटान और नेपाल से; पश्चिम में विवादित कश्मीर क्षेत्र से लगती है. यह लगभग 2,500,000 वर्ग किमी में फैला है.
यह तिब्बती लोगों की मातृभूमि है. यहां कुछ अन्य जातीय समूह भी निवास करते हैं जैसे मोनपा, तमांग, कियांग, शेरपा और लोबा लोग और 20 वीं शताब्दी के बाद से, काफी संख्या में हान चीनी और हुई आप्रवासी भी निवास करते हैं.
तिब्बत प्रशासनिक रूप से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और किंघई, गांसु, युन्नान और सिचुआन प्रांतों के कुछ हिस्सों में विभाजित है. तिब्बत पृथ्वी पर सबसे ऊंचा क्षेत्र है, जिसकी औसत ऊंचाई 4,380 मीटर (14,000 फीट) है. हिमालय में स्थित, तिब्बत में सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट है, जो पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत है. यह समुद्र तल से 8,848.86 मीटर ऊपर है.
पिछले साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज हो चुकी फोर रिवर्स, सिक्स रेंजेज अब भारत में हिंदी में रिलीज हो चुकी है लेकिन इस फिल्म की कहानी जितनी दिलचस्प पर्दे पर है, उसके बनने की कहानी भी उतनी ही असाधारण है.
नेपाल-तिब्बत में अगस्त के अंत में लैंगटांग लिरंग पहाड़ से ग्लेशियर और चट्टान के ढहने से बाढ़ आई, करीब 1400 लोग मरे. वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने पर्माफ्रॉस्ट पिघलाने और ग्लेशियर पतला करने से आपदा की संभावना बढ़ाई.
तिब्बत के ऊंचे पहाड़ी इलाके पर सर्दी की शुरुआत में ज्यादा गर्मी पड़ने से हवा में लहरें बनती हैं. ये लहरें बहुत दूर जाकर कैलिफोर्निया में तेज बारिश और बाढ़ वाले तूफान लाती हैं. ला-नीना होने पर भी ये तूफान आ सकते हैं.
हिमालय तेजी से टिपिंग पॉइंट की ओर बढ़ रहा है. ग्लेशियर पहले से ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं. मध्य सदी तक पानी का बहाव आ जाएगा जिससे पानी की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी. लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है.
नेपाल की तबाही ने हिमालय के बढ़ते खतरे की ओर फिर ध्यान खींचा है. 200 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हाई रिस्क पर हैं और बाढ़ की लहर मिनटों में नीचे पहुंच सकती है. ऐसे में समय पर अलर्ट ही बड़ा बचाव बन सकता है.
नेपाल की तबाही का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है. फ्लैश फ्लड के बाद मलबे और तबाही के बीच शव मिलने का सिलसिला जारी है. मौतों का आंकड़ा 1,377 पहुंच गया है, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं. हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन कई परिवार अभी भी अपनों की तलाश में हैं.
तिब्बत और नेपाल में बुधवार को 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 35 किलोमीटर दर्ज की गई. हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद आए इन झटकों से पर्वतीय क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है.
मलबे में फंसे इंसान के लिए सिर्फ रेस्क्यू टीम ही नहीं, उसका अपना शरीर भी लड़ रहा होता है. जानिए इस लड़ाई में शरीर किस तरह एनर्जी बचाता है और कब मुश्किल बढ़ने लगती है.
चीन ने 1950-51 में तिब्बत पर कब्जा किया तो भारतीयों के लिए कैलाश मानसरोवर के दरवाजे बंद हो गए. लगभग तीन दशक तक ऐसी ही स्थिति बनी रही. फिर जनता पार्टी के तत्कालीन सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस मुद्दे को चीन की सरकार के साथ उठाया. कहा जाता है कि उनके चीन के तत्कालीन उप प्रधानमंत्री देंग शियाओ पिंग से अच्छे संबंध थे.
अगस्त के अंत में शी जिनपिंग किर्गिस्तान पहुंचे. वहां प्लेन से उतरते समय वीडियो में वे पत्नी पेंग लियुआन का हाथ कसकर पकड़े धीरे-धीरे सीढ़ियां उतरते दिखे. कुछ लोगों ने उनका चेहरा पीला, सूजा हुआ और चाल अस्थिर बताया. इसके बाद सोशल मीडिया खासकर तिब्बत ताईवान और विदेशी चीनी समुदायों में अटकलें तेज हो गईं कि उनकी सेहत खराब है या उन्हें सहारे की जरूरत पड़ रही है.
नेपाल के बेत्रावती कस्बे को बाढ़ ने पूरी तरह बहा दिया. त्रिशूली नदी का स्वरूप बदल गया. स्कूल, घर, मंदिर सब खत्म. लोग पहाड़ों पर भागकर बचे. मरने वालों का आंकड़ा 1200 पार. आज तक की टीम ने दुर्गम रास्ते से पहुंचकर तबाही देखी.
तिब्बत पहुंचने के लिए फ्लाइट की जगह ट्रेन से करीब 20 घंटे का सफर करने वाली ट्रैवलर का अनुभव बेहद खास रहा. इस यात्रा में ऊंचे पहाड़, तिब्बती पठार, कोना झील और बदलते खूबसूरत नजारे देखने को मिले. जानें दुनिया की सबसे ऊंची रेलवे पर सफर का पूरा अनुभव.
जब पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का सैलाब नीचे उतरता है, तो संभलने का वक्त बेहद कम मिलता है. नेपाल-तिब्बत की ताजा तबाही ने दुनिया को उन पुराने हादसों की याद दिला दी, जिनमें हजारों जिंदगियां पलभर में खत्म हो गईं.
कोरोना टाइम वाली टेक्नीक चीन नेपाल आपदा में भी अपना रहा है औक सूचनाओं के फ्लो पर एकदम ब्लैकआउट कर दिया है. चीन इस हादसे से जुडी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है. चीनी मीडिया में इस हादसे में मरने वालों की संख्या मात्र 16 है. जबकि हादसे के अगले ही दिन 100 चाइनीज लापता थे. कोरोना के दौरान भी चीन इसी तरह सूचनाओं को दबा कर रखता था.
फिल्म की शूटिंग नेपाल के मुस्तांग इलाके में हुई है, जो चीन की सीमा के बेहद करीब है. निर्देशक शेनपेन खिमसार के मुताबिक नेपाल में तिब्बत, दलाई लामा या चीन विरोधी गतिविधियों से जुड़ी फिल्म की शूटिंग के लिए अनुमति हासिल करना बेहद मुश्किल था.
नेपाल की फ्लैश फ्लड का असर तिब्बत तक पहुंचा. ग्यिरोंग से तबाही के कुछ स्थानीय वीडियो हटाए जाने के दावों के बाद चीन की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि सरकारी मीडिया रेस्क्यू अभियान को प्रमुखता दे रहा है.
नेपाल और तिब्बत सीमा के समीप बनी एक और प्राकृतिक झील के फटने की खबर सामने आई है. यह झील चच नदी और पुरेपको नदी के संगम के बिल्कुल पास स्थित थी. चीनी प्रशासन और वैज्ञानिकों ने इस घटना की आशंका केवल एक दिन पहले ही जाहिर कर दी थी. प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अगस्त को यह झील फटी और इसके ठीक दो दिन बाद आए भीषण तूफान के कारण झील का एक और हिस्सा टूट गया.
चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो के संगम पर बनी बैरियर लेक के अगले 72 घंटे में टूटने का हाई रिस्क बताया है. यह इलाका ऐसे नदी तंत्र से जुड़ा है जो नेपाल के रास्ते गंडकी बनकर भारत तक पहुंचता है, इसलिए नीचे के इलाकों में पानी के असर पर नजर है.
नेपाल में आई भयानक तबाही के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है. ट्रंप ने कहा है कि हमने फोन पर बात की है. उन्हें हर तरह की मदद की पेशकश की है, जिसकी उन्हें जरूरत है.
नेपाल के इस बाढ़ से सबसे ज़्यादा नुकसान रसुवा और नुवाकोट में हुआ है. लेकिन चितवन में सबसे ज्यादा डेड बॉडीज मिली है. इनकी हालत ऐसी है कि ये शव पहचान में नहीं आ रही हैं. छोटे शहर चितवन में एक साथ इतनी डेड बॉडीज आ जाने से मोर्चरी में शव रखने की जगह नहीं है.
चीन ने नेपाल को एक बार फिर से अलर्ट किया है कि सीमावर्ती इलाकों में ग्लेशियर के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन से भारी तबाही मचने के बाद, परी हिस्से में स्थित एक झील के ओवरफ्लो होने से तीन दिनों के भीतर एक और बाढ़ आ सकती है.