पश्चिम बंगाल में कलकत्ता हाई कोर्ट ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है. हाईकोर्ट ने कांग्रेस की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ की उम्मीदवारी को रद्द करने की मांग की गई थी.
दरअसल कांग्रेस ने याचिका दायर कर बीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ के जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियों का हवाला दिया था. लेकिन अब हाईकोर्ट इस फैसले के बाद अब हसीरानी रथ बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर नंदीग्राम उपचुनाव लड़ पाएंगी.
जानकारी के मुताबिक, हसीरानी रथ ने अपने हलफनामे में अपनी सही जन्मतिथि नहीं दी है, बल्कि उम्र '60 साल से ऊपर' लिखी है. वहीं, पढ़ाई के कॉलम में उन्होंने बताया है कि उन्होंने चौखाली गंगा पद्मा मिलन कन्या विद्यापीठ से साल 1965 में दसवीं की परीक्षा पास की थी.
क्या है पूरा मामला?
इस आंकड़े ने सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी थी कि अगर 2026 में उनकी उम्र 60 साल से कुछ ज्यादा है, तो उनका जन्म लगभग 1966 के आसपास बनता है, यानी दसवीं पास करने के एक साल बाद. वहीं, अगर सामान्य उम्र के हिसाब से देखें कि कोई छात्र 14 से 16 साल की उम्र में दसवीं पास करता है, तो 1965 के आधार पर उनकी जन्मतिथि 1949 से 1951 के बीच होनी चाहिए, जिससे उनकी असल उम्र 75 से 77 साल बैठती है.
इसी को आधार बनाते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग से भी जांच की मांग की थी और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इस मामले पर जस्टिस कृष्णा राव ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं और कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया.
कौन हैं हसीरानी रथ?
बता दें कि हसीरानी रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद ही चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी.
नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. उन्होंने साल 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी शानदार जीत दर्ज की थी और बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी, जिस पर अब उपचुनाव हो रहा है.