वाराणसी में गंगा का बढ़ता जलस्तर अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. पक्के घाटों को डुबोने के बाद बाढ़ का पानी अब आसपास की गलियों तक पहुंच गया है. इसका सबसे ज्यादा असर मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिल रहा है.
काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के सभी शवदाह पानी में डूब चुके हैं. ऐसे में अब ऊंची छत पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है. यहां एक बार में करीब 20 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है. इससे शवयात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है.
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शव लेकर पहुंचे लोगों का कहना है कि जगह की कमी के कारण उनका नंबर जल्दी नहीं लग पा रहा है. उन्हें संकरी गलियों और मुश्किल रास्तों से होकर घाट तक पहुंचना पड़ रहा है. लोगों ने प्रशासन से अतिरिक्त व्यवस्था करने की मांग की है.
बाढ़ की वजह से लकड़ी की सप्लाई भी बाधित
बाढ़ का असर लकड़ी के कारोबार पर भी पड़ा है. गंगा के रास्ते लकड़ी की सप्लाई बंद होने से कीमतों में करीब 10 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. लकड़ी कारोबारी अजय यादव के मुताबिक, बारिश में मजदूरी बढ़ने और सप्लाई प्रभावित होने से लागत बढ़ गई है.
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गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों और आसपास बने मंदिरों तक पहुंच चुका है. कई मंदिर और देवालय पूरी तरह जलमग्न दिखाई दे रहे हैं. घाटों के बीच संपर्क भी टूट गया है. गंगा किनारे घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, बाढ़ के बीच कुछ लोग जान जोखिम में डालकर स्टंट करते भी नजर आए. कुछ युवक पानी में डूबे मंदिरों के शिखर से गंगा में छलांग लगाते दिखे.

बाढ़ का असर दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती पर भी
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा का जलस्तर अभी वार्निंग लेवल से करीब ढाई मीटर और खतरे के निशान से साढ़े तीन मीटर नीचे है. प्रशासन ने 46 बाढ़ राहत शिविर और 21 बाढ़ चौकियां बनाई हैं. NDRF, SDRF और जल पुलिस को अलर्ट किया गया है. अगले आदेश तक नाव संचालन पर भी रोक लगा दी गई है. बाढ़ का असर दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती पर भी पड़ा है. विश्वप्रसिद्ध संध्या गंगा आरती को पांचवीं बार पीछे की तरफ शिफ्ट कर छत पर करना पड़ा है.