हांगकांग की एक अदालत ने अपने ही पांच साल के बेटे को भूखा रखकर मौत के घाट उतारने वाली महिला को 22 साल की जेल की सजा सुनाई है. अदालत ने इस मामले को बच्चों के साथ क्रूरता के सबसे गंभीर मामलों में से एक बताया. जज ने कहा कि मां ने जिस तरह अपने बेटे के साथ व्यवहार किया, उसमें ममता जैसी कोई भावना दिखाई नहीं देती.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सितंबर 2022 का है. 37 साल की महिला पर आरोप था कि उसने अपने पांच साल के बेटे को लंबे समय तक खाना नहीं दिया और उसके साथ लगातार मारपीट व अत्याचार किए. इसी वजह से बच्चे की मौत हो गई.
मौत के समय वजन हो गया था आधा
अदालत में पेश पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, मौत के समय बच्चे का वजन सिर्फ 9.7 किलोग्राम था. जबकि उसकी उम्र के बच्चे का सामान्य वजन इससे लगभग दोगुना होना चाहिए था. उसकी लंबाई करीब एक मीटर थी.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बच्चे के शरीर पर 129 चोटों के निशान थे. जांच में पता चला कि उसके साथ लंबे समय तक मारपीट की गई. उसे जबरन खाना खिलाने की कोशिश की गई, उसका मुंह बंद किया गया. शरीर को जोर से पकड़कर रगड़ा गया और उसके साथ लगातार हिंसा की गई.
कई दिनों से नहीं मिला था खाना
पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों को बच्चे के पेट में खाने का कोई अवशेष नहीं मिला. इससे अंदाजा लगाया गया कि मौत से पहले उसे कम से कम कई दिनों तक खाना नहीं दिया गया था.
अदालत में यह भी बताया गया कि महिला अपने बेटे को घर के एक कमरे में अलग रखती थी. वह उसे हफ्ते में सिर्फ कुछ ही बार कमरे से बाहर आने देती थी.इतना ही नहीं, उसने स्कूल के शिक्षकों से भी झूठ बोला ताकि बच्चे के लंबे समय तक स्कूल नहीं आने की असली वजह छिपी रहे.
जज ने कहा- इससे भयावह मामला सोचना मुश्किल
हाई कोर्ट की जज सुज़ाना डी'अल्मेडा रेमेडियोस ने फैसला सुनाते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर में इससे ज्यादा दर्दनाक और भयावह मामला शायद ही देखा हो. उन्होंने कहा कि यह जानकर बेहद दुख हुआ कि बच्चे की मौत उसे जानबूझकर भूखा रखने की वजह से हुई. मां ने जिस तरह की क्रूरता और लापरवाही दिखाई, वह इंसानियत और मातृत्व दोनों के खिलाफ है.
जज ने कहा कि मां के व्यवहार में ममता जैसी कोई भावना नजर नहीं आई और यह समझना मुश्किल है कि कोई मां अपने ही बच्चे के साथ इतना निर्दयी व्यवहार कैसे कर सकती है.
दो मामलों में हुई सजा
महिला ने अदालत में गैर-इरादतन हत्या और बच्चे के साथ क्रूरता के आरोप स्वीकार कर लिए. हालांकि, गैर-इरादतन हत्या के मामले में उम्रकैद तक की सजा हो सकती थी, लेकिन अदालत ने उसे इस आरोप में 20 साल की जेल सुनाई.
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इसके अलावा बच्चे के साथ क्रूरता के मामले में 2 साल की अलग सजा दी गई. अदालत ने दोनों सजाएं लगातार चलाने का आदेश दिया. इस तरह महिला को कुल 22 साल जेल में बिताने होंगे.