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कपल के पास दो ऑप्शन...या तो बच्चे करें या BMW रखें, दावे पर छिड़ी बहस

एक कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया कि भारत में 18 साल तक एक बच्चे की परवरिश पर 1.39 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई.

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विख्यात सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, खर्च भी बढ़ते जाते हैं. ( Photo: ITG)
विख्यात सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, खर्च भी बढ़ते जाते हैं. ( Photo: ITG)

क्या भारत में एक बच्चे को जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक पालने में 1.39 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं? सोशल मीडिया पर इन दिनों इसी सवाल को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. एक कंटेंट क्रिएटर ने दावा किया कि आज के समय में एक बच्चे की परवरिश पर करीब 1.39 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. उनके इस दावे पर हजारों लोगों ने अपनी राय दी. कुछ लोगों ने इसे सही बताया, जबकि कई लोगों का कहना है कि बच्चे की परवरिश को सिर्फ पैसों से नहीं आंका जा सकता.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कंटेंट क्रिएटर विख्यात सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में उन्होंने बताया कि वह बच्चे क्यों नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि अगर आज कोई परिवार बच्चे की परवरिश करता है तो जन्म से लेकर 18 साल की उम्र तक उस पर लगभग 1.39 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. उन्होंने अलग-अलग खर्चों का हिसाब लगाकर यह अनुमान बताया.

प्रेग्नेंसी से ही शुरू हो जाता है खर्च
उनके मुताबिक सबसे पहले प्रेगनेंसी का खर्च आता है. डॉक्टर की फीस, मेडिकल टेस्ट, दवाइयां, प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी और अन्य जरूरतों को मिलाकर करीब 3 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. इसके बाद बच्चे के जन्म से दो साल की उम्र तक डायपर, दूध, खाना, वैक्सीन और दूसरी जरूरी चीजों पर लगभग 6 लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान लगाया गया.

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सबसे ज्यादा खर्च शिक्षा पर
विख्यात सिंह का कहना है कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, खर्च भी बढ़ते जाते हैं. उन्होंने अनुमान लगाया कि 2 से 18 साल की उम्र तक खाने-पीने पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. वहीं शिक्षा सबसे महंगा हिस्सा है. प्ले-स्कूल, स्कूल फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल की दूसरी गतिविधियों को मिलाकर लगभग 33 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान उन्होंने लगाया. इसके अलावा ट्यूशन पर करीब 9 लाख रुपये का खर्च भी जोड़ा गया.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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इलाज, कपड़े और गैजेट्स पर भी लाखों का खर्च
क्रिएटर ने हेल्थ से जुड़े खर्चों का भी हिसाब लगाया. उनके अनुसार इलाज, दवाइयों और मेडिकल जरूरतों पर करीब 5.4 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं. वहीं मनोरंजन पर 9 लाख रुपये, कपड़ों पर 7.2 लाख रुपये, मोबाइल और लैपटॉप जैसे गैजेट्स पर करीब 4 लाख रुपये, खेल और अन्य एक्टिविटी पर 8 लाख रुपये तथा आने-जाने के खर्च पर भी करीब 8 लाख रुपये का अनुमान लगाया गया.

बड़ा घर भी बढ़ा देता है खर्च
सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस अनुमान की हुई जिसमें उन्होंने कहा कि बच्चे के लिए परिवार को बड़ा घर लेना पड़ सकता है. उन्होंने किराये के बड़े घर का अतिरिक्त खर्च करीब 32.4 लाख रुपये माना. इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद कुल राशि करीब 1.39 करोड़ रुपये पहुंचती है. उनका यह भी कहना था कि इसमें कॉलेज की पढ़ाई, महंगाई और निवेश से मिलने वाले संभावित रिटर्न को शामिल नहीं किया गया है. अगर इन सभी बातों को जोड़ दिया जाए तो यह खर्च 2 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकता है.

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BMW वाली तुलना पर छिड़ गई बहस
वीडियो में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि इतने पैसों में एक लग्जरी BMW M4 कार भी खरीदी जा सकती है. बस इसी तुलना ने सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू कर दी. कई लोगों ने कहा कि बच्चे की तुलना किसी कार से करना सही नहीं है. उनका मानना है कि माता-पिता बनने की खुशी और बच्चों का प्यार पैसों से नहीं मापा जा सकता.

लोगों की क्या रही राय?
हालांकि कुछ लोग इस बात से सहमत भी नजर आए. उनका कहना था कि आज शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में परिवार बढ़ाने से पहले आर्थिक योजना बनाना जरूरी हो गया है. कई यूजर्स ने कहा कि बच्चे की जिम्मेदारी केवल भावनात्मक नहीं बल्कि आर्थिक भी होती है, इसलिए हर दंपति को अपनी क्षमता के अनुसार फैसला लेना चाहिए.

कुल मिलाकर यह वीडियो लोगों को दो हिस्सों में बांटता नजर आया. एक पक्ष का कहना है कि बच्चे की परवरिश पर होने वाले खर्च की सच्चाई जानना जरूरी है, जबकि दूसरा पक्ष मानता है कि परिवार और बच्चों की खुशियों की कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती. यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर लगातार अपनी राय दे रहे हैं.

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