बृहस्पति
बृहस्पति (Jupiter) सूर्य से पांचवां और सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है. यह एक गैस विशाल है जिसका द्रव्यमान (Mass) सौर मंडल के अन्य सभी ग्रहों के संयुक्त द्रव्यमान के ढाई गुना से अधिक है, लेकिन सूर्य के द्रव्यमान के एक हजारवें हिस्से से थोड़ा कम है. चंद्रमा और शुक्र के बाद बृहस्पति पृथ्वी के रात्रि आकाश में तीसरा सबसे चमकीला प्राकृतिक पिंड है (Brightest Natural Object). लोग इसे प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Times) से देख रहे हैं.
बृहस्पति मुख्य रूप से हाइड्रोजन (Hydrogen) से बना है, लेकिन हीलियम (Helium) एक-चौथाई और इसकी मात्रा का दसवां हिस्सा है. इसमें भारी तत्वों का एक चट्टानी कोर होने की संभावना है, लेकिन, अन्य विशाल ग्रहों की तरह, बृहस्पति में ठोस सतह नहीं है. इसके अंदर के भाग में सूर्य से प्राप्त ऊष्मा से अधिक गर्मी उत्पन्न करता है. अपने फास्ट रोटेशन के कारण, ग्रह का आकार एक चपटा गोलाकार है. बाहरी वातावरण अलग-अलग अक्षांशों पर कई बैंडों में अलग-अलग दिखाई देता है, जिसमें उनकी सीमाओं के साथ एक शोर और तूफान उत्पन्न होता है. इस तूफान के कारण उस ग्रह पर ग्रेट रेड स्पॉट है (Great Red Spot on Jupiter).
सावन महीने में देवगुरु बृहस्पति के कर्क राशि में उच्च स्थिति में रहने से पंच महापुरुष राजयोग बन रहा है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह दुर्लभ संयोग करीब 12 साल बाद बना है. इस अवधि में कुछ राशियों को करियर, धन, मान-सम्मान और नए अवसर मिलने के संकेत बताए गए हैं. वहीं अन्य राशियों को भी सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है.
Guru Asta 2026 Impact: ज्योतिष शास्त्र में सुख, समृद्धि और भाग्य के कारक माने जाने वाले देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में अस्त हो चुके हैं. 9 अगस्त 2026 तक गुरु की यह अवस्था कई राशियों के जीवन में परेशानियां खड़ी कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन राशियों के बारे में.
Guru Asta 2026: आषाढ़ अमावस्या पर कल देवगुरु बृहस्पति अस्त होने जा रहे हैं, जिसका असर कई राशियों पर पड़ेगा. इस दौरान कई राशि के लोगों को धन, करियर और रिश्तों में सावधानी बरतने की जरूरत है. जानें गुरु अस्त का प्रभाव और बचाव के उपाय.
14 जुलाई 2026 से गुरु ग्रह अस्त अवस्था में प्रवेश करेंगे और 12 अगस्त 2026 तक इसी स्थिति में रहेंगे. 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या भी है. यह अवधि मेष, कर्क और धनु राशि के जातकों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति के लिहाज से शुभ मानी जा रही है.
19 जुलाई 2026 को देवगुरु बृहस्पति पुष्य नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र परिवर्तन का कुछ राशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. करियर, धन, प्रतिष्ठा और पारिवारिक जीवन में अनुकूल बदलाव के संकेत माने जा रहे हैं. हालांकि, ज्योतिषीय फल व्यक्ति की कुंडली और अन्य ग्रह स्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
14 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति अस्त होंगे. फिर 27 जुलाई को शनि मीन राशि में रहते हुए वक्री चाल शुरू करेंगे. जुलाई में इन दोनों ग्रहों की चाल बदलने से तीन राशियों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है. ज्योतिषविद इन्हें संभलकर रहने की सलाह दे रहे हैें.
ज्योतिषाचार्य कमलनंद लाल के अनुसार, गेहूं के आटे में हल्दी मिलाकर पीले रंग की रोटी बनाएं. रोटी तैयार होने के बाद उस पर थोड़ा गुड़ रखकर उसे गाय को खिलाएं. गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है. ये एक पुण्यदायी कर्म है.
गुरु ने कर्क राशि में गोचर कर लिया है. बृहस्पति मेष राशि से चौथे भाव में गोचर करेंगे. मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण भी चल रहा है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र का कहना है कि यह गोचर मेष राशि वालों को आर्थिक मोर्चे पर लाभ देने वाला है.
देवगुरु बृहस्पति ने आज कर्क राशि में गोचर कर लिया है. वृषभ राशि के लिए यह गोचर तीसरे भाव में हुआ है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर वृषभ राशि को कार्यक्षेत्र में मजबूत स्थिति, नए अवसर और खूब मान-सम्मान दिलाने वाला माना जा रहा है.
2 जून को बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. इस राशि पर शनि की ढैय्या भी चल रही है. चूंकि धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं. इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है.
2 जून यानी कल गुरु कर्क राशि में गोचर करने वाले हैं. कर्क राशि बृहस्पति की उच्च राशि मानी जाती है. इसलिए यह गोचर बहुत खास माना जा रहा है. दूसरा, गुरु पूरे 12 साल बाद कर्क राशि में वापसी कर रहे हैं. मीन राशि के लिए गुरु का यह गोचर पंचम भाव में होगा.
यदि संभव हो तो 2 जून को गरीबों, मजदूरों, वृद्धजनों या जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाएं. खाने की चीजों का दान करें. आप घर में बनी रोटियां, दाल, सब्जी या सादा भोजन भी प्रेम भाव से गरीब लोगों को दान कर सकते हैं. इस दिन आप गरीबों में जितना ज्यादा दान करेंगे, उतना ज्यादा पुण्य आपको मिलेगा.
2 जून को मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. तुला राशि के लिए यह गोचर 10वें भाव में होगा, जिसे करियर, प्रतिष्ठा और कर्म का भाव माना जाता है. ऐसे में इस गोचर का असर तुला राशि वालों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस राशि में आय के नए स्रोत भी उत्पन्न हो सकते हैं.
बृहस्पति कर्क राशि में 31 अक्टूबर तक रहेंगे. ज्योतिष में कर्क राशि को बृहस्पति की उच्च राशि माना जाता है. सिंह राशि के लिए यह गोचर 12वें भाव में होगा. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस गोचर का सिंह राशि के जातकों पर विशेष प्रभाव रहने वाला है.
देवगुरु बृहस्पति 2 जून से लेकर 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में संचरण करेंगे. बृहस्पति पूरे 12 साल बाद इस राशि में गोचर करने वाले हैं. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र के अनुसार, गुरु का यह गोचर चार राशियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद दिखाई दे रहे हैं.
2 जून को नौतपा का आखिरी दिन है और इस दिन देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर होने वाला है. गुरु पूरे 12 साल बाद कर्क राशि में आ रहे हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, गुरु का यह गोचर चार राशियों के लिए प्रतिकूल दिखाई दे रहा है.
नौतपा के अंतिम दिन देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन होने वाला है. 2 जून को गुरु करीब 12 साल बाद कर्क राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र ने इस गोचर को चार राशियों के लिए बहुत ही शुभ बताया है.
2 जून 2026 को बृहस्पति कर्क राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष के अनुसार मेष, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान करियर, स्वास्थ्य और धन मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अवधि में धैर्य, समझदारी और संतुलित निर्णय लेना लाभकारी साबित हो सकता है.
2 जून को बृहस्पति कर्क राशि में गोचर करने वाले हैं. इसके बाद गुरु 31 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र के अनुसार, कर्क राशि में जाने के बाद गुरु की ताकत बढ़ेगी और यह कई राशियों को लाभ देंगे.
अधिक मास चल रहा है और इस बीच मिथुन राशि में चंद्रमा और गुरु के एकसाथ आने के गजकेसरी योग का निर्माण हुआ है. अधिक मास में पड़ने वाले इस गजकेसरी योग को अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है. इस शुभ योग को तीन राशियों के लिए उत्तम माना जा रहा है.
इस हफ्ते शाम के आसमान में एक बेहद खास खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा. पतला सुनहरा चांद, शुक्र और बृहस्पति ग्रह एक साथ बेहद करीब दिखाई देंगे, जिसे बिना किसी दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकेगा. सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में नजर आने वाला यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह केवल दृश्य संयोग है, लेकिन आसमान में बनने वाला यह नजारा बेहद खूबसूरत और दुर्लभ माना जा रहा है