बृहस्पति
बृहस्पति (Jupiter) सूर्य से पांचवां और सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है. यह एक गैस विशाल है जिसका द्रव्यमान (Mass) सौर मंडल के अन्य सभी ग्रहों के संयुक्त द्रव्यमान के ढाई गुना से अधिक है, लेकिन सूर्य के द्रव्यमान के एक हजारवें हिस्से से थोड़ा कम है. चंद्रमा और शुक्र के बाद बृहस्पति पृथ्वी के रात्रि आकाश में तीसरा सबसे चमकीला प्राकृतिक पिंड है (Brightest Natural Object). लोग इसे प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Times) से देख रहे हैं.
बृहस्पति मुख्य रूप से हाइड्रोजन (Hydrogen) से बना है, लेकिन हीलियम (Helium) एक-चौथाई और इसकी मात्रा का दसवां हिस्सा है. इसमें भारी तत्वों का एक चट्टानी कोर होने की संभावना है, लेकिन, अन्य विशाल ग्रहों की तरह, बृहस्पति में ठोस सतह नहीं है. इसके अंदर के भाग में सूर्य से प्राप्त ऊष्मा से अधिक गर्मी उत्पन्न करता है. अपने फास्ट रोटेशन के कारण, ग्रह का आकार एक चपटा गोलाकार है. बाहरी वातावरण अलग-अलग अक्षांशों पर कई बैंडों में अलग-अलग दिखाई देता है, जिसमें उनकी सीमाओं के साथ एक शोर और तूफान उत्पन्न होता है. इस तूफान के कारण उस ग्रह पर ग्रेट रेड स्पॉट है (Great Red Spot on Jupiter).
ज्योतिषाचार्य कमलनंद लाल के अनुसार, गेहूं के आटे में हल्दी मिलाकर पीले रंग की रोटी बनाएं. रोटी तैयार होने के बाद उस पर थोड़ा गुड़ रखकर उसे गाय को खिलाएं. गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है. ये एक पुण्यदायी कर्म है.
गुरु ने कर्क राशि में गोचर कर लिया है. बृहस्पति मेष राशि से चौथे भाव में गोचर करेंगे. मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण भी चल रहा है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र का कहना है कि यह गोचर मेष राशि वालों को आर्थिक मोर्चे पर लाभ देने वाला है.
देवगुरु बृहस्पति ने आज कर्क राशि में गोचर कर लिया है. वृषभ राशि के लिए यह गोचर तीसरे भाव में हुआ है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह गोचर वृषभ राशि को कार्यक्षेत्र में मजबूत स्थिति, नए अवसर और खूब मान-सम्मान दिलाने वाला माना जा रहा है.
2 जून को बृहस्पति मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. इस राशि पर शनि की ढैय्या भी चल रही है. चूंकि धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं. इसलिए इस राशि के जातकों पर इसका असर अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है.
2 जून यानी कल गुरु कर्क राशि में गोचर करने वाले हैं. कर्क राशि बृहस्पति की उच्च राशि मानी जाती है. इसलिए यह गोचर बहुत खास माना जा रहा है. दूसरा, गुरु पूरे 12 साल बाद कर्क राशि में वापसी कर रहे हैं. मीन राशि के लिए गुरु का यह गोचर पंचम भाव में होगा.
यदि संभव हो तो 2 जून को गरीबों, मजदूरों, वृद्धजनों या जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाएं. खाने की चीजों का दान करें. आप घर में बनी रोटियां, दाल, सब्जी या सादा भोजन भी प्रेम भाव से गरीब लोगों को दान कर सकते हैं. इस दिन आप गरीबों में जितना ज्यादा दान करेंगे, उतना ज्यादा पुण्य आपको मिलेगा.
2 जून को मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. तुला राशि के लिए यह गोचर 10वें भाव में होगा, जिसे करियर, प्रतिष्ठा और कर्म का भाव माना जाता है. ऐसे में इस गोचर का असर तुला राशि वालों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस राशि में आय के नए स्रोत भी उत्पन्न हो सकते हैं.
बृहस्पति कर्क राशि में 31 अक्टूबर तक रहेंगे. ज्योतिष में कर्क राशि को बृहस्पति की उच्च राशि माना जाता है. सिंह राशि के लिए यह गोचर 12वें भाव में होगा. ज्योतिषाचार्य प्रवीण मिश्र के अनुसार, इस गोचर का सिंह राशि के जातकों पर विशेष प्रभाव रहने वाला है.
देवगुरु बृहस्पति 2 जून से लेकर 31 अक्टूबर तक कर्क राशि में संचरण करेंगे. बृहस्पति पूरे 12 साल बाद इस राशि में गोचर करने वाले हैं. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र के अनुसार, गुरु का यह गोचर चार राशियों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद दिखाई दे रहे हैं.
2 जून को नौतपा का आखिरी दिन है और इस दिन देवगुरु बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर होने वाला है. गुरु पूरे 12 साल बाद कर्क राशि में आ रहे हैं. ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, गुरु का यह गोचर चार राशियों के लिए प्रतिकूल दिखाई दे रहा है.
नौतपा के अंतिम दिन देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन होने वाला है. 2 जून को गुरु करीब 12 साल बाद कर्क राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र ने इस गोचर को चार राशियों के लिए बहुत ही शुभ बताया है.
2 जून 2026 को बृहस्पति कर्क राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष के अनुसार मेष, मिथुन, तुला और कुंभ राशि के जातकों को इस दौरान करियर, स्वास्थ्य और धन मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. ज्योतिष एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस अवधि में धैर्य, समझदारी और संतुलित निर्णय लेना लाभकारी साबित हो सकता है.
2 जून को बृहस्पति कर्क राशि में गोचर करने वाले हैं. इसके बाद गुरु 31 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे. ज्योतिषविद प्रवीण मिश्र के अनुसार, कर्क राशि में जाने के बाद गुरु की ताकत बढ़ेगी और यह कई राशियों को लाभ देंगे.
अधिक मास चल रहा है और इस बीच मिथुन राशि में चंद्रमा और गुरु के एकसाथ आने के गजकेसरी योग का निर्माण हुआ है. अधिक मास में पड़ने वाले इस गजकेसरी योग को अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है. इस शुभ योग को तीन राशियों के लिए उत्तम माना जा रहा है.
इस हफ्ते शाम के आसमान में एक बेहद खास खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा. पतला सुनहरा चांद, शुक्र और बृहस्पति ग्रह एक साथ बेहद करीब दिखाई देंगे, जिसे बिना किसी दूरबीन के भी आसानी से देखा जा सकेगा. सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में नजर आने वाला यह दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह केवल दृश्य संयोग है, लेकिन आसमान में बनने वाला यह नजारा बेहद खूबसूरत और दुर्लभ माना जा रहा है
देवगुरु बृहस्पति 2 जून को कर्क राशि में गोचर करने वाले हैं. इसके बाद गुरु 31 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे. ज्योतिष गणना के अनुसार, इन पांच महीनों में गुरु चार राशियों को करियर, आर्थिक और अन्य कई मामलों में लाभान्वित कर सकते हैं.
14 मई से लेकर 8 जून तक देवगुरु बृहस्पति और शुक्र देव मिलकर गजलक्ष्मी राजयोग बनाने वाले हैं. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह दुर्लभ संयोग तुला सहित चार राशि के जातकों को धन लाभ देने वाला है.
6 अप्रैल को ग्रहों बृहस्पति और सूर्य मिलकर केंद्र दृष्टि योग का निर्माण करने वाले हैं. ज्योतिषविदों का दावा है कि यह दुर्लभ योग तीन राशियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. ये शुभ योग मिथुन, कन्या और धनु राशि वालों को मालामाल कर सकता है.
Guru Margi 2026: बृहस्पति ग्रह कुछ दिन पहले ही मार्गी हुए थे. यानी बृहस्पति की सीधी चाल शुरू हुई थी, जो साल 2026 के आखिर तक जारी रहेगी. गुरु की मार्गी चाल को ज्योतिषविदों ने चार राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी बताया है.
19 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होने जा रही है. इस संवत के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे. बृहस्पति के राजा होने से स्थितियां थोड़ी बेहतर होंगी. हालांकि मंत्री मंगल होने से जन साधारण को समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है.
Guru Margi 2026: 11 मार्च को देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में मार्गी होंगे और 2 जून तक इसी अवस्था में रहेंगे. मिथुन राशि में गुरु की सीधी चाल कुछ राशियों के लिए कल्याणकारी साबित हो सकती है. मार्गी गुरु धन और करियर के मोर्चे पर कुछ राशियों को जबरदस्त लाभ दे सकते हैं.