scorecardresearch
 

ट्रंप ने AI का गेम बदल दिया? ‘सुपर इंटेलिजेंस’ समिट में हुए 3 बड़े ऐलान, जानिए क्या बदलेगा

अमेरिका में AI को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. डोनाल्ड ट्रंप ने टेक कंपनियों के साथ हुई खास समिट में एआई सेफ्टी, बड़े डेटा सेंटर्स और सुपर इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर बात की. इस बैठक में AI के भविष्य और इसे लेकर अमेरिका की नई सोच की झलक भी दिखाई दी.

Advertisement
X
राष्ट्रपति ट्रंप ने AI के जिम्मेदार लोगों के साथ डिनर किया है. (Photo- X/Screengrab)
राष्ट्रपति ट्रंप ने AI के जिम्मेदार लोगों के साथ डिनर किया है. (Photo- X/Screengrab)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में टेक्नोलॉजी की दुनिया के कई बड़े नामों के साथ एक खास मीटिंग की. इसे ट्रंप ने दिमाग और टेक्नोलॉजी की दुनिया की एक बड़ी बैठक बताया. इस मीटिंग में OpenAI, Anthropic, Nvidia, Meta, Google और SpaceX जैसी कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

मीटिंग ऐसे समय हुई है, जब AI को लेकर दुनिया में तेजी से बहस चल रही है. एक तरफ कंपनियां एआई को आगे बढ़ाने की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ इसकी सेफ्टी और गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता भी बढ़ रही है. इस पूरे समिट में तीन बातें सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं. आइए जानते हैं इसके बारे में.

AI कंपनियां खुद करेंगी अपनी निगरानी

ट्रंप और बड़ी एआई कंपनियों के अधिकारियों ने एक वॉलंटरी सेफ्टी समझौते पर साइन किया. ट्रंप ने इसे नैतिक तौर पर मानने वाला समझौता बताया. इसका मतलब है कि कंपनियों को अपनी AI टेक्नोलॉजी की सेफ्टी के लिए खुद मजबूत सिस्टम बनाना होगा.

समझौते के तहत कंपनियां अपने एआई मॉडल पर इंटरनल कंट्रोल रखेंगी. इसके साथ बाहरी और इंडिपेंडेंट ऑडिट के जरिए भी सिस्टम की जांच कराने की बात कही गई है. कंपनियों के एआई मॉडल बिना इजाजत किसी दूसरे टेक्निकल सिस्टम तक पहुंच न बना सकें, इस पर भी ध्यान दिया जाएगा.

Advertisement

ट्रंप ने कहा कि यह समझौता कुछ हद तक संविधान जैसा है. इसे कानूनी तौर पर लागू होने वाला कानून नहीं बताया गया है. इसी वजह से कुछ एक्सपर्ट्स ने इसकी प्रभावशीलता पर सवाल भी उठाए हैं.

यह भी पढ़ें: Apple का पहला फोल्ड फोन खरीदने का मौका, मिलेंगे कई ऑफर और होगी हजारों रुपये की बचत!

एआई के लिए बनेंगे और बड़े Data Centers

समिट में डेटा सेंटर्स भी बड़ा मुद्दा रहे. AI को चलाने के लिए बहुत ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए और इसके लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स बनाए जा रहे हैं.
ट्रंप ने इन डेटा सेंटर्स के फैलाव का समर्थन किया.

अमेरिका के कई इलाकों में बिजली की खपत और लोकल कम्युनिटी पर पड़ने वाले असर को लेकर विरोध भी देखने को मिल रहा है. ट्रंप ने कहा कि टेक कंपनियों को लोकल लोगों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और उन्हें इसका फायदा भी मिलना चाहिए.

Nvidia के CEO जेन्सेन हुआंग ने तो डेटा सेंटर्स को ‘सुपर इंटेलिजेंस फैक्ट्रीज’ तक कहा. उनका कहना था कि ये सेंटर अमेरिका में इंडस्ट्री और नौकरियों को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: AI का नाम बदला, अब अमेरिका में चलेगा ‘सुपर इंटेलिजेंस’! सरकार ने जारी किया नया आदेश

Advertisement

AI का नाम अब सुपर इंटेलिजेंस 

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात एआई के नाम को लेकर रही. ट्रंप ने सरकारी इस्तेमाल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की जगह सुपर इंटेलिजेंस या SI शब्द इस्तेमाल करने का आदेश दिया.

ट्रंप का कहना है कि आर्टिफिशियल शब्द इस टेक्नोलॉजी की ताकत को सही तरीके से नहीं दिखाता. इसलिए अब अमेरिका की सरकारी वेबसाइट्स, दस्तावेजों और आधिकारिक कम्युनिकेशन में सुपर इंटेलिजेंस नाम इस्तेमाल किया जाएगा.

यानी ट्रंप के इस समिट में सिर्फ एआई की सुरक्षा पर बात नहीं हुई, बल्कि AI को देखने और उसके इस्तेमाल का तरीका भी बदलने की कोशिश दिखाई दी. अब देखना होगा कि कंपनियों का यह सेल्फ रेगुलेशन मॉडल कितना असरदार साबित होता है और सुपर इंटेलिजेंस नाम अमेरिका के बाहर कितनी जगह अपनाया जाता है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement