आजकल युवाओं में हीटेड टोबैको पीने का चलन बढ़ रहा है. उनको लगता है कि इसको पीना सिगरेट से ज्यादा सेफ है और ये सेहत को नुकसान नहीं करता है. हीटेड टोबैको क्या होता है. ये सिगरेट की तुलना में क्या वाकई कम नुकसान करता है.Tabacco Control में प्रकाशित एक रिसर्च में जापान के 12 में से 11 इलाकों में इस प्रोडक्ट की बिक्री के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है. अध्ययन में पाया गया कि वर्ष 2011 से ही सिगरेट की बिक्री में गिरावट जारी थीहीटेड टोबैको प्रोडक्ट के देशभर में उपलब्ध होने के बाद सिगरेट की बिक्री में गिरावट हुई है.
जापान में इस रिसर्च क आंकड़े बताते हैं कि वहां हीटेड टोबैको प्रोडक्ट का यूज बढ़ा है. माना जा रहा है कि वहां इसको सिगरेट के एक ऑप्शन के तौर पर यूज किया जा रहा है और ये सिगरेट की तुलना में कम नुकसान करता है. लोगों में सिगरेट की लत को छुड़ाने के लिए इसका यूज किया जा रहा है.
क्या है हीटेड टोबैको?
हीटेड टोबैको में तंबाकू को सिगरेट की तरह जलाया नहीं जाता, बल्कि एक तापमान तक गर्म किया जाता है. इस प्रक्रिया से एरोसोल बनता है, जो शरीर में जाता है. हालांकि इसमें तंबाकू मौजूद रहता है और निकोटीन भी शरीर में पहुंचता है. सिगरेट और इसमें ये फर्क है कि सिगरेट में तंबाकू जलने के दौरान धुआं पैदा होता है, जिसमें कई केमिकल मौजूद होते हैं., वहीं, हीटेड टोबैको में तंबाकू को जलाने के बजाय गर्म किया जाता है. हालांकि धुंआ इसमें भी निकलता है, लेकिन ये माना जाता है कि ये कम नुकसान करता है.
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विशेषज्ञों के मुताबिक, हीटेड टोबैको से निकलने वाले कुछ हानिकारक पदार्थों का एक्सपोजर सिगरेट की तुलना में कम हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसके इस्तेमाल से कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और फेफड़ों की बीमारियों का जोखिम सिगरेट की तुलना में कितना कम होता है, इसको लेकर कोई खास रिसर्च नहीं है.
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एक्सपर्ट्स की क्या राय है?
बीएलके-मैक्स के सेंटर फॉर चेस्ट एंड रेस्पिरेटरी डिजीज के डायरेक्टर डॉ. पवन गुप्ता ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि जापान और भारत दोनों के पास तंबाकू और निकोटीन से जुड़ी अलग-अलग तरह की जानकारी और अनुभव हैं .जापान में नए निकोटीन उत्पादों के इस्तेमाल पर नजर रखी जाती है और इनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर की जानकारी जुटाई जाती है. वहीं, भारत को तंबाकू पर टैक्स लगाने, लोगों को तंबाकू छोड़ने में मदद करने और तंबाकू से जुड़े कानूनों को लागू करने का काफी अनुभव है.भारत में सिगरेट के अलावा गुटखा, खैनी और दूसरे धुआंरहित तंबाकू उत्पाद भी बड़ी संख्या में इस्तेमाल किए जाते हैं. कई रिसर्च ये बताती हैं कि हीटेड टोबौको सिगरेट की तुलना में कम नुकसान करता है.
डॉ. पवन गुप्ता के मुताबिक, अगर भारत और जापान के डॉक्टर, वैज्ञानिक और सरकारी अधिकारी मिलकर काम करें, तो दोनों देशों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि तंबाकू से होने वाले नुकसान को कम करने के कौन से तरीके दूसरे देशों में भी काम कर सकते हैं और कौन से तरीके वहां की परिस्थितियों के हिसाब से ही सही हैं.